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विक्रम कोठारी: पेन फैक्टरी खुलते ही सूखने लगी थी रिश्ते की स्याही, 90 के दशक में स्थापित की थी रोटोमैक कंपनी
Wed, 05 Jan 2022 08:15 AM IST
शिखा पांडेय
अमित अवस्थी, अमर उजाला, कानपुर
अमित अवस्थी, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Wed, 05 Jan 2022 08:15 AM IST
सार
विक्रम कोठारी ने कारोबार जगत में बड़ा नाम कमाया लेकिन शहर का सबसे बड़ा बैंकिंग फ्रॉड भी इन्हीं के नाम रहा। इन्होंने बजट नाम से वाशिंग पाउडर भी निकाला। इसके अलावा डायमंड के कारोबार में भी हाथ आजमाया। कारोबार को खड़ा करने के लिए अलग-अलग बैंकों से 3800 करोड़ का लोन लिया। पेनाल्टी, ब्याज मिलाकर यह रकम सात हजार करोड़ से ज्यादा हो गई।
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विक्रम कोठारी की फाइल फोटो
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
विक्रम कोठारी ने जिस पेन कंपनी रोटोमैक ग्लोबल से अपनी पहचान बनाई, वही कंपनी दोनों भाइयों के बीच विवाद की जड़ भी बनी। सूत्रों के अनुसार विक्रम कोठारी अपने पिता द्वारा खड़ी की गई कंपनी पान पराग का पैसा रोटोमैक में लगाने लगे थे।
यह बात उनके भाई दीपक कोठारी को अखरने लगी थी। इसी वजह से दीपक ने यस ब्रांड से मिनरल वाटर की फैक्टरी लगाई। इसके बाद दोनों में वैचारिक मतभेद इतना बढ़ गया कि नौबत बंटवारे की आ गई। दीपक के हिस्से पान पराग आया तो विक्रम के हिस्से रोटोमैक कंपनी आई।
विक्रम कोठारी ने रोटोमैक कंपनी की स्थापना 90 के दशक में की थी। बंटवारे के बाद जब कंपनी पूरी तरह से उनके हिस्से में आई तो उन्होंने कारोबार और तेजी से बढ़ाना शुरू कर दिया। रोटोमैक कंपनी ने बाजार में तेजी से पकड़ बनानी शुरू कर दी। देश ही नहीं विदेश में भी कंपनी का नाम बिकने लगा था। इसके बाद विक्रम कोठारी ने फॉरेन ट्रेड, रियल इस्टेट, फूड, सॉफ्टवेयर समेत तमाम कारोबार में निवेश किया।
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यह बात उनके भाई दीपक कोठारी को अखरने लगी थी। इसी वजह से दीपक ने यस ब्रांड से मिनरल वाटर की फैक्टरी लगाई। इसके बाद दोनों में वैचारिक मतभेद इतना बढ़ गया कि नौबत बंटवारे की आ गई। दीपक के हिस्से पान पराग आया तो विक्रम के हिस्से रोटोमैक कंपनी आई।
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विक्रम कोठारी ने रोटोमैक कंपनी की स्थापना 90 के दशक में की थी। बंटवारे के बाद जब कंपनी पूरी तरह से उनके हिस्से में आई तो उन्होंने कारोबार और तेजी से बढ़ाना शुरू कर दिया। रोटोमैक कंपनी ने बाजार में तेजी से पकड़ बनानी शुरू कर दी। देश ही नहीं विदेश में भी कंपनी का नाम बिकने लगा था। इसके बाद विक्रम कोठारी ने फॉरेन ट्रेड, रियल इस्टेट, फूड, सॉफ्टवेयर समेत तमाम कारोबार में निवेश किया।
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... और शुरू हुआ पतन का दौर
रोटोमैक कंपनी का करीब दो दशक तक बाजार में सिक्का चला। 2010 से इस कंपनी का पतन शुरू हो गया। वजह बताई जा रही कि इस समय तक देश में कई बड़ी पेन कंपनियां बाजार में आ चुकी थीं। उधर, विक्रम कोठारी ने जिन दूसरे कारोबारों में पैसा लगाया, उनमें भी सफलता नहीं मिली।
