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कानपुर: सात हजार डायबिटिक कोरोना विजेता खुद को बचाएं ब्लैक फंगस से, हवा और धूल में समाई है फफूंदी, ऐसे करें बचाव
Thu, 13 May 2021 01:59 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Thu, 13 May 2021 01:59 PM IST
सार
अभी तक जितने ब्लैक फंगस के रोगी डाक्टरों के यहां आए हैं, उनमें यही दिक्कत है। कोरोना से अब तक 71 हजार से अधिक लोग ठीक हो चुके हैं।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
कानपुर में कोरोना की चपेट में आकर ठीक हुए करीब सात हजार ऐसे कोरोना विजेता हैं जिनका ब्लड शुगर लेवल बढ़ा हुआ है। ये ठीक हैं, बस कमजोरी है और ब्लड शुगर अनियंत्रित है। इन पर ब्लैक फंगस का हमला हो सकता है। लापरवाही की तो नाक, आंख से फंगस शरीर में घुस सकती है जो जानलेवा साबित हो सकती है।
अभी तक जितने ब्लैक फंगस के रोगी डाक्टरों के यहां आए हैं, उनमें यही दिक्कत है। कोरोना से अब तक 71 हजार से अधिक लोग ठीक हो चुके हैं। विशेषज्ञों का आकलन है कि इनमें 10 फीसदी की शुगर अनियंत्रित है। इनकी इम्युनिटी अभी कमजोर है। इन्हें फंगल इंफेक्शन से बचना चाहिए। कोरोना के इलाज के दौरान जो रोगी डायबिटिक रहे हैं, उनका ब्लड शुगर का लेवल पुरानी दवाओं से नियंत्रित नहीं हो रहा है।
इससे टैबलेट के बजाए अब उन्हें इंसुलिन दिया जा रहा है। जीएसवीएम मेडिकल कालेज के मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. रिचा गिरि का कहना है कि जिन रोगों में इम्युनिटी कमजोर होती है, उनमें फंगल नहीं बैक्टीरियल संक्रमण भी जल्दी होते हैं। ब्लड शुगर कंट्रोल रखना बहुत जरूरी है।
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अभी तक जितने ब्लैक फंगस के रोगी डाक्टरों के यहां आए हैं, उनमें यही दिक्कत है। कोरोना से अब तक 71 हजार से अधिक लोग ठीक हो चुके हैं। विशेषज्ञों का आकलन है कि इनमें 10 फीसदी की शुगर अनियंत्रित है। इनकी इम्युनिटी अभी कमजोर है। इन्हें फंगल इंफेक्शन से बचना चाहिए। कोरोना के इलाज के दौरान जो रोगी डायबिटिक रहे हैं, उनका ब्लड शुगर का लेवल पुरानी दवाओं से नियंत्रित नहीं हो रहा है।
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इससे टैबलेट के बजाए अब उन्हें इंसुलिन दिया जा रहा है। जीएसवीएम मेडिकल कालेज के मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. रिचा गिरि का कहना है कि जिन रोगों में इम्युनिटी कमजोर होती है, उनमें फंगल नहीं बैक्टीरियल संक्रमण भी जल्दी होते हैं। ब्लड शुगर कंट्रोल रखना बहुत जरूरी है।
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केस-एक
झाड़ी बाबा के रहने वाले 51 साल के रोगी ने बताया कि नाक के अंदर हल्की सूजन आ गई। इसके बाद दर्द होने लगा। नाक बहती थी। एक दिन हल्का सा खून आया और आंखों के चारों तरफ तेज दर्द हुआ। डॉक्टर ने ब्लैक फंगस बताया है। वह कोरोना पॉजिटिव रह चुके हैं। घर लौटने के एक हफ्ते के बाद से दिक्कत हुई।
केस-दो
मंधना के रहने वाले रोगी ने बताया कि वह एक दिन गिर गया था। चेहरे पर चोट आ गई। तीन दिन से नाक से हल्का सा खून आ रहा था। डॉक्टर को दिखाया तो एमआरआई कराने के लिए कहा गया। रिपोर्ट में ब्लैक फंगस बताया गया। आंख और आधे सिर में दर्द रहता है। डॉक्टर ने सर्जरी के लिए कहा है। उसे कई दिन से बुखार भी है, कोविड जांच नहीं कराई है।
झाड़ी बाबा के रहने वाले 51 साल के रोगी ने बताया कि नाक के अंदर हल्की सूजन आ गई। इसके बाद दर्द होने लगा। नाक बहती थी। एक दिन हल्का सा खून आया और आंखों के चारों तरफ तेज दर्द हुआ। डॉक्टर ने ब्लैक फंगस बताया है। वह कोरोना पॉजिटिव रह चुके हैं। घर लौटने के एक हफ्ते के बाद से दिक्कत हुई।
केस-दो
मंधना के रहने वाले रोगी ने बताया कि वह एक दिन गिर गया था। चेहरे पर चोट आ गई। तीन दिन से नाक से हल्का सा खून आ रहा था। डॉक्टर को दिखाया तो एमआरआई कराने के लिए कहा गया। रिपोर्ट में ब्लैक फंगस बताया गया। आंख और आधे सिर में दर्द रहता है। डॉक्टर ने सर्जरी के लिए कहा है। उसे कई दिन से बुखार भी है, कोविड जांच नहीं कराई है।
ब्लैक फंगस का संक्रमण नाक के माध्यम से आंखों में जाता है और आंखों से मस्तिष्क में जाता है। बहुत से लोगों की नाक में यह संक्रमण होता है। इम्युनिटी मजबूत होने से असर नहीं करता। वैसे इसमें पैनिक करने की कोई बात नहीं है। जांच करा लें और इलाज कराएं, उससे ठीक हो जाता है। इम्युनिटी मजबूत रखें। - डॉ. संजीव कुमार, पूर्व अपर निदेशक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण