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कानपुर: सिंहपुर के पास विकसित होगी न्यू कानपुर सिटी फेज-वन योजना, दोषी अफसरों, कर्मियों पर होगी कार्रवाई
Sun, 22 Aug 2021 08:53 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Sun, 22 Aug 2021 08:53 AM IST
सार
इस योजना को पूर्व में असफल करने में लिप्त अफसरों, कर्मियों पर कार्रवाई का भी फैसला लिया गया। कमिश्नर ने बताया कि न्यू कानपुर सिटी योजना को पूर्व में फेल करने वालों में अफसरों सहित छह कर्मी चिह्नित किए गए थे।
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केडीए, कानपुर
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विस्तार
केडीए (कानपुर विकास प्राधिकरण) की ओर से 1996 में बनाई गई न्यू कानपुर सिटी योजना का सपना अब जाकर साकार होता नजर आ रहा है। पहले चरण में बिठूर के सिंहपुर के पास करीब 80 हेक्टेयर जमीन पर योजना विकसित की जाएगी। शनिवार को हुई केडीए की बोर्ड बैठक में प्रस्ताव को हरी झंडी मिल गई है।
डेढ़-दो माह में योजना बनाकर बोर्ड की अगली बैठक में रखी जाएगी। वहीं इस योजना को पूर्व में असफल करने में लिप्त अफसरों, कर्मियों पर कार्रवाई का भी फैसला लिया गया। शनिवार को करीब सात घंटे चली केडीए बोर्ड की 133वीं बैठक में न्यू कानपुर सिटी योजना के लिए गंगपुर चकबदा सहित आसपास के अन्य गांवों में अर्जित जमीनों, उनकी स्थिति, पहुंच मार्ग में आड़े आ रही निजी जमीनों आदि की सर्वे रिपोर्ट प्रस्तुत की गई।
इसके बाद केडीए बोर्ड अध्यक्ष कमिश्नर डॉ. राजशेखर ने निर्णय लिया कि न्यू कानपुर सिटी का पहले एक सेक्टर विकसित किया जाएगा। इसके लिए केडीए के पास जमीन उपलब्ध है। योजना का प्रस्ताव तैयार करने को कहा गया है। चार छोटे-छोटे सेक्टर (फेज) बनाने के बजाए एक-दो बड़े फेज विकसित करने पर सहमति बनी है। इस योजना के बीच में जो काश्तकारों की जमीनें पड़ेंगी, उन जमीनों को लिया जाएगा। निजी जमीनें किसानों से खरीदने या उसके बदले जमीन देने पर विचार होगा।
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पूर्व में योजना फेल करने वाले अफसरों, कर्मियों पर कार्रवाई
कमिश्नर ने बताया कि न्यू कानपुर सिटी योजना को पूर्व में फेल करने वालों में अफसरों सहित छह कर्मी चिह्नित किए गए थे। बोर्ड ने अन्य जिम्मेदारों के खिलाफ भी जांच कर शासन से कार्रवाई की संस्तुति की जाएगी।
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डेढ़-दो माह में योजना बनाकर बोर्ड की अगली बैठक में रखी जाएगी। वहीं इस योजना को पूर्व में असफल करने में लिप्त अफसरों, कर्मियों पर कार्रवाई का भी फैसला लिया गया। शनिवार को करीब सात घंटे चली केडीए बोर्ड की 133वीं बैठक में न्यू कानपुर सिटी योजना के लिए गंगपुर चकबदा सहित आसपास के अन्य गांवों में अर्जित जमीनों, उनकी स्थिति, पहुंच मार्ग में आड़े आ रही निजी जमीनों आदि की सर्वे रिपोर्ट प्रस्तुत की गई।
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इसके बाद केडीए बोर्ड अध्यक्ष कमिश्नर डॉ. राजशेखर ने निर्णय लिया कि न्यू कानपुर सिटी का पहले एक सेक्टर विकसित किया जाएगा। इसके लिए केडीए के पास जमीन उपलब्ध है। योजना का प्रस्ताव तैयार करने को कहा गया है। चार छोटे-छोटे सेक्टर (फेज) बनाने के बजाए एक-दो बड़े फेज विकसित करने पर सहमति बनी है। इस योजना के बीच में जो काश्तकारों की जमीनें पड़ेंगी, उन जमीनों को लिया जाएगा। निजी जमीनें किसानों से खरीदने या उसके बदले जमीन देने पर विचार होगा।
