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कानपुर देहात : पोलैंड बार्डर पहुंचे ममेरे-भाई बहन, शून्य डिग्री से कम तापमान, खुले आसमान के नीचे डाला डेरा
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यूक्रेन में फंसी छात्रा आकांक्षा। संवाद
- फोटो : AKBARPUR
कानपुर देहात। खारकीव में फंसे ममेरे भाई-बहन अब पोलैंड बार्डर पर पहुंच गए हैं। वह मंगलवार को मेट्रो स्टेशन से निकले थे। पिता से हुई बातचीत में छात्रा ने बताया कि वह लगभग सेफ जोन में पहुंच गए हैं। फिलहाल तापमान शून्य डिग्री से कम होने व खुले आसमान के नीचे रहने से दिक्कतें दूर नहीं हुई हैं।
यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद पुखरायां निवासी आकांक्षा कटियार व उसका ममेरा भाई अर्पित कटियार खारकीव के मेट्रो स्टेशन में कई दिनों तक फंसे रहे। बमबारी से दहशत के माहौल में दिन गुजारे।
मंगलवार सुबह मेट्रो स्टेशन से ममेरे भाई बहन कई अन्य छात्रों के साथ रवाना हुए जो बुधवार शाम तक पोलैंड बार्डर पर पहुंच गए। छात्रा ने माता-पिता से हुई बातचीत में बताया कि रास्ते के हालात बेहद खतरनाक थे। ईश्वर का नाम लेकर एक-एक पल काटते हुए वह पोलैंड बार्डर तक सुरक्षित पहुंच गए हैं।
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फिलहाल वहां सेफ जोन बताया जा रहा है। छात्रों ने कहा कि पोलैंड बार्डर में भीड़ काफी अधिक है। इससे सुरक्षित स्थान तक पहुंचने में अभी समय लग सकता है। वहीं चार्जिंग की व्यवस्था न होने से मोबाइल भी बंद होने वाले हैं।
छात्रा ने बताया कि वह खुले आसमान के नीचे फिलहाल रुकने को मजबूर हैं। वहां तापमान शून्य डिग्री से भी नीचे है। इससे हालात बहुत खराब हैं। दोनों के पोलैंड बार्डर पहुंचने पर परिजनों ने कुछ राहत की सांस ली है।
खारकीव में बमबारी बढ़ती जा रही थी। इससे परिजन बेहद परेशान थे। रात दिन बिना सोए वह हर पल यूक्रेन के हाल जानने के लिए टीवी के सामने ही बैठे रहते हैं।
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यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद पुखरायां निवासी आकांक्षा कटियार व उसका ममेरा भाई अर्पित कटियार खारकीव के मेट्रो स्टेशन में कई दिनों तक फंसे रहे। बमबारी से दहशत के माहौल में दिन गुजारे।
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मंगलवार सुबह मेट्रो स्टेशन से ममेरे भाई बहन कई अन्य छात्रों के साथ रवाना हुए जो बुधवार शाम तक पोलैंड बार्डर पर पहुंच गए। छात्रा ने माता-पिता से हुई बातचीत में बताया कि रास्ते के हालात बेहद खतरनाक थे। ईश्वर का नाम लेकर एक-एक पल काटते हुए वह पोलैंड बार्डर तक सुरक्षित पहुंच गए हैं।
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फिलहाल वहां सेफ जोन बताया जा रहा है। छात्रों ने कहा कि पोलैंड बार्डर में भीड़ काफी अधिक है। इससे सुरक्षित स्थान तक पहुंचने में अभी समय लग सकता है। वहीं चार्जिंग की व्यवस्था न होने से मोबाइल भी बंद होने वाले हैं।
छात्रा ने बताया कि वह खुले आसमान के नीचे फिलहाल रुकने को मजबूर हैं। वहां तापमान शून्य डिग्री से भी नीचे है। इससे हालात बहुत खराब हैं। दोनों के पोलैंड बार्डर पहुंचने पर परिजनों ने कुछ राहत की सांस ली है।
खारकीव में बमबारी बढ़ती जा रही थी। इससे परिजन बेहद परेशान थे। रात दिन बिना सोए वह हर पल यूक्रेन के हाल जानने के लिए टीवी के सामने ही बैठे रहते हैं।