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कानपुर देहात ः चरित्र गड़बड़ तो नहीं चला सकेंगे स्कूली वाहन, शासन ने दिए चरित्र सत्यापन कराने के निर्देश
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कानपुर देहात। स्कूली वाहनों में छात्राओं से छेड़छाड़ की घटनाएं सामने आने के बाद शासन ने गंभीर रुख अख्तियार किया है। इन घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए स्कूल वाहनों के चालकों का चरित्र सत्यापन कराने के निर्देश दिए गए हैं।
कहा कि अगर चालक का चरित्र गड़बड़ पाया जाए तो उसे वाहन न चलाने दिया जाए। शासन के आदेश के बाद जिले में भी स्कूली वाहनों के चालकों के चरित्र का सत्यापन शुरू हो गया है। स्कूल प्रबंधकों को इस बारे में पत्र भी भेजा गया है। इतना ही नहीं एआरटीओ भी अपने स्तर से चालकों का सत्यापन थाना पुलिस के माध्यम से करा रहे हैं।
स्कूली वाहनों में छात्राओं के साथ छेड़छाड़ व अश्लीलता की घटनाएं अक्सर सामने आती हैं। इन्हें रोकने के लिए शासन ने कदम उठाया है। अब स्कूली वाहन चालक का चरित्र सत्यापन कराने के बाद ही उसे स्कूल में रखा जाएगा।
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साथ ही उसे वाहन से बच्चों को स्कूल से घर से और घर से स्कूल लाने व ले जाने की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। स्कूल प्रबंधक अपने स्तर से वाहन चालक का चरित्र का सत्यापन कराने के लिए संबंधित थाने में आवेदन करेंगे।
पुलिस सत्यापन के दौरान चालक के नाम व पते के साथ ही यह भी पता करेगी कि उसके खिलाफ कहीं कोई मामला तो दर्ज नहीं है। इससे दो फायदे होंगे एक तो चालक का नाम व पता पूरी तरह से प्रमाणित होगा। वहीं उसके चाल चलन के बाबत भी पुलिस को जानकारी हो जाएगी।
अगर चरित्र सत्यापन नहीं किया गया तो संबंधित व्यक्ति को स्कूल संचालक बतौर वाहन चालक नहीं रख सकेंगे। जिले में 119 स्कूली वाहन पंजीकृत हैं। एआरटीओ प्रशासन मनोज वर्मा ने इस बाबत सभी स्कूल के संचालकों को पत्र जारी कर वाहन चालकों का चरित्र सत्यापन कराने के निर्देश दिए हैं।
वहीं, डीआईओएस व बीएसए को भी पत्र लिखा गया है। इधर स्कूली वाहन को फिटनेस या अन्य कार्य के लिए एआरटीओ दफ्तर लेकर आने वाले चालकों का पूरा ब्योरा जुटाकर एआरटीओ खुद भी संबंधित थाने से उसके चरित्र सत्यापन के लिए आवेदन भेज रहे हैं।
स्कूली वाहन चालकों का चरित्र सत्यापन कराने के लिए पत्र जारी किया गया है। डीआईओएस व बीएसए को भी इस बारे में अवगत करा दिया गया है ताकि वह मानीटरिंग करके जिन स्कूलों में वाहन चालक हैं, वहां सत्यापन करा लें। - मनोज वर्मा, एआरटीओ प्रशासन
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कहा कि अगर चालक का चरित्र गड़बड़ पाया जाए तो उसे वाहन न चलाने दिया जाए। शासन के आदेश के बाद जिले में भी स्कूली वाहनों के चालकों के चरित्र का सत्यापन शुरू हो गया है। स्कूल प्रबंधकों को इस बारे में पत्र भी भेजा गया है। इतना ही नहीं एआरटीओ भी अपने स्तर से चालकों का सत्यापन थाना पुलिस के माध्यम से करा रहे हैं।
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स्कूली वाहनों में छात्राओं के साथ छेड़छाड़ व अश्लीलता की घटनाएं अक्सर सामने आती हैं। इन्हें रोकने के लिए शासन ने कदम उठाया है। अब स्कूली वाहन चालक का चरित्र सत्यापन कराने के बाद ही उसे स्कूल में रखा जाएगा।
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साथ ही उसे वाहन से बच्चों को स्कूल से घर से और घर से स्कूल लाने व ले जाने की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। स्कूल प्रबंधक अपने स्तर से वाहन चालक का चरित्र का सत्यापन कराने के लिए संबंधित थाने में आवेदन करेंगे।
पुलिस सत्यापन के दौरान चालक के नाम व पते के साथ ही यह भी पता करेगी कि उसके खिलाफ कहीं कोई मामला तो दर्ज नहीं है। इससे दो फायदे होंगे एक तो चालक का नाम व पता पूरी तरह से प्रमाणित होगा। वहीं उसके चाल चलन के बाबत भी पुलिस को जानकारी हो जाएगी।
अगर चरित्र सत्यापन नहीं किया गया तो संबंधित व्यक्ति को स्कूल संचालक बतौर वाहन चालक नहीं रख सकेंगे। जिले में 119 स्कूली वाहन पंजीकृत हैं। एआरटीओ प्रशासन मनोज वर्मा ने इस बाबत सभी स्कूल के संचालकों को पत्र जारी कर वाहन चालकों का चरित्र सत्यापन कराने के निर्देश दिए हैं।
वहीं, डीआईओएस व बीएसए को भी पत्र लिखा गया है। इधर स्कूली वाहन को फिटनेस या अन्य कार्य के लिए एआरटीओ दफ्तर लेकर आने वाले चालकों का पूरा ब्योरा जुटाकर एआरटीओ खुद भी संबंधित थाने से उसके चरित्र सत्यापन के लिए आवेदन भेज रहे हैं।
स्कूली वाहन चालकों का चरित्र सत्यापन कराने के लिए पत्र जारी किया गया है। डीआईओएस व बीएसए को भी इस बारे में अवगत करा दिया गया है ताकि वह मानीटरिंग करके जिन स्कूलों में वाहन चालक हैं, वहां सत्यापन करा लें। - मनोज वर्मा, एआरटीओ प्रशासन