इसके चलते विक्रम ने कंपनी की हैसियत से ज्यादा लोन ले डाले। कंपनियां दिवालिया हो गईं। मामला (नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल) एनसीएलटी में पहुंच गया। फरवरी 2018 में विदेेश जाने की खबरों के बीच सीबीआई ने पहले विक्रम को और बाद में राहुल को गिरफ्तार कर लिया।
रोटोमैक कंपनी का करीब दो दशक तक बाजार में सिक्का चला। 2010 से इस कंपनी का पतन शुरू हो गया। वजह बताई जा रही कि इस समय तक देश में कई बड़ी पेन कंपनियां बाजार में आ चुकी थीं। उधर, विक्रम कोठारी ने जिन दूसरे कारोबारों में पैसा लगाया, उनमें भी सफलता नहीं मिली।
इसके चलते विक्रम ने कंपनी की हैसियत से ज्यादा लोन ले डाले। कंपनियां दिवालिया हो गईं। मामला (नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल) एनसीएलटी में पहुंच गया। फरवरी 2018 में विदेेश जाने की खबरों के बीच सीबीआई ने पहले विक्रम को और बाद में राहुल को गिरफ्तार कर लिया।
शहर का सबसे बड़ा बैंकिंग फ्रॉड विक्रम के नाम
विक्रम कोठारी ने कारोबार जगत में बड़ा नाम कमाया लेकिन शहर का सबसे बड़ा बैंकिंग फ्रॉड भी इन्हीं के नाम रहा। इन्होंने बजट नाम से वाशिंग पाउडर भी निकाला। इसके अलावा डायमंड के कारोबार में भी हाथ आजमाया।
कारोबार को खड़ा करने के लिए अलग-अलग बैंकों से 3800 करोड़ का लोन लिया। पेनाल्टी, ब्याज मिलाकर यह रकम सात हजार करोड़ से ज्यादा हो गई। बताया गया कि शुरुआत में पूरा परिवार छोटा भाई, मनसुख भाई नाम से बीड़ी का कारोबार करता था।
विक्रम कोठारी ने कारोबार जगत में बड़ा नाम कमाया लेकिन शहर का सबसे बड़ा बैंकिंग फ्रॉड भी इन्हीं के नाम रहा। इन्होंने बजट नाम से वाशिंग पाउडर भी निकाला। इसके अलावा डायमंड के कारोबार में भी हाथ आजमाया।
कारोबार को खड़ा करने के लिए अलग-अलग बैंकों से 3800 करोड़ का लोन लिया। पेनाल्टी, ब्याज मिलाकर यह रकम सात हजार करोड़ से ज्यादा हो गई। बताया गया कि शुरुआत में पूरा परिवार छोटा भाई, मनसुख भाई नाम से बीड़ी का कारोबार करता था।
इसके लिए बैंक आफ बड़ौदा से लोन भी लिया था। इसके बाद कारोबार बढ़ा तो पान पराग गुटखा बनाने लगे। इस कारोबार ने इन्हें नया मुकाम दे दिया। कहा यह भी जाता रहा कि बंटवारे के बाद पिता ने विक्रम कोठारी को तीन सौ करोड़ रुपये भी दिए थे।
शहर के पहले माल में थी हिस्सेदारी
परिवार से जुड़े सूत्रों ने बताया कि तिलक नगर स्थित शहर के पहले शॉपिंग मॉल में भी विक्रम कोठारी की हिस्सेदारी थी। इसके अलावा गुजरात के बड़े उद्योगपति घराने में इनकी रिश्तेदारी है।
शहर के पहले माल में थी हिस्सेदारी
परिवार से जुड़े सूत्रों ने बताया कि तिलक नगर स्थित शहर के पहले शॉपिंग मॉल में भी विक्रम कोठारी की हिस्सेदारी थी। इसके अलावा गुजरात के बड़े उद्योगपति घराने में इनकी रिश्तेदारी है।
100 करोड़ की कंपनी, हजारों करोड़ का लिया लोन
