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Kanpur: डॉक्टरों से शेयर मार्केट में निवेश के नाम पर 5.70 करोड़ की ठगी में आठ गिरफ्तार
Sat, 27 Dec 2025 07:46 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sat, 27 Dec 2025 07:46 PM IST
सार
क्राइम ब्रांच की साइबर सेल ने लोको कॉलोनी से आरोपियों को दबोचा। आरोपियों के पास से 13 मोबाइल, सिम कार्ड समेत अन्य दस्तावेज बरामद हुए।
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पुलिस गिरफ्त में आरोपी
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
क्राइम ब्रांच की साइबर सेल ने शेयर मार्केट और आईपीओ में निवेश कर अधिक लाभ का झांसा देकर तीन डॉक्टरों से 5.70 करोड़ रुपये की ठगी करने में आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया है। उनके पास से काली स्कॉर्पियो, 13 मोबाइल, सिम कार्ड, डिजिटल दस्तावेज, बैंकिंग विवरण, डेबिट कार्ड, क्यूआर कोड, क्रिप्टो करेंसी वॉलेट विवरण, टेलीग्राम, व्हाट्सएप चैट समेत अन्य कागजात बरामद हुए। क्राइम ब्रांच ने सबसे पहले मास्टरमाइंड को दबोचा। वह इंडोनेशिया में बैठे हैंडलर से व्हाट्सएप कॉल पर बातें कर रहा था। उसी की निशानदेही पर अन्य पकड़ में आए।
साइबर अपराधियों ने स्वरूपनगर की नामी पैथोलॉजी के तीन डॉक्टरों को लांच क्लब एच 49 ग्रुप से जोड़ लिया। इसके बाद उन्हें शेयर मार्केट व आईपीओ में निवेश की जानकारी दी गई। उन्हें लिंक भेज फर्जी एप डाउनलोड कराया। एप के माध्यम से डॉक्टरों से कई बार में 5.70 करोड़ रुपये का निवेश कराया। आरोपियों ने स्वयं को सेबी रजिस्टर्ड कंपनी का प्रतिनिधि बताकर संबोधित किया था। कुछ समय बाद डॉक्टरों को ठगी होने का पता चला। इसके बाद उन्होंने क्राइम ब्रांच थाने में एफआईआर दर्ज कराई।
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साइबर अपराधियों ने स्वरूपनगर की नामी पैथोलॉजी के तीन डॉक्टरों को लांच क्लब एच 49 ग्रुप से जोड़ लिया। इसके बाद उन्हें शेयर मार्केट व आईपीओ में निवेश की जानकारी दी गई। उन्हें लिंक भेज फर्जी एप डाउनलोड कराया। एप के माध्यम से डॉक्टरों से कई बार में 5.70 करोड़ रुपये का निवेश कराया। आरोपियों ने स्वयं को सेबी रजिस्टर्ड कंपनी का प्रतिनिधि बताकर संबोधित किया था। कुछ समय बाद डॉक्टरों को ठगी होने का पता चला। इसके बाद उन्होंने क्राइम ब्रांच थाने में एफआईआर दर्ज कराई।
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पुलिस ने किया घटना का खुलासा
- फोटो : अमर उजाला
क्राइम ब्रांच के साइबर सेल ने कॉल करने वाले सर्वर और जिन खातों में रुपये ट्रांसफर हुए थे उनकी जांच कराई। उन्हीं खातों की जांच में लखनऊ के निखिल वर्मा का नाम सामने आया। उससे पूछताछ हुई जिससे अन्य आरोपी पकड़े गए। जेसीपी अपराध आशुतोष कुमार ने बताया कि गिरोह का मास्टरमाइंड फतेहपुर के सिविल लाइंस का शिवम पटेल है। वह इंडोनेशिया में बैठे हैंडलर से व्हाट्सएप कॉल करता था। उसकी कॉल का रिकार्ड साइबर सेल को मिल गया। उसके साथ गोंडा का पंतनगर निवासी आलोक कुमार गुप्ता भी हैंडलर से संपर्क में रहता था।
गिरोह में लखनऊ के नाका हिंडोला का सलमान, फतेहपुर के गाजीपुर का अश्वनी, लखनऊ के गोमतीनगर का शिवकुमार, लखनऊ के इंद्रानगर का निखिल वर्मा, गोंडा के कर्नलगंज का अभय मिश्रा उर्फ नितिन, लखनऊ के अतरौली का योगेंद्र सिंह नेगी शामिल हैं। शिवम पटेल, अभय मिश्रा, शिव कुमार और योगेंद्र सिंह नेगी एलएलबी कर रहे हैं।
गिरोह में लखनऊ के नाका हिंडोला का सलमान, फतेहपुर के गाजीपुर का अश्वनी, लखनऊ के गोमतीनगर का शिवकुमार, लखनऊ के इंद्रानगर का निखिल वर्मा, गोंडा के कर्नलगंज का अभय मिश्रा उर्फ नितिन, लखनऊ के अतरौली का योगेंद्र सिंह नेगी शामिल हैं। शिवम पटेल, अभय मिश्रा, शिव कुमार और योगेंद्र सिंह नेगी एलएलबी कर रहे हैं।
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बरामद सामान
- फोटो : अमर उजाला
55 लाख रुपये कराए गए थे फ्रीज
साइबर क्राइम थाने के इंस्पेक्टर सतीश चंद्र यादव ने बताया कि घटना के बाद पुलिस ने 55 लाख रुपये फ्रीज करा लिए थे। आरोपियों के गिरोह में अन्य लोग भी शामिल हैं। इस तरह के अन्य गिरोह संचालित हो रहे हैं। यह निवेश का झांसा देकर ठगी की साजिश रच रहे हैं। इनका नेटवर्क दिल्ली, मध्य प्रदेश, एनसीआर, हरियाणा समेत अन्य जिलों में फैला हुआ है।
ठगी की रकम से पूरे करते थे महंगे शौक
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक ठगी की रकम से आरोपी महंगे शौक पूरा करते थे। आरोपियों के वारदात के बाद कई शहरों में घूमने, महंगे होटलों में रुकने और ऑनलाइन शापिंग करने की जानकारी हुई है। कई क्यूआर कोड स्कैन मिले हैं जिनसे रकम मंगवाने का पता चला है।
साइबर क्राइम थाने के इंस्पेक्टर सतीश चंद्र यादव ने बताया कि घटना के बाद पुलिस ने 55 लाख रुपये फ्रीज करा लिए थे। आरोपियों के गिरोह में अन्य लोग भी शामिल हैं। इस तरह के अन्य गिरोह संचालित हो रहे हैं। यह निवेश का झांसा देकर ठगी की साजिश रच रहे हैं। इनका नेटवर्क दिल्ली, मध्य प्रदेश, एनसीआर, हरियाणा समेत अन्य जिलों में फैला हुआ है।
ठगी की रकम से पूरे करते थे महंगे शौक
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक ठगी की रकम से आरोपी महंगे शौक पूरा करते थे। आरोपियों के वारदात के बाद कई शहरों में घूमने, महंगे होटलों में रुकने और ऑनलाइन शापिंग करने की जानकारी हुई है। कई क्यूआर कोड स्कैन मिले हैं जिनसे रकम मंगवाने का पता चला है।