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पूर्व में योजना फेल करने वाले अफसरों, कर्मियों पर कार्रवाई
कमिश्नर ने बताया कि न्यू कानपुर सिटी योजना को पूर्व में फेल करने वालों में अफसरों सहित छह कर्मी चिह्नित किए गए थे। बोर्ड ने अन्य जिम्मेदारों के खिलाफ भी जांच कर शासन से कार्रवाई की संस्तुति की जाएगी।
योजना में एक अरब से ज्यादा फूंक चुका है केडीए
केडीए ने 1996 मेें कल्याणपुर-बिठूर रोड और मैनावती मार्ग के आसपास 464 हेक्टेयर जमीन पर योजना विकसित करने का फैसला लिया था। केडीए ने जमीन अर्जित करने के लिए धारा-4 का प्रकाशन किया। नियमानुसार अधिग्रहण की कार्यवाही पूरी करते हुए धारा-6 की अधिसूचना 365 दिन में जारी हो जानी चाहिए, पर अफसरों ने भूमाफियाओं, बिल्डरों और सफेदपोशों से मिलीभगत के चलते अधिसूचना 366 दिन बाद जारी की।
इसके चलते सारे प्रयासों पर पानी फिर गया। इसके बाद सैकड़ों काश्तकारों ने जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। 352 हेक्टेयर जमीन पर काबिज दुकानदारों ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर दी। 2005 में हाईकोर्ट ने जमीन अर्जन पर रोक लगा दी। इस फैसले के खिलाफ केडीए सुप्रीम कोर्ट गया, पर वहां भी हार का सामना करना पड़ा, जबकि केडीए ने एक-एक तारीख की लाखों रुपये फीस लेने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता पैरवी में लगाए थे।
सुप्रीम कोर्ट ने भी हाईकोर्ट जाने वाले करीब 352 हेक्टेयर जमीन के सैकड़ों काश्तकारों की जमीन अर्जन के प्रस्ताव को खारिज कर दिया। तब तक केडीए जमीन अर्जन से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक पैरवी पर एक अरब 13 करोड़ रुपये फूंक चुका था। इसके बाद केडीए ने उन किसानों की करीब 111 हेक्टेयर जमीन कब्जे में ली, जो हाईकोर्ट नहीं गए थे। हालांकि मिलीभगत के चलते तब भी तत्कालीन केडीए अधिकारियों ने योजना विकसित नहीं की।
केडीए ने 1996 मेें कल्याणपुर-बिठूर रोड और मैनावती मार्ग के आसपास 464 हेक्टेयर जमीन पर योजना विकसित करने का फैसला लिया था। केडीए ने जमीन अर्जित करने के लिए धारा-4 का प्रकाशन किया। नियमानुसार अधिग्रहण की कार्यवाही पूरी करते हुए धारा-6 की अधिसूचना 365 दिन में जारी हो जानी चाहिए, पर अफसरों ने भूमाफियाओं, बिल्डरों और सफेदपोशों से मिलीभगत के चलते अधिसूचना 366 दिन बाद जारी की।
इसके चलते सारे प्रयासों पर पानी फिर गया। इसके बाद सैकड़ों काश्तकारों ने जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। 352 हेक्टेयर जमीन पर काबिज दुकानदारों ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर दी। 2005 में हाईकोर्ट ने जमीन अर्जन पर रोक लगा दी। इस फैसले के खिलाफ केडीए सुप्रीम कोर्ट गया, पर वहां भी हार का सामना करना पड़ा, जबकि केडीए ने एक-एक तारीख की लाखों रुपये फीस लेने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता पैरवी में लगाए थे।
सुप्रीम कोर्ट ने भी हाईकोर्ट जाने वाले करीब 352 हेक्टेयर जमीन के सैकड़ों काश्तकारों की जमीन अर्जन के प्रस्ताव को खारिज कर दिया। तब तक केडीए जमीन अर्जन से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक पैरवी पर एक अरब 13 करोड़ रुपये फूंक चुका था। इसके बाद केडीए ने उन किसानों की करीब 111 हेक्टेयर जमीन कब्जे में ली, जो हाईकोर्ट नहीं गए थे। हालांकि मिलीभगत के चलते तब भी तत्कालीन केडीए अधिकारियों ने योजना विकसित नहीं की।