Kanpur: बृजकिशोरी दुबे स्कूल...हाईकोर्ट की केडीए को फटकार, पूछा- पार्क निजी स्कूल को कैसे आवंटित हुआ?
Kanpur News: साकेतनगर स्थित आरक्षित पार्क भूखंड को डॉ. बृजकिशोरी दुबे मेमोरियल स्कूल को आवंटित करने और 27 साल बाद भी कब्जा न छोड़ने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने केडीए को फटकार लगाई है। सााथ ही, प्रमुख सचिव आवास को दो सदस्यीय कमेटी गठित कर मामले की जांच करने का निर्देश दिया है।
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कानपुर में साकेतनगर स्थित पार्क को डॉ. बृजकिशोरी दुबे मेमोरियल स्कूल को आवंटित करने के मामले में हाईकोर्ट ने केडीए को फटकार लगाई। अधिवक्ता सौरभ भदौरिया की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की दो सदस्यीय खंडपीठ ने प्रमुख सचिव आवास को दो सदस्यीय कमेटी गठित कर रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई करने और हाईकोर्ट को जानकारी देने के निर्देश दिए हैं। अगली सुनवाई पांच जनवरी को होगी।
अधिवक्ता सौरभ ने हाईकोर्ट में दाखिल जनहित याचिका में कहा था कि साकेतनगर जूही कलां डब्ल्यू वन ब्लॉक स्थित प्लाट संख्या 559 पर निजी लोगों का कब्जा है जबकि यह जमीन पार्क के लिए आरक्षित है। इसे पार्क घोषित करते हुए अधिसूचनाएं पहले ही जारी की जा चुकी हैं। याचिका में प्रदेश सरकार के अलावा केडीए, प्रमुख सचिव शहरी नियोजन एवं विकास, प्रमुख सचिव नगर विकास, मंडलायुक्त, नगर आयुक्त, जिलाधिकारी, बृजकिशोरी दुबे सोसाइटी और अखिलेश दुबे को भी पक्षकार बनाया गया था।
केडीए के तर्क से असंतुष्ट होकर दिए निर्देश
सुनवाई के दौरान केडीए की ओर से अधिवक्ता ने स्वीकार किया कि भूखंड पार्क है और 15 सितंबर 1998 को तत्कालीन मुख्य अभियंता ने इसे डॉ. बृजकिशोर दुबे मेमोरियल स्कूल के पक्ष में 10 साल के लिए आवंटित किया था। आवंटी ने कब्जा नहीं छोड़ा। उप्र नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम के तहत जुलाई 2025 को नोटिस भी जारी हुआ था। कोर्ट ने केडीए के तर्क से असंतुष्ट होकर मामले की जांच के निर्देश दिए।
पार्क की जमीन निजी कॉलेज को कैसे आवंटित हो गई
कोर्ट ने कहा कि केडीए की ओर से मौजूद अधिवक्ता यह नहीं बता पा रहे कि पार्क के लिए निर्धारित जमीन को एक निजी कॉलेज को कैसे आवंटित कर दिया गया। ऐसा करने वाले मुख्य अभियंता के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई बल्कि यह बताया गया कि अभियंता सेवानिवृत्त हो चुके हैं। इस आवंटन में केडीए के अन्य अधिकारियों की भूमिका की जांच भी जरूरी है।
कार्रवाई कर प्रमुख सचिव दें शपथपत्र
हाईकोर्ट ने आवास एवं शहरी नियोजन विकास विभाग के प्रमुख सचिव को आदेश दिया कि वह दो अफसरों की एक टीम गठित करें। एक अपर सचिव स्तर का और दूसरा मंडलायुक्त स्तर का अधिकारी हो ताकि आवंटन से संबंधित संपूर्ण पहलू की जांच हो सके। आवंटन प्रक्रिया में हर अधिकारी की भूमिका का पता लगाया जा सके। समिति चार सप्ताह में प्रमुख सचिव को रिपोर्ट सौंपेगी। रिपोर्ट के आधार पर प्रमुख सचिव को उचित कार्रवाई करके दो सप्ताह में अपना शपथपत्र कोर्ट में पेश करने के आदेश दिए।