कानपुर: रेलवे का माल ढुलाई पर जोर, बांग्लादेश भेजा डि-आयल केक, सिलचर के लिए चावल रवाना, मिला लाखों का राजस्व
Kanpur News: पनकीधाम गुड्स शेड की नई लाइन-15 से पहली बार डि-आयल केक बांग्लादेश के रोहनपुर भेजा गया। इसके साथ ही चार साल बाद मक्के की लोडिंग और सिलचर के लिए चावल रवाना कर रेलवे ने लाखों रुपये का राजस्व अर्जित किया है।
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यात्रियों के साथ अब माल ढुलाई में भी रेलवे अपनी पकड़ मजबूत करने में जुटा है। कानपुर के गुड्स शेड से माल लदान में तीन बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं। केंद्रीय माल गोदाम से चार साल बाद पहली बार 20 वैगन में मक्का लादा गया। इससे रेलवे को 16.64 लाख रुपये का मालभाड़ा मिला। वहीं पनकीधाम गुड्स शेड की नवनिर्मित लाइन नंबर-15 से पहली बार 21 बीसीएन वैगन में डि-आयल केक बांग्लादेश के रोहनपुर भेजा गया। इससे करीब 24 लाख रुपये मालभाड़ा मिलने की उम्मीद है।
पनकीधाम से सिलचर भी भेजा चावल
पनकीधाम गुड्स शेड से चार वैगन में चावल सिलचर के लिए रवाना किया गया। इससे रेलवे को 6.71 लाख रुपये का मालभाड़ा राजस्व प्राप्त हुआ। रेलवे का दावा है कि नई कमोडिटी और नए कारोबारियों को रेल परिवहन से जोड़ने के प्रयासों से माल लदान में इजाफा हो रहा है।
डि-आयल केक बांग्लादेश के लिए रवाना
पनकीधाम गुड्स शेड में बनाई गई लाइन नंबर-15 का पहली बार माल लदान के लिए इस्तेमाल हुआ। इसी लाइन से 21 बीसीएन वैगन में डि-आयल केक बांग्लादेश के रोहनपुर के लिए रवाना किया गया। रेलवे के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि नई लाइन के इस्तेमाल से गुड्स शेड की क्षमता का बेहतर उपयोग शुरू हुआ है।
सड़क के बजाय रेल से माल ढुलाई पर जोर
रेलवे प्रशासन माल परिवहन को सुरक्षित, सुविधाजनक और किफायती बनाने के साथ सड़क से रेल की ओर माल ढुलाई बढ़ाने पर जोर दे रहा है। रेलवे के जनसंपर्क अधिकारी अमित कुमार के अनुसार व्यापारियों और नए ग्राहकों से संपर्क कर अधिक से अधिक माल को रेल नेटवर्क से जोड़ने की कोशिश की जा रही है। कानपुर गुड्स शेड से मक्का की पहली लोडिंग और पनकीधाम की नई लाइन से पहली खेप इसी अभियान का हिस्सा है।