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Driver Strike: ऑटो-टेंपो न चलने से ट्रेनें छूटीं... बस भी न मिली; मजबूरी का फायदा उठाकर तीन गुना किराया वसूली
Wed, 03 Jan 2024 11:30 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, कानपुर
अमर उजाला नेटवर्क, कानपुर
Published by: शाहरुख खान
Updated Wed, 03 Jan 2024 11:30 AM IST
सार
कानपुर में नए कानून के विरोध में ड्राइवरों ने दूसरे दिन भी हड़ताल रखी। ऑटो-टेंपो न चलने से लोगों की ट्रेनें छूट गईं, उन्हें बस भी नहीं मिली। घर से स्टेशन और बस अड्डे पहुंचने के लिए निकले यात्रियों को साधन नहीं मिले। बड़ा चौराहे पर सिटी बस का शीशा तोड़ दिया गया। दहशत में सभी इलेक्ट्रिक और सिटी बसें लौट गईं।
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जीटी रोड जरीब चौकी चौराहा से तांगा से जाते लोग
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
कानपुर में हिट एंड रन मामले पर बने नए कानून के विरोध में ड्राइवरों ने दूसरे दिन भी चक्काजाम रखा। आम दिनों में जाम से जूझने वाली सड़कें और चौराहे सूने नजर आए। आटो-टेंपो, सिटी बसें भी नहीं चलीं। इस वजह से कई यात्री रेलवे स्टेशन और बस अड्डे नहीं पहुंच पाए।
उधर, कुछ चालक वाहन लेकर निकले तो उन्हें हड़ताल समर्थकों के विरोध का सामना करना पड़ा।
सीएनजी सिटी बसें रूट पर निकलीं लेकिन बड़ा चौराहे पर एक बस का शीशा तोड़ दिया गया। इसके बाद केसीटीएसएल ने सभी बसों को डिपो में खड़ा करवा दिया। 40 प्रतिशत रोडवेज बसों का परिचालन हुआ। मेन रूट को छोड़कर अन्य जगहों पर ई-रिक्शे दौड़ते नजर आए।
बसें छूटीं, सेंट्रल स्टेशन भी मुश्किल से पहुंचे
हड़ताल की वजह से शहर के बाहर जाने वाले यात्रियों को भी परेशान होना पड़ा। घरों से रेलवे स्टेशन, बस अड्डे जाने वालों को मुश्किलें हुईं। समय से न पहुंच पाने पर यात्रा नहीं कर सके। कानपुर के दोनों बस अड्डों से 700 बसों के बजाय 250 बसें ही चल सकीं।
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इसमें 18 बसें चुन्नीगंज बस अड्डे से चलीं। यहां से 40 बसें प्रतिदिन चलती हैं। हड़ताल का समर्थन करने वालों ने वाहनों को रुकवाकर सवारियां उतरवा दीं। सेंट्रल स्टेशन पर देरी से पहुंचने पर ट्रेनें छूटीं तो यात्रियों को टिकट भी लौटाने पड़े।
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उधर, कुछ चालक वाहन लेकर निकले तो उन्हें हड़ताल समर्थकों के विरोध का सामना करना पड़ा।
सीएनजी सिटी बसें रूट पर निकलीं लेकिन बड़ा चौराहे पर एक बस का शीशा तोड़ दिया गया। इसके बाद केसीटीएसएल ने सभी बसों को डिपो में खड़ा करवा दिया। 40 प्रतिशत रोडवेज बसों का परिचालन हुआ। मेन रूट को छोड़कर अन्य जगहों पर ई-रिक्शे दौड़ते नजर आए।
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बसें छूटीं, सेंट्रल स्टेशन भी मुश्किल से पहुंचे
हड़ताल की वजह से शहर के बाहर जाने वाले यात्रियों को भी परेशान होना पड़ा। घरों से रेलवे स्टेशन, बस अड्डे जाने वालों को मुश्किलें हुईं। समय से न पहुंच पाने पर यात्रा नहीं कर सके। कानपुर के दोनों बस अड्डों से 700 बसों के बजाय 250 बसें ही चल सकीं।
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इसमें 18 बसें चुन्नीगंज बस अड्डे से चलीं। यहां से 40 बसें प्रतिदिन चलती हैं। हड़ताल का समर्थन करने वालों ने वाहनों को रुकवाकर सवारियां उतरवा दीं। सेंट्रल स्टेशन पर देरी से पहुंचने पर ट्रेनें छूटीं तो यात्रियों को टिकट भी लौटाने पड़े।
बस ड्राइवरों को समझाकर बसों का परिचालन कराया गया। रोडवेज ड्राइवर रास्ते में हड़ताली समर्थकों की अराजकता से भयभीत थे। 250 बसों में 175 बसें झकरकटी से चलीं।
