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कानपुर: कटरी में अवैध निर्माण कराने वाले अफसरों को बचाने की कोशिश, केडीए की मिलीभगत से कटरी में बने थे मकान
Sun, 11 Oct 2020 09:35 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Sun, 11 Oct 2020 09:35 AM IST
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कटरी में हटाया गया था कब्जा
- फोटो : amar ujala
कानपुर के कटरी शंकरपुर सराय, लुधवाखेड़ा में सरकारी जमीन पर कब्जे और प्लाटिंग की जानकारी केडीए के अफसरों और कर्मचारियों को भी रही लेकिन उन्होंने मिलीभगत के चलते कभी विरोध नहीं किया। बोर्ड लगाकर प्लाट बेचे गए लेकिन किसी को कुछ नजर नहीं आया।
मामला उजागर होने के बाद वहां अवैध कब्जों पर बुलडोजर तो चला दिया गया लेकिन दोषी अफसरों और कर्मचारियों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। गंगा कटरी में केडीए की माडर्न सिटी योजना चार साल से प्रस्तावित है। इसके लिए जिला प्रशासन से वहां की जमीन लेने की प्रक्रिया चल रही थी।
इसके बावजूद केडीए के अफसरों ने वहां अरबों रुपये की जमीनों को अवैध कब्जों से बचाने के लिए ठोस प्रयास नहीं किए। नगर निगम सीमा से आठ किलोमीटर के दायरे की जमीनें केडीए के विकास क्षेत्र में आती हैं। वहां प्लाटिंग के लिए केडीए से ले-आउट स्वीकृत कराने और मकान या किसी अन्य तरह के निर्माण के लिए केडीए से नक्शा पास कराना होता है।
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भूमाफियाओं ने मिलीभगत के चलते किसी भी निर्माण में इन नियमों का पालन नहीं किया। एक साल पहले एक अधिकारी ने निर्माण होते समय नोटिस देकर खानापूरी जरूर की, पर कार्रवाई नहीं की। अब केडीए उपाध्यक्ष राकेश कुमार सिंह ने कमिश्नर को भेजी गई रिपोर्ट में कटरी शंकरपुर सराय और लुधवाखेड़ा में अपनी जमीन होने से ही इनकार कर दिया।
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मामला उजागर होने के बाद वहां अवैध कब्जों पर बुलडोजर तो चला दिया गया लेकिन दोषी अफसरों और कर्मचारियों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। गंगा कटरी में केडीए की माडर्न सिटी योजना चार साल से प्रस्तावित है। इसके लिए जिला प्रशासन से वहां की जमीन लेने की प्रक्रिया चल रही थी।
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इसके बावजूद केडीए के अफसरों ने वहां अरबों रुपये की जमीनों को अवैध कब्जों से बचाने के लिए ठोस प्रयास नहीं किए। नगर निगम सीमा से आठ किलोमीटर के दायरे की जमीनें केडीए के विकास क्षेत्र में आती हैं। वहां प्लाटिंग के लिए केडीए से ले-आउट स्वीकृत कराने और मकान या किसी अन्य तरह के निर्माण के लिए केडीए से नक्शा पास कराना होता है।
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भूमाफियाओं ने मिलीभगत के चलते किसी भी निर्माण में इन नियमों का पालन नहीं किया। एक साल पहले एक अधिकारी ने निर्माण होते समय नोटिस देकर खानापूरी जरूर की, पर कार्रवाई नहीं की। अब केडीए उपाध्यक्ष राकेश कुमार सिंह ने कमिश्नर को भेजी गई रिपोर्ट में कटरी शंकरपुर सराय और लुधवाखेड़ा में अपनी जमीन होने से ही इनकार कर दिया।