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फिजियोथैरेपी की संजीवनी: सर्जरी वाले रोगी को मिल रही नई जिंदगी, अर्ली मोबिलाइजेशन से घटा रिकवरी टाइम, रिपोर्ट

Tue, 08 Sep 2026 10:43 AM IST
Himanshu Awasthi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: Himanshu Awasthi Updated Tue, 08 Sep 2026 10:43 AM IST
सार

Kanpur News: कानपुर के हैलट, कार्डियोलॉजी और जेके कैंसर अस्पताल में जटिल सर्जरीज के बाद मरीजों को दी जा रही फिजियोथैरेपी वरदान साबित हो रही है। अर्ली मोबिलाइजेशन तकनीक से मरीजों की रिकवरी तेजी से हो रही है और वे लकवे, सूजन व संक्रमण से बचकर जल्दी डिस्चार्ज हो रहे हैं।

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Kanpur initiative at Hallet Cardiology and JK Cancer hospital Patients recovering faster through physiotherapy
हैलट में होती मरीज की फिजियोथैरेपी, डॉ. राहुल सिंह और डॉ. अमित मिश्रा - फोटो : amar ujala

विस्तार

केस-1: ब्रेन सर्जरी के बाद पैरों पर लौटा 45 वर्षीय मरीज

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सड़क दुर्घटना में सिर की गंभीर चोट (ट्रॉमैटिक ब्रेन इंजरी) आने पर बर्रा निवासी 45 वर्षीय मरीज की हैलट सुपरस्पेशियलिटी अस्पताल में इमरजेंसी न्यूरोसर्जरी की गई। सर्जरी के बाद लंबे समय तक बिस्तर पर रहने से उनमें प्रेशर अल्सर (घाव) और सुन्नता (सेंस खोने) का खतरा था। फिजिकल मेडिसिन एंड रिहैबिलिटेशन विभाग की टीम ने सर्जरी के तीसरे दिन ही बेड-साइड फिजियोथैरेपी शुरू की। नियमित डीप ब्रीदिंग, स्ट्रेचिंग के जरिए राजेश न केवल प्रेशर अल्सर से बचे बल्कि उनका नसों का सेंस भी बहाल हो गया और वे तीन महीने में चलने-फिरने लगे।

केस-2: बायपास सर्जरी के बाद जल्दी बहाल हुआ 58 वर्षीय मरीज का स्टैमिना
कार्डियोलॉजी विभाग में बायपास सर्जरी के बाद 58 वर्षीय मरीज सीने में जकड़न और सांस फूलने की समस्या से जूझ रहे थे। डॉक्टरों ने अर्ली मोबिलाइजेशन के तहत उन्हें तुरंत चेस्ट फिजियोथैरेपी और नियंत्रित ब्रीदिंग एक्सरसाइज पर रखा। इस प्रक्रिया से उनके फेफड़ों की कार्यक्षमता तेजी से सुधरी। उनके अस्पताल में भर्ती रहने की अवधि (हॉस्पिटल स्टे) भी कम हुई और वे फेफड़ों के संक्रमण या ब्लड क्लॉटिंग जैसी जटिलताओं के बिना जल्द स्वस्थ होकर घर लौट सके।

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केस-3: ब्रेस्ट कैंसर सर्जरी के बाद से राहत और सामान्य जीवन
जेके कैंसर संस्थान में ब्रेस्ट कैंसर की जटिल सर्जरी के बाद महिला मरीज के हाथ में भारी सूजन और जकड़न हो गई। ऑन्को-फिजियोथैरेपी के तहत विशेषज्ञों ने विशेष ''मैनुअल लिंफेटिक ड्रेनेज'' और गाइडेड स्ट्रेचिंग तकनीकों का सहारा लिया। कुछ ही हफ्तों के नियमित अभ्यास से हाथ की सूजन समाप्त हो गई और जोड़ों की गतिशीलता पूरी तरह वापस आ गई। अब वे बिना किसी पर निर्भर हुए अपनी दिनचर्या के काम खुद कर रही हैं।

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आत्मनिर्भर होकर अपनी दिनचर्या में लौट रहे हैं मरीज
कानपुर में हैलट, कार्डियोलॉजी, जेके कैंसर और सुपरस्पेशियलिटी हॉस्पिटल में गंभीर बीमारियों और जटिल सर्जरी विशेषकर ब्रेन, कार्डियक (हृदय) और ऑन्कोलॉजी (कैंसर) के बाद मरीजों को पुनः सामान्य जीवन में लौटाने में फिजियोथैरेपी एक वरदान साबित हो रही है। समय पर सही फिजियोथैरेपी मिलने से मरीजों का रिकवरी टाइम घट रहा है, साथ ही वे आत्मनिर्भर होकर अपनी दिनचर्या में लौट रहे हैं।
सांस फूलने और सीने में जकड़न की समस्या
ब्रेन ट्यूमर, हैमरेज या स्ट्रोक की सर्जरी के बाद अक्सर मरीजों में लकवा (पैरालिसिस), संतुलन खोना या मांसपेशियों का कड़ापन देखने को मिलता है। न्यूरो-फिजियोथैरेपी तकनीकों और बैलेंस ट्रेनिंग से मरीज तेजी से चलने-फिरने लगता है। दूसरा बायपास या वाल्व रिप्लेसमेंट सर्जरी के बाद मरीजों में सांस फूलने और सीने में जकड़न की समस्या होती है।

लौट आती है शरीर की गतिशीलता
चेस्ट फिजियोथैरेपी और नियंत्रित ब्रीदिंग एक्सरसाइज से फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ती है और मरीज का स्टैमिना बहाल होता है। ब्रेस्ट कैंसर, बोन कैंसर या पेट की सर्जरी के बाद प्रभावित अंगों में सूजन (लिंफेडेमा) और जोड़ों में जकड़न आ जाती है। विशेष मैनुअल लिंफेटिक ड्रेनेज और गाइडेड स्ट्रेचिंग से सूजन में राहत मिलती है और शरीर की गतिशीलता लौट आती है।

अस्पताल से जल्दी मिल रही छुट्टी
इंडियन एसोसिएशन ऑफ फिजियोथैरेपिस्ट कानपुर सेंटर ब्रांच के डॉ. अमित मिश्रा के अनुसार, सर्जरी के तुरंत बाद यानी अर्ली मोबिलाइजेशन के तहत शुरू की गई फिजियोथैरेपी से मरीज के अस्पताल में भर्ती रहने की अवधि काफी कम हो जाती है। इससे बेड सोर, ब्लड क्लॉटिंग और फेफड़ों के संक्रमण जैसी जटिलताओं का खतरा न के बराबर रह जाता है।

फिजियोथैरेपी से बना रहता है सेंस
हैलट सुपरस्पेशियलिटी के फिजिकल मेडिसिन एंड रिहैबिलिटेशन सेंटर विभाग के एमडी पीएमआर डॉ. राहुल सिंह ने बताया कि सफल सर्जरी यदि जीवन बचाती है, तो फिजियोथैरेपी उस जीवन में गुणवत्ता भरती है। फिजियोथैरेपी से रोगी को सर्जरी के बाद होने वाली स्थितियों से बचाया जा सकता है। इसके लिए हम रोगी को सर्जरी के दूसरे या तीसरे दिन से डीप ब्रीदिंग एक्सरसाइज, स्ट्रेचिंग कराते हैं। इस तरह की थैरेपी से रोगी का सेंस बना रहता है।

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