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कानपुर : अब महाना और पचौरी गुट के बीच शुरू होगा शीतयुद्ध, जानिए क्यों हुआ पार्षद पति का सरेंडर

Sat, 30 Sep 2023 05:07 AM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Sat, 30 Sep 2023 05:07 AM IST
सार

कहा जा रहा है कि दबाव में सरेंडर करवाने को मजबूर होने की वजह से महाना गुट इसे अपनी हार मान रहा है। ऐसे में पार्टी में यह तनाव बढ़ने की आशंका है। इससे पहले कई अवसरों पर महाना और पचौरी में जुबानी जंग होती रही है।

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Kanpur Assault Case, Now cold war will start between Mahana and Pachauri faction, know why councilor husband s
पार्षद पति और साथियों का सरेंडर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कानपुर में दवा कारोबारी व भाजपा पार्षद पति के बीच हुए मारपीट मामले में विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना गुट और सांसद सत्यदेव पचौरी के आमने-सामने आने से भाजपा में राजनीतिक उठापटक तेज हो गई है। भाजपा पार्षद पति और उसके चार समर्थकों की ओर से इस मामले में आत्मसमर्पण भले ही कर दिया हो, लेकिन अब शीतयुद्ध शुरू होने की बात कही जा रही है।

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दरअसल इस आत्मसमर्पण से महाना गुट को भारी झटका लगा है। पता चला है कि महाना गुट के लोग कुछ ऐसे मामलों को सामने लाने की तैयार कर रहे हैं, जो पार्टी के नियमों के विरुद्ध हैं। लेकिन, ऐसे नियम विरुद्ध कामों में दूसरे गुट के कुछ नेता शामिल रहे हैं। जानकारी मिली है कि पिछले नगर निकाय और विधानसभा चुनाव में किस नेता ने पार्टी प्रत्याशियों खिलाफ किस तरह की भूमिका निभाई है।

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लोकसभा की प्रबल दावेदारी में जुटे हैं दोनों ग्रुप
इसका भंडाफोड़ करने की तैयारी चल रही है। इसके लिए दोनों पक्षों की ओर से जोरशोर से तैयारी शुरू हो गई है। सोशल मीडिया का इसके लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। योजना है यह सब ऐसे किया जाए कि यह पता ही न चले कि कौन करा रहा है। लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखकर भी यह तानाबाना बुना जा रहा है, क्योंकि दोनों गुट लोकसभा की प्रबल दावेदारी में जुटे हैं।

इसे अपनी हार मान रहे है महाना गुट
कहा जा रहा है कि दबाव में सरेंडर करवाने को मजबूर होने की वजह से महाना गुट इसे अपनी हार मान रहे हैं। ऐसे में पार्टी में यह तनाव आगे और बढ़ने आशंका है। इससे पहले कई अवसरों पर महाना और पचौरी की ओर से जुबानी जंग होती रही है। बता दें कि शासन के हस्तक्षेप के बाद दवा व्यापारी से मारपीट के मामले में पार्षद पति अंकित शुक्ला ने अपने चार साथियों संग जेसीपी कार्यालय में आत्मसमर्पण कर दिया है।

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महाराजपुर क्षेत्र के पांच मंडल अध्यक्षों व 18 पार्षद ने छोड़ा पार्टी का अभियान
दवा कारोबारी और भाजपा पार्षद मामले को लेकर एक दिन पहले सांसद पचौरी की ओर से अमोल भाटिया का पक्ष लेते हुए इस मामले आरोपी को अपराधी कहने से नाराज महाराजपुर विधानसभा क्षेत्र के पांच मंडल अध्यक्षों व 18 पार्षद ने भाजपा के बूथ सशक्तिकरण और सेवा पखवाड़ा अभियान में काम करने से मना कर दिया है।

