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कानपुर: 5600 करोड़ की महाठगी में बैंककर्मियों का खेल, करोड़ों के लेनदेन पर साधी चुप्पी, अब पुलिस करेगी पूछताछ

Mon, 14 Sep 2026 12:24 PM IST
Himanshu Awasthi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: Himanshu Awasthi Updated Mon, 14 Sep 2026 12:24 PM IST
सार

Kanpur News: कानपुर में 5600 करोड़ रुपये की महाठगी और डिजिटल अरेस्ट मामले में शहर की 14 प्रमुख बैंकों के अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका बेहद संदिग्ध पाई गई है। सामान्य आय वाले खातों से 300-300 करोड़ का अप्रत्याशित लेनदेन होने के बावजूद बैंककर्मी मूकदर्शक बने रहे।

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Kanpur Bank employees role in 5600 crore mega scam they remained silent on transactions worth crores
5600 करोड़ की ठगी के मामले की जानकारी देती पुलिस - फोटो : amar ujala

विस्तार

कानपुर में डिजिटल अरेस्ट, निवेश का झांसा और टैक्स चोरी के जरिये जुटाई गई 5600 करोड़ रुपये की रकम को शहर की 14 बैंकों में हजारों खाते खोलकर रकम निकालने में बैंककर्मियों की भूमिका संदिग्ध मिली है। पुलिस का मानना है कि बैंककर्मियों की मिलीभगत से ही ठगी का संसार फल फूल रहा था। सामान्य कारोबार और आय वाले खातों से महाठगों ने करोड़ों रुपये निकाले।

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इसके बाद भी बैंक कर्मी अपनी आंखों में पट्टी बांधे रहे। पुलिस अब बैंक मैनेजर से लेकर खाता खोलने वालों से भी पूछताछ करेगी। साइबर क्राइम थाना प्रभारी अभय प्रताप सिंह ने बताया कि बैंकों की भूमिका संदिग्ध है। कर्मियों से पूछताछ के लिए सवालों की लिस्ट तैयार कर ली गई है। बैंककर्मियों के खिलाफ साक्ष्य मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।

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10 हजार बैंक खातों का ब्योरा खंगाला गया
पुलिस के पास उपलब्ध 5000 पन्नों की रिपोर्ट में 10 हजार बैंक खातों का ब्योरा खंगाला गया। इनमें कई खातों में करोड़ों रुपये का लेनदेन मिला। एक खाते में 295.31 करोड़ रुपये के लेनदेन का ब्योरा मिला। इसके अलावा 279 करोड़, 211.35 करोड़, 171.22 करोड़ और 156.25 करोड़ रुपये जैसे बड़े लेनदेन वाले खाते भी जांच के दायरे में आए।

कुछ ही समय में करोड़ों का ट्रांजेक्शन हुआ
जो 76 संदिग्ध फर्में पुलिस के रडार में आईं उनमें से 45 फर्मों के बैंक खातों के नाम पते अलग मिले। फर्मों के नाम पर खाते खोलने के दौरान उनके पते, कारोबार, संचालकों और दस्तावेजों का सत्यापन नहीं किया गया। बैंक कर्मियों ने मौके पर जाकर कारोबार की वास्तविकता भी नहीं जांची। कई ऐसे खाते हैं जिनमें खाता खुलते ही कुछ ही समय में करोड़ों का ट्रांजेक्शन हुआ।

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खातों में 3000 करोड़ का ट्रांजेक्शन हुआ
इसके बावजूद न तो बैंक प्रबंधन अलर्ट हुआ। न ही बैंक के सिस्टम में ऐसे खातों की ट्रांजेक्शन प्रोफाइल बदली। एचडीएफसी और आईसीआईसीआई बैंक के खातों में 3000 करोड़ का ट्रांजेक्शन हुआ। वहीं, 5600 करोड़ रुपये का लेनदेन आईसीआईसीआई, एचडीएफसी, बीओबी, एक्सिस बैंक, बंधन बैंक, एसबीआई, आईडीएफसी, कोटक महिंद्रा, पंजाब एंड सिंध बैंक सहित अन्य बैंकों के खातों में मिला है।

राजवीर, सुल्तान मिर्जा गिरोह के मददगार छह बैंककर्मी जा चुके हैं जेल
बर्रा पुलिस ने बीते अप्रैल माह में 250 करोड़ रुपये की साइबर ठगी का खुलासा किया था। इसमें बैंककर्मी ठगों के मददगार बन कर उनका काम आसान कर रहे थे। मामले में पुलिस ने स्वरूपनगर की सीएबी बैंक के ब्रांच मैनेजर अमित कुमार, यूनिटी स्मॉल फाइनेंस बैंक के रिलेशनशिप मैनेजर आशीष कुमार, एक्सिस बैंक के धर्मेंद्र सिंह, अमित सिंह व दो अन्य बैंककर्मियों को जेल भेजा था।

बैंककर्मियों से पूछे जाएंगे ये सवाल

  • फर्जी फर्मों और संदिग्ध खाताधारकों के दस्तावेजों का सत्यापन कैसे हुआ।
  • करोड़ों रुपये के असामान्य लेनदेन पर बैंक का अलर्ट क्यों नहीं आया।
  • खातों में अचानक करोड़ों आने के बाद ग्राहक की जोखिम श्रेणी क्यों नहीं बदली।
  • क्या बैंक ने वास्तविक खाताधारक और वास्तविक कारोबारी गतिविधि की जांच की।
  • कितने संदिग्ध बैंक खातों की रिपोर्ट बैंक ने संबंधित जांच एजेंसियों को भेजी।
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