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कानपुर देहात : राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आदेश पर क्रोमियम कचरा फैलाने वाली केमिकल फैक्टरी कराई बंद
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केमिकल फैक्टरी में व्हील सील करते क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण कार्यालय के कर्मी। (संवाद)
- फोटो : AKBARPUR
कानपुर देहात। क्रोमियम कचरा फैलाने वाली अकबरपुर तहसील के विसायकपुर स्थित केमिकल फैक्टरी को बुधवार को बंद करा दिया गया। प्लांट ऑपरेटर की मौजूदगी में क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी ने विभिन्न मशीनों के व्हील सील कराए। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एसपीसीबी) के आदेश पर यह कार्रवाई की गई।
रनियां के खानचंद्रपुर में मटियामऊ रोड किनारे छह फैक्टरियों का 63 हजार मीट्रिक टन क्रोमियम कचरा दो दशक से डंप है। एनजीटी की सख्ती के बाद क्रोमियम कचरा निस्तारण की कवायद शुरू हुई लेकिन अभी तक निस्तारण की शुरुआत नहीं हो सकी है।
उधर, विसायकपुर की स्पेक्ट्रो फोस्केम प्राइवेट लिमिटेड कंपनी लगातार पांच साल से क्रोमियम कचरा इधर उधर फेंक रही थी। इस फैक्टरी में क्रोमिक एसिड व बेसिक क्रोम सल्फेट बनता है। ग्रामीणों ने इसकी शिकायत की तो सात मार्च को जांच कराई गई। चार स्थानों पर खुले में क्रोमियम कचरा एकत्र पाया गया।
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केमिकल फैक्टरी का क्रोमियम कचरा इधर उधर फेंकने की पुष्टि पर क्षेत्रीय प्रदूषण अधिकारी ने एसपीसीबी से बंदी की संस्तुति की थी। जिस पर एसपीसीबी ने क्रोमियम कचरा (स्लज) इधर उधर फैलाने पर केमिकल फैक्टरी के बंदी का आदेश दिया था।
बुधवार को क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी जेपी मौर्य, वैज्ञानिक सहायक जितेंद्र कुमार व आशीष कुमार ने केमिकल फैक्टरी पहुंच कर मशीनों के सभी व्हील सील किए। यह कार्रवाई प्लांट ऑपरेटर बउवन कुमार की मौजूदगी में हुई। क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी ने बताया कि केमिकल फैक्टरी बंद करा दी गई है। कार्रवाई से एसपीसीबी व डीएम को अवगत कराया है।
केवल करार किया, निस्तारण को नहीं भेजा क्रोमियम कचरा
विसायकपुर की स्पेक्ट्रो फोस्केम प्राइवेट लिमिटेड ने क्रोमियम कचरा निस्तारण के लिए कुंभी स्थित भारत ऑयल एंड वेस्ट मैनेजमेंट से करार किया था। अलबत्ता पांच साल में केमिकल फैक्टरी से कोई अपशिष्ट निस्तारण के लिए कुंभी नहीं भेजा गया। यह बात कचरा निस्तारण का करार करने वाली वेस्ट मैनेजमेट कंपनी की ओर से क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी को भेजी रिपोर्ट में कही गई।
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रनियां के खानचंद्रपुर में मटियामऊ रोड किनारे छह फैक्टरियों का 63 हजार मीट्रिक टन क्रोमियम कचरा दो दशक से डंप है। एनजीटी की सख्ती के बाद क्रोमियम कचरा निस्तारण की कवायद शुरू हुई लेकिन अभी तक निस्तारण की शुरुआत नहीं हो सकी है।
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उधर, विसायकपुर की स्पेक्ट्रो फोस्केम प्राइवेट लिमिटेड कंपनी लगातार पांच साल से क्रोमियम कचरा इधर उधर फेंक रही थी। इस फैक्टरी में क्रोमिक एसिड व बेसिक क्रोम सल्फेट बनता है। ग्रामीणों ने इसकी शिकायत की तो सात मार्च को जांच कराई गई। चार स्थानों पर खुले में क्रोमियम कचरा एकत्र पाया गया।
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केमिकल फैक्टरी का क्रोमियम कचरा इधर उधर फेंकने की पुष्टि पर क्षेत्रीय प्रदूषण अधिकारी ने एसपीसीबी से बंदी की संस्तुति की थी। जिस पर एसपीसीबी ने क्रोमियम कचरा (स्लज) इधर उधर फैलाने पर केमिकल फैक्टरी के बंदी का आदेश दिया था।
बुधवार को क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी जेपी मौर्य, वैज्ञानिक सहायक जितेंद्र कुमार व आशीष कुमार ने केमिकल फैक्टरी पहुंच कर मशीनों के सभी व्हील सील किए। यह कार्रवाई प्लांट ऑपरेटर बउवन कुमार की मौजूदगी में हुई। क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी ने बताया कि केमिकल फैक्टरी बंद करा दी गई है। कार्रवाई से एसपीसीबी व डीएम को अवगत कराया है।
केवल करार किया, निस्तारण को नहीं भेजा क्रोमियम कचरा
विसायकपुर की स्पेक्ट्रो फोस्केम प्राइवेट लिमिटेड ने क्रोमियम कचरा निस्तारण के लिए कुंभी स्थित भारत ऑयल एंड वेस्ट मैनेजमेंट से करार किया था। अलबत्ता पांच साल में केमिकल फैक्टरी से कोई अपशिष्ट निस्तारण के लिए कुंभी नहीं भेजा गया। यह बात कचरा निस्तारण का करार करने वाली वेस्ट मैनेजमेट कंपनी की ओर से क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी को भेजी रिपोर्ट में कही गई।