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Kanpur: किसानों ने रोक दिया औद्योगिक गलियारे का रास्ता, चार की जगह आठ गुना मुआवजे की मांग, पढ़ें मामला

Thu, 26 Jun 2025 11:26 AM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Thu, 26 Jun 2025 11:26 AM IST
सार

Kanpur News: मामले में एसडीएम बिल्हौर ने बताया है कि सिर्फ 23 किसान जमीन देने से राजी हुए थे। सभी किसान चौगुना से ज्यादा मुआवजा की मांग कर रहे थे। इस वजह से सहमति नहीं बना पाई थी। इसकी रिपोर्ट शासन भेज दी गई थी। 

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Kanpur Farmers blocked the way to industrial corridor demanding eight times compensation instead of four
अरौल में औद्योगिक गलियारा - फोटो : amar ujala

विस्तार

कानपुर में बिल्हौर ब्लाक के अरौल में औद्योगिक गलियारा (इंडस्ट्रियल कॉरिडोर) बसाने की कवायद पर पानी फिरता दिख रहा है। गलियारे के लिए 668 किसानों की जमीन का अधिग्रहण किया जाना था पर सिर्फ 23 किसान जमीन देने पर राजी हुए। 645 किसान चौगुना की जगह आठ गुना मुआवजा देने की मांग कर रहे हैं। किसानों के जमीन न देने की फाइनल रिपोर्ट फरवरी में बिल्हौर एसडीएम, एडीएम भूमि ने यूपीडा को भेज दी थी।

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तीन महीने बीतने के बावजूद यूपीडा की ओर से गलियारे को लेकर कोई जवाब नहीं दिया गया है। आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे के किनारे जिले में 98.33 हेक्टेयर में औद्योगिक गलियारा बसाने का बीते दो साल से प्रयास किया जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अक्तूबर 2023 में कानपुर समेत सात जिलों में एक्सप्रेस-वे परियोजनाओं के माध्यम से औद्योगिक गलियारा बनाने की घोषणा की थी।

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98.33 हेक्टेयर जमीन को यूपीडा में शामिल करने के आदेश हुए थे
इसमें आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे के किनारे जमीनों को अधिग्रहीत कर उत्तर प्रदेश एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) में शामिल करना था। इसी के तहत बिल्हौर तहसील क्षेत्र के अरौल व बहरामपुर गांव की 98.33 हेक्टेयर जमीन को यूपीडा में शामिल करने के आदेश हुए थे। एक्सप्रेसवे के किनारे अरौल के 349 किसानों की 46.30 हेक्टेयर और बहरामपुर गांव के 319 किसानों की 48.79 हेक्टेयर जमीन औद्योगिक गलियारे के लिए चिह्नित भी की गई थी।

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रकम पर सिर्फ 23 किसान ही सहमत हो सके थे
2015 के सर्किल रेट के आधार पर किसानों को चार गुना मुआवजा दिया जाना था। इस पर किसान राजी नहीं हुए तो उन्हें समझाने के लिए चौपाल लगाई गई। इसमें एसडीएम और एडीएम भूमि और अन्य अधिकारियों को लगाया गया। फिर भी किसान नहीं माने। नवंबर 2024 में तत्कालीन जिलाधिकारी राकेश कुमार सिंह खुद किसानों से मिलने के लिए गांव पहुंचे थे। इसके बाद एसडीएम ने एक-एक किसान को कार्यालय को बुलाकर उनकी जमीन के मुआवजे की जानकारी दी, लेकिन रकम पर सिर्फ 23 किसान ही सहमत हो सके थे।

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औद्योगिक गलियारे बनने से ये होते फायदे

  • गलियारा बनने से 100 से अधिक फैक्टरियां स्थापित होतीं, इनमें 50 हजार से ज्यादा लोगों को रोजगार मिल सकता था।
  • नई फैक्टरियां लगने से कई अन्य उत्पादों की भी मैन्युफैक्चरिंग होने की संभावना थी। इससे ओडीओपी योजना को भी बढ़ावा मिलता।

कम खेती के कारण ज्यादा मांग रहे मुआवजा
विभागीय अधिकारियों ने बताया कि वहां के किसानों के पास ज्यादा जमीन नहीं है। जो है, वह टुकड़ों-टुकड़ों में है। इसलिए वे सर्किल रेट से चौगुना से ज्यादा मुआवजा की मांग कर रहे थे। किसानों को 2015 सर्किल रेट के आधार पर मुआवजा देने का प्रस्ताव भी शासन भेजा गया था। इसके बाद भी सिर्फ 23 किसान राजी हुए, शेष किसानों ने कम धनराशि के कारण जमीन देने से मना कर दिया था।

प्रशासन की तरफ से यूपीडा को फाइनल रिपोर्ट बनाकर भेजी गई थी। अभी तक यूपीडा की तरफ से दोबारा जमीन अधिग्रहण करने की कोई कवायद नहीं की गई है।  -संतोष कुमार राय, एडीएम भूमि

सिर्फ 23 किसान जमीन देने से राजी हुए थे। सभी किसान चौगुना से ज्यादा मुआवजा की मांग कर रहे थे। इस वजह से सहमति नहीं बना पाई थी। इसकी रिपोर्ट शासन भेज दी गई थी।  -ज्वाला प्रसाद, एसडीएम बिल्हौर

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