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Kanpur: विसर्जन या कचरे का अंबार? शिवराजपुर में बदहाल हैं घाट, बिखरी पड़ी हैं खंडित मूर्तियां, बढ़ रहा प्रदूषण

Fri, 24 Jul 2026 01:19 PM IST
Himanshu Awasthi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: Himanshu Awasthi Updated Fri, 24 Jul 2026 01:19 PM IST
सार

Kanpur News: बिल्हौर तहसील के शिवराजपुर में नदी घाटों पर विसर्जन के नाम पर खंडित मूर्तियों और पूजा सामग्री को इधर-उधर फेंकने का सिलसिला बढ़ गया है। सावन महीने की शुरुआत होने के बावजूद प्रशासन द्वारा विसर्जन कुंडों का प्रबंधन न किए जाने से पर्यावरणविदों और गंगा प्रहरियों में भारी नाराजगी है।

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Kanpur Desecration of Sanatan faith in Bilhaur Damaged idols and worship materials lie scattered across ghats
घाटों पर बिखरी पड़ी खंडित मूर्तियां और पूजा सामग्री - फोटो : amar ujala

विस्तार

सनातन संस्कृति में विसर्जन का अर्थ है…देवता का सम्मानपूर्वक जल या मिट्टी में विलय, ताकि वे पुनः ब्रह्मांड में समाहित हो सकें। लेकिन आज हालात बदल चुके हैं। घाट के किनारे हजारों की संख्या में खंडित और पुरानी मूर्तियां, फूल-मालाओं सहित फेंकी जा रही हैं। कानपुर में बिल्हौर के शिवराजपुर में ऐसी ही तस्वीरें सामने आई हैं।

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नदी घाटों पर विसर्जन के नाम पर कचरे का अंबार लग गया है। अक्सर लोग भगवान की खंडित मूर्तियां, पूजा सामग्री, फूल-माला इधर-उधर पेड़ के नीचे फेंक आते हैं। यह देख काफी लोग परेशान भी होते हैं। पर्यावरणविदों का कहना है कि यह समस्या बढ़ती जा रही है, जो अब चरम पर पहुंच गई है।

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कचरे की तरह बिखरी पड़ी हैं मूर्तियां
पानी पहले से ही प्रदूषित है और यह विसर्जन जल प्रदूषण को कई गुना बढ़ा रहा है। गंगा प्रहरी के सदस्य सचिन तिवारी, अरविंद तिवारी व नारायण वर्मा का कहना है यह अपमान की बाढ़ जैसा है, जहां भगवान की मूर्तियां कचरे की तरह बिखरी पड़ी हैं।

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विसर्जन कुंडों का प्रबंधन नहीं किया गया
अभी सावन शुरुआत होने वाला है, लेकिन विसर्जन कुंडों का प्रबंधन नहीं किया गया है। इसकी जिम्मेदारी अधिकारियों की है, लेकिन व्यवस्था धरातल पर नजर नहीं आ रही। इस कारण लोग प्रतिमाओं का विसर्जन करने की बजाए इधर-उधर फेंक रहे हैं। यह आस्था के साथ खिलवाड़ है।

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