Kanpur: डेंगू के साथ दूसरे रोगों का गठजोड़ खतरनाक, दो रोगियों की हो चुकी है मौत, कई गंभीर हालत में
कानपुर में डेंगू के 46 एक्टिव केस हैं। इनमें 13 रोगी सर्वोदयनगर स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती हैं और छह रोगी रेलवे हॉस्पिटल में इलाज करा रहे हैं। इसके अलावा उर्सला और कांशीराम अस्पताल में एक-एक रोगी भर्ती है।
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डेंगू के साथ दूसरे रोगों का गठजोड़ खतरनाक साबित हो सकता है। सिर्फ डेंगू के संक्रमण वाले जो रोगी हैं, उनमें ज्यादातर की स्थिति सामान्य दवाओं से घर में ही ठीक हो जा रही है। इसके अलावा जिन रोगियों की जांच देर से हो रही और इलाज जल्दी शुरू नहीं हो रहा है, उनकी प्लेटलेट्स काउंट तेजी से घट जा रहा है।
डेंगू के 46 एक्टिव केस नगर में हैं। इनमें 13 रोगी सर्वोदयनगर स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती हैं और छह रोगी रेलवे हॉस्पिटल में इलाज करा रहे हैं। इसके अलावा उर्सला और कांशीराम अस्पताल में एक-एक रोगी भर्ती है। हैलट में डेंगू पॉजिटिव तीन रोगी भर्ती हैं लेकिन इनकी जांच निजी पैथोलॉजियों से हुई है। अभी जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभाग से इनकी जांच नहीं हुई। इन्हें अभी संदिग्ध की श्रेणी में रखा गया है।
शास्त्रीनगर में डेंगू पॉजिटिव एक किशोरी की मौत हुई थी। उसे लिवर की भी बीमारी थी। स्वास्थ्य विभाग ने उसे डेंगू से होने वाली मृत्यु में शामिल नहीं किया है। उसकी मौत का कारण लिवर की बीमारी मानी गई। लेकिन डेंगू संक्रमण के बाद उसकी स्थिति बिगड़ गई थी।
इसी तरह हैलट में भर्ती मंगलाविहार की चित्रलेखा को निजी लैब से स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई थी लेकिन केजीएमयू लखनऊ की जांच में रिपोर्ट निगेटिव आई थी। बाद में उसमें डेंगू की पुष्टि हुई थी। 18 अक्तूबर को चित्रलेखा की मौत हो गई थी। सीनियर फिजिशियन डॉ. एम भट्टर ने बताया कि कोई रोगी शॉक सिंड्रोम में नहीं है।
जो देर से आते हैं उनकी स्थिति खराब होती है। इसके अलावा अगर कोई और रोग है तो अधिक दिक्कत हो जाती है। जिला मलेरिया विभाग अधिकारी एके सिंह और पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट की अगुवाई में मकसूदाबाद में दो डेंगू रोगियों का सत्यापन किया। दोनों रोगी घर पर मिलीं। जिला मलेरिया अधिकारी ने बताया कि रोगी दवाओं से ठीक हैं और घर का काम कर रही थीं। विशेषज्ञों का कहना है कि जिन रोगियों की दूसरी बीमारियां भी हैं, उन्हें डेंगू संक्रमण के बाद दिक्कत हो जा रही है।