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स्टेट बैंक में घोटाला: रुपये तो आए…घोटालेबाजों का हिसाब-किताब लेने में हीलाहवाली, अब तक नहीं दर्ज कराई एफआईआर

Fri, 09 May 2025 05:55 PM IST
हिमांशु अवस्थी अमित अवस्थी, अमर उजाला, कानपुर
अमित अवस्थी, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Fri, 09 May 2025 05:55 PM IST
सार

Kanpur News: सूत्रों ने बताया कि 10 साल पहले एसबीआई की लाटूश रोड शाखा में भी इसी तरह मृतक के निष्क्रिय खाते से 20 लाख रुपये निकाल लिए गए थे। इसके बाद प्रबंधन ने कई अफसरों पर कार्रवाई की थी। एक अधिकारी को नौकरी से हटा दिया गया था और कई के तबादले कर दिए गए थे।

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Kanpur Scam in State Bank Money came there is laxity in taking account of the scammers FIR not lodged till now
भारतीय स्टेट बैंक - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

कानपुर में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) की माल रोड स्थित पर्सनल बैंकिंग ब्रांच (पीबीबी) में निष्क्रिय खाते को फर्जी केवाईसी से सक्रिय कर 14.60 लाख का घोटाला किया गया। मामले की जांच लखनऊ के क्षेत्रीय प्रबंधक और कानपुर के सहायक महाप्रबंधक को सौंप गई है। शुरुआती जांच में पता चला है कि घोटालेबाजों को खाते के लंबे समय से निष्क्रिय होने की जानकारी थी।

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उन्होंने योजना के साथ इसे अंजाम दिया। ऐसे में अन्य निष्क्रिय खातों में भी सेंधमारी होने की आशंका है। अभी तक घोटालेबाजों के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं कराई गई है। एक मई को बैंक के मुख्य महाप्रबंधक को भेजे गए गुमनाम पत्र से 121-363 सिविल लाइंस कानपुर नगर कटरी बिठूर कला निवासी शिरोमणि यादव के वर्ष 2022 से निष्क्रिय बैंक खाते (संख्या 11022343963) से 14.60 लाख रुपये निकालने की जानकारी मिली।

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15 अप्रैल को निष्क्रिय कर दिया गया खाता
पत्र में बताया गया कि बैंक में उप प्रबंधक स्तर के अधिकारी व एसबीआई ऑफिसर्स एसोसिएशन के पदाधिकारी ने अन्य अफसरों और कर्मियों के साथ मिलकर फर्जी ई-केवाईसी करके इस निष्क्रिय खाते को 25 मार्च 2025 को सक्रिय करवाकर घोटाले को अंजाम दिया। मामले में चर्चा शुरू हुई तो 11 अप्रैल को खाते में रुपये जमा करा दिए गए और इसे फिर से 15 अप्रैल को निष्क्रिय कर दिया गया।

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उच्च प्रबंधन ने अब तक दर्ज नहीं कराई है एफआईआर
बताया गया कि अब पूरे मामले की जानकारी लखनऊ और कानपुर के अधिकारी मिलकर करेंगे। शुरुआती आंतरिक जांच में फर्जी आधारकार्ड, पता से जुड़े दस्तावेजों की जानकारी मिली है। इसका सत्यापन कराया जा रहा है। अब तक उच्च प्रबंधन की ओर से एफआईआर दर्ज नहीं कराने से उनकी भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

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10 साल पहले लाटूश रोड शाखा में भी आया था इस तरह का मामला
सूत्रों ने बताया कि 10 साल पहले एसबीआई की लाटूश रोड शाखा में भी इसी तरह मृतक के निष्क्रिय खाते से 20 लाख रुपये निकाल लिए गए थे। इसके बाद प्रबंधन ने कई अफसरों पर कार्रवाई की थी। एक अधिकारी को नौकरी से हटा दिया गया था और कई के तबादले कर दिए गए थे।

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