- अनिल कुमार, आरएम, रोडवेज
- अनिल कुमार, आरएम, रोडवेज
20 ई-बसें, 35 सिटी बसें निकलीं, लेकिन विरोध के बाद लौटीं
अहिरवां में इलेक्ट्रिक बस अड्डे से 15 ई-बसें और फजलगंज डिपो से 35 सीएनजी सिटी बसों को केसीटीएसएल ने निकाला। सवारियां भी मिल गईं लेकिन बड़ा चौराहे पर सिटी बस का शीशा तोड़ दिया गया। इसकी सूचना पर प्रबंधन ने सभी सिटी और ई-बसों को डिपो में खड़ा करवा दिया। केसीटीएसएल प्रबंधन ने बताया कि सिटी बसों, ड्राइवरों और यात्रियों की सुरक्षा के मद्देनजर यह फैसला लिया गया।
अहिरवां में इलेक्ट्रिक बस अड्डे से 15 ई-बसें और फजलगंज डिपो से 35 सीएनजी सिटी बसों को केसीटीएसएल ने निकाला। सवारियां भी मिल गईं लेकिन बड़ा चौराहे पर सिटी बस का शीशा तोड़ दिया गया। इसकी सूचना पर प्रबंधन ने सभी सिटी और ई-बसों को डिपो में खड़ा करवा दिया। केसीटीएसएल प्रबंधन ने बताया कि सिटी बसों, ड्राइवरों और यात्रियों की सुरक्षा के मद्देनजर यह फैसला लिया गया।
हमीरपुर डिपो की रुकी बस को पुलिस ने चलवाया
सुबह करीब नौ बजे हमीरपुर डिपो की बस को नौबस्ता में रोक लिया गया। इसकी जानकारी झरककटी बस स्टेशन के हेल्पलाइन नंबर 8726005906 पर दी गई। तब इसकी सूचना पुलिस के पास पहुंची और पुलिस ने बस को छुड़वाकर हमीरपुर के लिए रवाना कराया।
सुबह करीब नौ बजे हमीरपुर डिपो की बस को नौबस्ता में रोक लिया गया। इसकी जानकारी झरककटी बस स्टेशन के हेल्पलाइन नंबर 8726005906 पर दी गई। तब इसकी सूचना पुलिस के पास पहुंची और पुलिस ने बस को छुड़वाकर हमीरपुर के लिए रवाना कराया।
साधन न मिलने से ट्रेन छूटी, 200 यात्रियों ने वापस किए टिकट
टिकट वापसी काउंटर पर मंगलवार दोपहर लंबी लाइन दिखी। सुबह लगभग 10 बजे एक साथ 56 लोग टिकट वापसी को काउंटर पर पहुंचे। इनका कहना था कि टेंपो न मिलने के चक्कर में स्टेशन आने में देरी हुई तो पता चला कि गोमती चली गई है। इसी तरह दिन में 3 बजे 197 लोगों ने टिकट लौटाए। इनका कहना था कि साधन न मिलने से लेट हुए तो ट्रेन छूटी। इस तरह की शिकायतें सुबह से शाम तक सहायता कक्ष में आती रहीं।
टिकट वापसी काउंटर पर मंगलवार दोपहर लंबी लाइन दिखी। सुबह लगभग 10 बजे एक साथ 56 लोग टिकट वापसी को काउंटर पर पहुंचे। इनका कहना था कि टेंपो न मिलने के चक्कर में स्टेशन आने में देरी हुई तो पता चला कि गोमती चली गई है। इसी तरह दिन में 3 बजे 197 लोगों ने टिकट लौटाए। इनका कहना था कि साधन न मिलने से लेट हुए तो ट्रेन छूटी। इस तरह की शिकायतें सुबह से शाम तक सहायता कक्ष में आती रहीं।
मजबूरी का फायदा उठाकर तीन गुना किराया वसूली
शहर के चौराहों पर यात्रियों का हाल यह था कि महंगा किराया भी देकर सफर करने को मजबूर थे। घंटाघर चौराहे और झकरकटी के बाहर जो ड्राइवर अपने आटो, टेंपो और ई रिक्शों को ले जाने को तैयार हुए। उन्होंने तीन गुना तक किराया वसूला गया। नौबस्ता से फूलबाग का किराया 130 रुपये, सेंट्रल से कल्याणपुर का 120 रुपये, टाटमिल से सिविल लाइंस के 100 रुपये वसूल लिए गए। ओला-ऊबर टैक्सियां भी मुश्किल से ही चल सकीं। उनके परिचालन में भी हड़ताल समर्थकों ने बाधा पहुंचाई।
शहर के चौराहों पर यात्रियों का हाल यह था कि महंगा किराया भी देकर सफर करने को मजबूर थे। घंटाघर चौराहे और झकरकटी के बाहर जो ड्राइवर अपने आटो, टेंपो और ई रिक्शों को ले जाने को तैयार हुए। उन्होंने तीन गुना तक किराया वसूला गया। नौबस्ता से फूलबाग का किराया 130 रुपये, सेंट्रल से कल्याणपुर का 120 रुपये, टाटमिल से सिविल लाइंस के 100 रुपये वसूल लिए गए। ओला-ऊबर टैक्सियां भी मुश्किल से ही चल सकीं। उनके परिचालन में भी हड़ताल समर्थकों ने बाधा पहुंचाई।