सूत्रों के अनुसार गलत निवेश और फिजूलखर्ची इनके कारोबार में गिरावट का कारण बनी। विक्रम कोठारी पर विभिन्न बैंकों की सात हजार करोड़ से ज्यादा की बकायेदारी सामने आने पर सीबीआई ने गिरफ्तार किया था। जांच में पता चला था कि सौ करोड़ से कम टर्नओवर वाली कंपनी को तीन हजार करोड़ से ज्यादा का लोन बैंकों ने दिया था। कंसोर्टियम की सात बैंकों में कई बार ऑडिट हुआ लेकिन अनियमितता को नहीं पकड़ा जा सका।
आयात-निर्यात के मामले में फंसते चले गए
सूत्रों के अनुसार और बड़ा बनने की चाहत में विक्रम कोठारी आयात-निर्यात के कारोबार में भी उतरे। हालांकि सारा मामला दस्तावेजों तक ही सीमित रहा। न किसी वस्तु का आयात किया जाता था और न ही निर्यात। सीबीआई की जांच में भी यह मामला भी पकड़ में आया था।
1997 में मिला था सर्वश्रेष्ठ निर्यातक का अवार्ड
विक्रम कोठारी को 1997 में सर्वश्रेष्ठ निर्यातक का अवार्ड भी मिला था। यह अवार्ड तत्कालीन प्रधानमंत्री ने दिया था। विक्रम ने 1995 में रोटोमैक कंपनी की स्थापना की थी। 2005 में कंपनी सौ करोड़ के क्लब में शामिल हुई थी। वे इस कंपनी को 20 हजार करोड़ की कंपनी बनाना चाहते थे। हालांकि बाद में सीबीआई ने इस अवार्ड को भी जांच में शामिल किया था। इनके गुजरात के लिंक पर भी काम शुरू किया था।
मार्च 2021 में एयरलिफ्ट किए गए थे कोठारी
मार्च 2021 में भी विक्रम कोठारी को ब्रेन हैमरेज हुआ था। वे तिलकनगर स्थित घर पर ही गिर पड़े थे। बाद में लखनऊ के अपोलो अस्पताल में इन्हें भर्ती कराया गया था। कानपुर से लखनऊ एयरलिफ्ट किया गया था।
सूत्रों के अनुसार गलत निवेश और फिजूलखर्ची इनके कारोबार में गिरावट का कारण बनी। विक्रम कोठारी पर विभिन्न बैंकों की सात हजार करोड़ से ज्यादा की बकायेदारी सामने आने पर सीबीआई ने गिरफ्तार किया था। जांच में पता चला था कि सौ करोड़ से कम टर्नओवर वाली कंपनी को तीन हजार करोड़ से ज्यादा का लोन बैंकों ने दिया था। कंसोर्टियम की सात बैंकों में कई बार ऑडिट हुआ लेकिन अनियमितता को नहीं पकड़ा जा सका।
आयात-निर्यात के मामले में फंसते चले गए
सूत्रों के अनुसार और बड़ा बनने की चाहत में विक्रम कोठारी आयात-निर्यात के कारोबार में भी उतरे। हालांकि सारा मामला दस्तावेजों तक ही सीमित रहा। न किसी वस्तु का आयात किया जाता था और न ही निर्यात। सीबीआई की जांच में भी यह मामला भी पकड़ में आया था।
1997 में मिला था सर्वश्रेष्ठ निर्यातक का अवार्ड
विक्रम कोठारी को 1997 में सर्वश्रेष्ठ निर्यातक का अवार्ड भी मिला था। यह अवार्ड तत्कालीन प्रधानमंत्री ने दिया था। विक्रम ने 1995 में रोटोमैक कंपनी की स्थापना की थी। 2005 में कंपनी सौ करोड़ के क्लब में शामिल हुई थी। वे इस कंपनी को 20 हजार करोड़ की कंपनी बनाना चाहते थे। हालांकि बाद में सीबीआई ने इस अवार्ड को भी जांच में शामिल किया था। इनके गुजरात के लिंक पर भी काम शुरू किया था।
मार्च 2021 में एयरलिफ्ट किए गए थे कोठारी
मार्च 2021 में भी विक्रम कोठारी को ब्रेन हैमरेज हुआ था। वे तिलकनगर स्थित घर पर ही गिर पड़े थे। बाद में लखनऊ के अपोलो अस्पताल में इन्हें भर्ती कराया गया था। कानपुर से लखनऊ एयरलिफ्ट किया गया था।