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Kanpur: दोस्त की पत्नी से दुष्कर्म कर हत्या करने वाले को उम्रकैद, 14 साल पहले हुई थी वारदात

Thu, 10 Apr 2025 11:05 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Thu, 10 Apr 2025 11:05 PM IST
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Kanpur: Life imprisonment to the person who raped and murdered his friend's wife
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
दोस्त की पत्नी से दुष्कर्म कर हत्या करने वाले को अपर जिला जज नवम शेष बहादुर निषाद ने उम्रकैद की सजा सुनाई। साथ ही 14 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया। वारदात के बाद से हत्यारा जेल में ही बंद है। अजीतमल औरैया निवासी प्रमेंद्र कुमार शर्मा अर्रा स्थित केडीए कालोनी में सपरिवार रहते थे। 19 मई 2011 को प्रमेंद्र काम पर गए थे। पत्नी शकुंतला घर पर अकेली थी। शाम को अशोक कुमार यादव आया और बताया कि घर पर ताला बंद है। रात को पड़ोसी सन्नी ने भी आकर बताया कि घर पर ताला बंद है। प्रमेंद्र घर पहुंचे और ताला तोड़कर अंदर गए तो देखा कि शकुंतला का खून से लथपथ शव पड़ा था। एडीजीसी प्रद्युम्न कुमार अवस्थी ने बताया कि विश्वबैंक बर्रा निवासी कमल शर्मा अक्सर प्रमेंद्र के घर आता-जाता था। घटना के दिन शकुंतला को घर पर अकेला पाकर कमल ने दुष्कर्म किया और वारदात को छिपाने के लिए शकुंतला की हत्या कर दी। हत्या को लूटपाट का जामा पहनाने के लिए घर से मोबाइल और टीवी लूटकर चला गया।
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कमल की निशानदेही पर आलाकत्ल और मोबाइल बरामद किया गया था। लूट का टीवी जरौली बर्रा निवासी दिव्यांग धर्मेंद्र तिवारी के घर से बरामद हुआ था। दोनों के खिलाफ चार्जशीट कोर्ट भेजी गई थी। अभियोजन की ओर से 10 गवाह कोर्ट में पेश किए गए। पड़ोसन संध्या ने कोर्ट में बताया था कि दोपहर में वह शकुंतला के घर पर थी तभी कमल उसके सामने आया था। थोड़ी देर बाद वह अपने घर लौट गई। शाम को देखा तो शकुंतला के घर पर ताला लटका था। दोपहर से शाम के बीच में कमल के अलावा घर पर कोई नहीं गया था। सबूतों और गवाहों के आधार पर कोर्ट ने कमल को दुष्कर्म और हत्या का दोषी मानकर सजा सुनाई।
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दो साल की सजा, तीन साल रह चुका था जेल में, रिहाई मिली
एडीजीसी ने बताया कि लूट का माल बरामद होने पर धर्मेंद्र को भी दो साल कैद और एक हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई थी लेकिन धर्मेंद्र पहले ही तीन साल जेल में बंद रह चुका था, इसलिए जुर्माने की रकम जमा करने के बाद उसे रिहाई मिल गई।

 
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हत्यारा 14 साल से जेल में बंद, जेल में ही रहकर की पढ़ाई
दुष्कर्म और हत्या जैसे गंभीर अपराध को अंजाम देने वाले कमल को जमानत नहीं मिल सकी थी। उसकी पैरवी करने वाला कोई नहीं था। अदालत की ओर से उसे न्याय मित्र दिया गया था। सजा पर सुनवाई के दौरान अधिवक्ता ने तर्क रखा कि कमल 14 साल से जेल में बंद है। जेल में उसका व्यवहार अच्छा रहा है। जेल में रहकर ही उसने हाईस्कूल और इंटर की परीक्षा भी पास की। इस आधार पर सजा में रहम बरता जाए। वहीं, अभियोजन की ओर से अपराध को गंभीर और विरल से विरलतम श्रेणी में रखे जाने की बात कहते हुए फांसी की मांग की गई थी। दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने कमल को उम्रकैद की सजा सुनाई।
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