आफत: कोरोना से जीतने के बाद जिंदगी हार गए रोगी, पोस्ट कोविड से दो हजार रोगियों की हो चुकी है मौत
कानपुर में पोस्ट कोरोना बीमारियों से मरने वाले लोग आंकड़ों में शामिल नहीं हुए हैं। आकलन के मुताबिक पोस्ट कोविड से दो हजार रोगियों की मौत हो चुकी है।
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एक अनुमान के मुताबिक करीब दो हजार रोगी कोरोना से निगेटिव होने के बाद मरे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना निगेटिव होना अलग बात है लेकिन इसके प्रभाव से जो दिक्कतें होती हैं, वे अधिक खतरनाक होती हैं।
सीनियर चेस्ट फिजीशियन डॉ. राजीव कक्कड़ का कहना है कि पोस्ट कोविड जटिलताएं होने पर ज्यादातर रोगी सीधे वेंटिलेटर पर जाते हैं। ब्रेन अटैक और हार्ट अटैक का भी खतरा रहता है। हैलट और अलग-अलग अस्पतालों के डॉक्टरों से बातचीत में जो निचोड़ निकला है।
उससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि दो हजार से अधिक रोगी हैं जिनकी कोरोना के ठीक होने के बाद मौत हो गई। घर वाले समझे कि वे ठीक हो गए लेकिन अचानक तबीयत बिगड़ी और मौत हो गई। मरने वालों में ज्यादातर डायबिटीज रोगी रहे हैं। कुछ को ब्रेन अटैक और हार्ट अटैक पड़ा था। कोरोना जाने के बाद भी रोगियों के पुराने मर्ज फिर काबू में नहीं आए। कुछ रोगियों की फेफड़ों की फाइब्रोसिस (सिकुड़ना) बनी रही। पहले सांस तंत्र कुछ बेहतर हुआ, इसके बाद अचानक फेल हो गया।
अस्पतालों में ठीक हुए- 10691 रोगी
होम आइसोलेशन में ठीक हुए- 66508 रोगी
- आकलन के मुताबिक पोस्ट कोविड डेथ- 2000 रोगी
- सांस की दिक्कत से मरे- 50 फीसदी
- डायबिटीज अनियंत्रित होने से दिक्कतों से मरे- 18 फीसदी
- हार्ट की दिक्कत होने से मरे -15 फीसदी रोगी
- गुर्दा की दिक्कत से मरे - 10 फीसदी रोगी
- कैंसर, ब्रेन अटैक आदि से मरे- सात फीसदी रोगी
आरटीपीसीआर निगेटिव होता है तो लगता है कि रोगी ठीक हो गया। लेकिन होता नहीं है। पोस्ट कोविड स्थिति में स्टेरॉयड, रेमडेसिविर सरीखी दवाओं का साइड इफैक्ट रहता है। इससे रोगियों की तबीयत बिगड़ने लगती है और फिर मौत हो जाती है। एंटी बायोटिक के भी साइड इफैक्ट रहते हैं। रोगियों के निगेटिव होने के बाद खून पतला करने वाली दवाएं बंद कर दी जाती हैं। इससे बाद में ब्लड क्लॉटिंग हो जाती है जो मौत का कारण बनती है। - डॉ. आरती लालचंदानी, पूर्व प्राचार्य जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज
कोविड निगेटिव होने के बाद रोगी को दिक्कत रहती है। इससे हार्ट अटैक, ब्रेन अटैक और सांस की दिक्कत होने का खतरा रहता है। बहुत से रोगियों की बाद में तबियत बिगड़ जा रही। -डॉ. प्रेम सिंह, सीनियर फिजिशियन