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Kanpur: घटता औद्योगिक रुतबा व बड़ी कंपनियों का पलायन, शहर में घटे सीए…विशेषज्ञ बोले- नए उद्योग न बसना बड़ा कारण

Tue, 01 Jul 2025 03:23 PM IST
हिमांशु अवस्थी अमित अवस्थी, अमर उजाला, कानपुर
अमित अवस्थी, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Tue, 01 Jul 2025 03:23 PM IST
सार

Kanpur News: सीए की परीक्षा बेहद कठिन मानी जाती है। पहले साल में केवल दो बार ही परीक्षा दी जा सकती थी। अब 2024 से नई व्यवस्था के तहत साल में तीन बार सीए की परीक्षा दे सकते हैं। सीए का परीक्षा फल औसत 12-15 प्रतिशत ही रहता है।

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Kanpur Decreasing industrial status and exodus of big companies fewer CAs in the city
सीए, सांकेतिक - फोटो : amar ujala

विस्तार

औद्योगिक शहर कानपुर से ज्यादा चार्टर्ड एकाउंटेंट (सीए) की संख्या अब नवाबों के शहर लखनऊ में हो गई है। शहर में सीए की संख्या 2458 है तो लखनऊ में 2470। दि इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया की सेंट्रल इंडिया रीजनल काउंसिल की रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है। वहीं जानकारों का कहना है कि शहर का कम होता औद्योगिक रुतबा, बड़ी कंपनियों के कार्यालयों के बाहर जाने, और एयर कनेक्टिविटी में सुधार न होने से ऐसी स्थिति आई है। वहीं, नए सीए बंगलुरू, हैदराबाद, गुरूग्राम, दिल्ली में नौकरियों को तरजीह दे रहे हैं।

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दि इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया की सेंट्रल इंडिया रीजनल काउंसिल में उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़ और उत्तराखंड राज्य शामिल हैं। इसके बड़े शहरों में कानपुर, इंदौर, जयपुर, लखनऊ, नोएडा, गाजियाबाद आते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक इंदौर में छह हजार सीए हैं। जयपुर में इनकी संख्या 12 हजार है। बताया गया कि कानपुर में बड़ा नया निवेश नहीं आ रहा है। कोई बड़ा उद्योग भी एलएमएल के बाद नहीं लग पाया।

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2024 से अब तक 500 नए सीए बन चुके हैं
कानपुर का चमड़ा और टेक्सटाइल उद्योग की चमक कमजोर होती जा रही है। बड़ी-बड़ी टेनरियां बंद हो चुकी हैं या काम शिफ्ट कर दी गई हैं। शहर के दो बड़े औद्योगिक घरानों ने कानपुर स्थित मुख्यालय का काम गुरुग्राम स्थानांतरित कर दिया है। इन सब से नए सीए अब बड़े शहरों की ओर रुख कर रहे हें। सीआईआरसी में 2.5 लाख छात्र पढ़ाई कर रहे हैं, जबकि कानपुर में इनकी संख्या 28 हजार है। पिछले साल 2024 से अब तक 500 नए सीए बन चुके हैं।

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दो साल पहले घटे छात्र अब फिर से बढ़ने लगे
सीए की परीक्षा बेहद कठिन मानी जाती है। पहले साल में केवल दो बार ही परीक्षा दी जा सकती थी। अब 2024 से नई व्यवस्था के तहत साल में तीन बार सीए की परीक्षा दे सकते हैं। सीए का परीक्षा फल औसत 12-15 प्रतिशत ही रहता है। इसके चलते 2022 से इनमें शामिल होने वाले छात्रों की संख्या घटने लगी थी। अब कानपुर में छात्रों की संख्या 28 हजार हो गई है। 2022 में यह संख्या 19-20 हजार थी।

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Kanpur Decreasing industrial status and exodus of big companies fewer CAs in the city
सीए अंकुर गोयल - फोटो : amar ujala

कानपुर के मुकाबले लखनऊ में सीए की संख्या बढ़ गई है। कानपुर में बड़े उद्योगों के मुख्यालयों का अन्य शहरों में जाना, एयर कनेक्टिविटी बेहद सीमित होना। नए उद्योग न बसना एक बड़ा कारण हैं। नए सीए अब नौकरी को वरीयता दे रहे हैं। पहले 90 प्रतिशत सीए प्रैक्टिस करते थे और 10 प्रतिशत नौकरी करते थे। अब 90 प्रतिशत सीए नौकरी कर रहे हैं और केवल 10 प्रतिशत ही निजी प्रैक्टिस कर रहे हैं। बड़े शहरों में नौकरियां हैं और बेहतर सैलरी पैकेज हैं।  -अंकुर गोयल, सीए, सदस्य, सेंट्रल इंडिया रीजनल काउंसिल

Kanpur Decreasing industrial status and exodus of big companies fewer CAs in the city
सीए शिवा गुप्ता - फोटो : amar ujala

सीए करने के प्रति युवाओं का रुझान फिर बढ़ा है। इसके लिए सीए संस्थान ने 2024 में नई शुरूआत की थी। लखनऊ कानपुर के मुकाबले अब तेजी से आगे बढ़ गया है। वहां अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट अब और बेहतर हो गया है। सर्विस क्षेत्र तेजी से बढ़ रहा है। नोएडा, गाजियाबाद में कानपुर से ज्यादा सकारात्मक ग्रोथ है। जिसका असर देख सकते हैं। कानपुर में आधारभूत सुधार बेहद जरूरी है, हालांकि अब इस पर काम किया जा रहा है।  -शिवा गुप्ता, सीए

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