दिया जा रहा है अपराधी होने का प्रमाण पत्र
महाना गुट के माने जाने वाले इन पार्टी कार्यकर्ताओं का कहना है कि जब उन्हें उनकी ही पार्टी के एक बड़े नेता की तरफ से अपराधी होने का प्रमाण पत्र दिया जा रहा है, तो वह पार्टी का काम कैसे कर सकते हैं। अभियान में शामिल होने से मना करने वाले ये वही लोग हैं, जिन्होंने दो दिन पहले पार्षद पति के समर्थन में पुलिस कमिश्नर कार्यालय का घेराव किया था। इनमें जिन मंडल अध्यक्षों और मंडल प्रभारियों ने कार्यकर्ताओं ने काम करने से मना किया है, उसमें यशोदानगर मंडल, जरौली मंडल, सरसौल मंडल, रामादेवी मंडल व हरजेंदर नगर मंडल शामिल है।

बिगड़ रही थी पार्टी की छवि, सुबह ही बनी डैमेज कंट्रोल को रणनीति
दवा कारोबारी अमोल दीप सिंह भाटिया और पार्षद पति अंकित शुक्ला के बीच मारपीट के मामले ने इतना तूल पकड़ लिया था कि प्रदेश सरकार को हस्तक्षेप करना पड़ गया। शासन और भाजपा हाईकमान ने मामले के पटाक्षेप के लिए शुक्रवार को सुबह ही आनन फानन में रणनीति बनाई। दरअसल चिंता पार्टी की बिगड़ती छवि की थी।
दो दिन पहले महाना गुट के लोगों द्वारा पार्षद पति के पक्ष में कमिश्नर कार्यालय का घेराव करने और अगले ही दिन सांसद सत्यदेव पचौरी की ओर से पीड़ित अमोल भाटिया का पक्ष लेने से नगर भाजपा में दो फाड़ नजर आने लगे थे। लोकसभा चुनाव के पहले पार्टी की ऐसी छवि बनना भाजपा हाईकमान और शासन को कतई गवारा नहीं था। ऐसे में मामले का तत्काल पटाक्षेप करवाना ही विकल्प बचा था।

महाना के पास गया फोन, आननफानन में कराया पार्षद पति का सरेंडर
रणनीति बनने के बाद शासन से तुरंत प्रतिनिधिमंडल के साथ सरकारी यात्रा पर गए विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना से सीधे संपर्क किया। उनसे कहा गया कि इस मामले का तत्काल पटाक्षेप हाेना चाहिए। इससे सरकार और पार्टी दोनों की छवि पर आंच सकती है।
पता चला है कि इसके तत्काल बाद सतीश महाना ने निजी सचिव को फोन किया करके कहा कि तत्काल पार्षद पति अंकित शुक्ला और बाकी चार का सरेंडर कराना है। संदेश मिलते ही रायबरेली में अपने गांव गए उनके कानपुर कार्यालय के प्रभारी राकेश तिवारी आननफानन आए। सबसे पहले वह भाजपा पार्षद सौम्या शुक्ला को लेकर पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंचे। फिर अंकित शुक्ला व बाकी चारों लोगों को सरेंडर के लिए बुला लिया।

पीड़ित अमोल दीप सिंह के परिवार से आज मिलेंगे सीएम योगी
पूरे मामले को लेकर सिख समुदाय में बढ़ती नाराजगी को ध्यान में रखते हुए सीएम योगी ने पीड़ित परिवार से भी मिलने का फैसला किया है। सीएम शनिवार को अमोल दीप सिंह भाटिया के माता-पिता से शाम पांच बजे अपने आवास पर मुलाकात करेंगे। शुक्रवार को दिन में सीएम कार्यालय से अमोल के परिजनों के पास फोन आया था।
अमोल की मां भूपिंदर कौर व पिता कमलजीत भाटिया को सीएम से मिलवाने की जिम्मेदारी भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के क्षेत्रीय अध्यक्ष अजीत सिंह छाबड़ा और गुरुद्वारा सरसैया घाट के प्रधान सेवक रमिंदर सिंह रिंकू को दी गई है। गौरतलब है कि आंदोलित सिख समुदाय के लोग शुक्रवार को बड़ी संख्या में मोतीझील में एकत्र हो रहे थे। लेकिन, पार्षद पति के सरेंडर करने की सूचना मिलने पर वे वापस चले गए।

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