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वित्तीय अनियमितता में फंसे पूर्व चेयरमैन व ईओ
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कानपुर देहात। झींझक नगर पालिका के पूर्व चेयरमैन, तत्कालीन ईओ और लिपिक वित्तीय अनियमितता में फंस गए हैं। तत्कालीन सभासद ने लोकायुक्त से इनकी शिकायत की थी। लोकायुक्त के आदेश पर एडीएम की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी गठित कराकर जांच कराई गई। टीम की जांच में वित्तीय अनियमितता का खुलासा हुआ है। मामले की रिपोर्ट लोकायुक्त को भेजी गई है।
तत्कालीन सभासद आनंद वर्मा ने वर्ष 2017 में तत्कालीन चेयरमैन राजकुमार यादव, ईओ मुकेश कुमार और बाबू प्रमोद के खिलाफ वित्तीय अनियमितता तथा भ्रष्टाचार की शिकायत लोकायुक्त से की थी। डीएम राकेश कुमार सिंह ने जांच के लिए एडीएम वित्त एवं राजस्व साहब लाल, वरिष्ठ कोषाधिकारी और अधिशासी अभियंता लोक निर्माण विभाग की तीन सदस्यीय टीम गठित की थी। टीम ने झींझक जाकर बिंदुवार जांच की। राजकुमार यादव वर्ष 2012 से 2016 तक चेयरमैन रहे हैं। पूर्व चेयरमैन के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति की भी शिकायत की गई। जांच में खुलासा हुआ कि नगर पंचायत में लगाई गई इंटरलाकिंग की बिना गुणवत्ता की जांच किए भुगतान किया गया। नगर पालिका परिषद में आर्यन ग्रुप आफ कंपनी को पंप चालक के भुगतान में बड़े पैमाने पर अनियमितता की गई। नगर पालिका से सटे किशौरा ग्राम सभा में 30 लाख रुपये से सड़क बनवा दी गई, जबकि नियमानुसार ग्राम पंचायत में नगर पालिका को काम नहीं कराना था। नगर पालिका के तत्कालीन बाबू प्रमोद ने कार्यदायी संस्था एटूजेड कांस्ट्रक्शन एंड सप्लायर्स के मालिक अपने भाई अनिल को टेंडर देकर काम कराए और भुगतान कराया। कार्यालय से जुड़े व्यक्ति का कोई सगा संबंधी निविदा नहीं डाल सकता है। जांच टीम ने 24 मई को रिपोर्ट डीएम को सौंपी थी। जांच के दौरान कई बिंदुओं पर मजबूत साक्ष्य न मिलने पर टीम ने शिकायतकर्ता से भी साक्ष्य मांगे थे। वह टीम को साक्ष्य उपलब्ध नहीं करा सके। शिकायतकर्ता ने लोकायुक्त को पत्र लिखकर तथ्य उपलब्ध कराने के लिए समय मांगा है।
एडीएम वित्त साहब लाल ने बताया कि झींझक नगर पालिका के पूर्व चेयरमैन और ईओ पर लगे आरोपों की जांच तीन सदस्यीय कमेटी ने की है। जांच रिपोर्ट लोकायुक्त को भेज दी गई है।
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तत्कालीन सभासद आनंद वर्मा ने वर्ष 2017 में तत्कालीन चेयरमैन राजकुमार यादव, ईओ मुकेश कुमार और बाबू प्रमोद के खिलाफ वित्तीय अनियमितता तथा भ्रष्टाचार की शिकायत लोकायुक्त से की थी। डीएम राकेश कुमार सिंह ने जांच के लिए एडीएम वित्त एवं राजस्व साहब लाल, वरिष्ठ कोषाधिकारी और अधिशासी अभियंता लोक निर्माण विभाग की तीन सदस्यीय टीम गठित की थी। टीम ने झींझक जाकर बिंदुवार जांच की। राजकुमार यादव वर्ष 2012 से 2016 तक चेयरमैन रहे हैं। पूर्व चेयरमैन के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति की भी शिकायत की गई। जांच में खुलासा हुआ कि नगर पंचायत में लगाई गई इंटरलाकिंग की बिना गुणवत्ता की जांच किए भुगतान किया गया। नगर पालिका परिषद में आर्यन ग्रुप आफ कंपनी को पंप चालक के भुगतान में बड़े पैमाने पर अनियमितता की गई। नगर पालिका से सटे किशौरा ग्राम सभा में 30 लाख रुपये से सड़क बनवा दी गई, जबकि नियमानुसार ग्राम पंचायत में नगर पालिका को काम नहीं कराना था। नगर पालिका के तत्कालीन बाबू प्रमोद ने कार्यदायी संस्था एटूजेड कांस्ट्रक्शन एंड सप्लायर्स के मालिक अपने भाई अनिल को टेंडर देकर काम कराए और भुगतान कराया। कार्यालय से जुड़े व्यक्ति का कोई सगा संबंधी निविदा नहीं डाल सकता है। जांच टीम ने 24 मई को रिपोर्ट डीएम को सौंपी थी। जांच के दौरान कई बिंदुओं पर मजबूत साक्ष्य न मिलने पर टीम ने शिकायतकर्ता से भी साक्ष्य मांगे थे। वह टीम को साक्ष्य उपलब्ध नहीं करा सके। शिकायतकर्ता ने लोकायुक्त को पत्र लिखकर तथ्य उपलब्ध कराने के लिए समय मांगा है।
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एडीएम वित्त साहब लाल ने बताया कि झींझक नगर पालिका के पूर्व चेयरमैन और ईओ पर लगे आरोपों की जांच तीन सदस्यीय कमेटी ने की है। जांच रिपोर्ट लोकायुक्त को भेज दी गई है।
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