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शर्मनाक: रेमडेसिविर इंजेक्शन के नाम पर 40-40 हजार में बेच डाला ग्लूकोज, विधि विज्ञान प्रयोगशाला ने की पुष्टि
Wed, 12 May 2021 08:58 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Wed, 12 May 2021 08:58 PM IST
सार
पुलिस ने अब एक अन्य आरोपी अपूर्वा मुखर्जी की धरपकड़ तेज कर दी है। आरोपी मोहन ने बताया उसने इंजेक्शन अपूर्वा से लिए थे। पुलिस को आशंका है कि अपूर्वा अभी भी इंजेक्शन के नाम पर ग्लूकोज बेच रहा होगा।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
मिलिट्री इंटेलीजेंस की सूचना पर एसटीएफ और बाबूपुरवा पुलिस ने जो 265 रेमडेसिविर इंजेक्शन जब्त किए थे, वे नकली निकले। इसका खुलासा लखनऊ की विधि विज्ञान प्रयोगशाला ने किया है। जांच रिपोर्ट के मुताबिक इंजेक्शन में सिर्फ ग्लूकोज भरा था। मतलब इंजेक्शन के नाम पर ये लोग 35 से 40 हजार रुपये में ग्लूकोज भरकर बेच रहे थे।
बाबूपुरवा पुलिस अब नए सिरे से मामले की जांच करेगी। आरोपियों पर धाराएं भी बढ़ेंगी। यूपी एसटीएफ और बाबूपुरवा पुलिस ने पिछले माह किदवईनगर चौराहे से बाइक सवार नौबस्ता बख्तौरीपुरवा निवासी मोहन सोनी, पशुपति नगर निवासी प्रशांत को गिरफ्तार किया था। इनके पास से 265 रेमडेसिविर इंजेक्शन मिले थे।
दोनों की निशानदेही पर हरियाणा के यमुुना नगर निवासी सचिन कुमार को पकड़ा था। इसके साथ ही इंजेक्शन के नमूने लखनऊ भेजे गए थे। मंगलवार रात को लैब ने बाबूपुरवा पुलिस को रिपोर्ट भेजी। इसमें बताया है कि शीशी में रेमडेसिविर इंजेक्शन नहीं डीएनएस ग्लूकोज भरा था।
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पुलिस ने अब एक अन्य आरोपी अपूर्वा मुखर्जी की धरपकड़ तेज कर दी है। आरोपी मोहन ने बताया उसने इंजेक्शन अपूर्वा से लिए थे। पुलिस को आशंका है कि अपूर्वा अभी भी इंजेक्शन के नाम पर ग्लूकोज बेच रहा होगा। पुलिस पता लगाने में जुटी है कि इन लोगों ने कानपुर में कितने लोगों को इंजेक्शन बेचे।
आरोपियों को रिमांड पर लेेकर दोबारा होगी पूछताछ
विधि विज्ञान प्रयोगशाला की रिपोर्ट के बाद पुलिस अब दोबारा आरोपियों को रिमांड पर लेकर पूछताछ करने की तैयारी में है। इंस्पेक्टर बाबूपुरवा देवेंद्र विक्रम सिंह ने बताया कि पूछताछ में आरोपियों ने जिस अपूर्वा का नाम लिया था, उसकी तलाश तेज कर दी गई है। उसके पकड़े जाने के बाद पता चलेगा कि आखिरकार वह इंजेक्शन कहां से लाया था, असली बोतलों में डीएनएस ग्लूकोज भरा गया या रैपर चेंज किया गया था।
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बाबूपुरवा पुलिस अब नए सिरे से मामले की जांच करेगी। आरोपियों पर धाराएं भी बढ़ेंगी। यूपी एसटीएफ और बाबूपुरवा पुलिस ने पिछले माह किदवईनगर चौराहे से बाइक सवार नौबस्ता बख्तौरीपुरवा निवासी मोहन सोनी, पशुपति नगर निवासी प्रशांत को गिरफ्तार किया था। इनके पास से 265 रेमडेसिविर इंजेक्शन मिले थे।
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दोनों की निशानदेही पर हरियाणा के यमुुना नगर निवासी सचिन कुमार को पकड़ा था। इसके साथ ही इंजेक्शन के नमूने लखनऊ भेजे गए थे। मंगलवार रात को लैब ने बाबूपुरवा पुलिस को रिपोर्ट भेजी। इसमें बताया है कि शीशी में रेमडेसिविर इंजेक्शन नहीं डीएनएस ग्लूकोज भरा था।
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पुलिस ने अब एक अन्य आरोपी अपूर्वा मुखर्जी की धरपकड़ तेज कर दी है। आरोपी मोहन ने बताया उसने इंजेक्शन अपूर्वा से लिए थे। पुलिस को आशंका है कि अपूर्वा अभी भी इंजेक्शन के नाम पर ग्लूकोज बेच रहा होगा। पुलिस पता लगाने में जुटी है कि इन लोगों ने कानपुर में कितने लोगों को इंजेक्शन बेचे।
आरोपियों को रिमांड पर लेेकर दोबारा होगी पूछताछ
विधि विज्ञान प्रयोगशाला की रिपोर्ट के बाद पुलिस अब दोबारा आरोपियों को रिमांड पर लेकर पूछताछ करने की तैयारी में है। इंस्पेक्टर बाबूपुरवा देवेंद्र विक्रम सिंह ने बताया कि पूछताछ में आरोपियों ने जिस अपूर्वा का नाम लिया था, उसकी तलाश तेज कर दी गई है। उसके पकड़े जाने के बाद पता चलेगा कि आखिरकार वह इंजेक्शन कहां से लाया था, असली बोतलों में डीएनएस ग्लूकोज भरा गया या रैपर चेंज किया गया था।