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आंगन बना कब्रगाह: 'हाय लाडो को लील गया आंगन', हाथों में मिट्टी भर-भरकर चिखती रही मां, ऐसे चला रेस्क्यू ऑपरेशन

Sat, 29 Aug 2026 08:42 AM IST
Himanshu Awasthi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: Himanshu Awasthi Updated Sat, 29 Aug 2026 08:42 AM IST
सार

Kanpur Ground Collapse Death News: महाराजपुर थाना क्षेत्र के पुरवामीर गांव में घर का आंगन धंसने से 22 फीट गहरे गड्ढे में दबकर युवती यशी की दर्दनाक मौत हो गई। शुक्रवार को गमगीन माहौल में उसे अंतिम विदाई दी गई। हादसे के वक्त परिवार राखी की खुशियां मना रहा था, लेकिन कुछ ही घंटों में खुशियां मातम में बदल गईं।

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Kanpur A young woman died after buried in 22 foot deep pit mother screamed courtyard swallowed my daughter
कानपुर जमीन धंसने का मामला - फोटो : amar ujala

विस्तार

जिस आंगन में यशी की किलकारियां गूंजीं, जहां वह खेली और बड़ी हुई, जहां से माता-पिता ने उसके हाथ पीले करने के सपने देखे थे। वहीं से शुक्रवार को उसे अंतिम विदाई दी गई। हादसे के बाद मां रेखा का रो-रोकर बुरा हाल था। वह आंगन की मिट्टी दोनों हाथों में भरकर बार-बार चीख रही थीं।

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उनके मुंह से बार-बार निकल रहा ‘हाय लाडो को लील गया आंगन’ हर किसी का कलेजा चीर रहा था। मां की चीख सुनकर मौके पर मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं। महाराजपुर के पुरवामीर गांव में हुए हादसे के बाद घर के बाहर खड़े पिता विनोद की आंखों से आंसू थम नहीं रहे थे।

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सजने-संवरने का बहुत शौक था
बारिश की बूंदों के बीच चेहरे पर बेटी को खोने का दर्द साफ झलक रहा था। विनोद ने बताया कि यशी ने पिछले साल ही इंटर पास किया था। उसे सजने-संवरने का बहुत शौक था। कुछ दिन से वह ब्यूटी पार्लर का कोर्स सीखने जा रही थी। सोचा था कि अगले साल अच्छा लड़का देखकर उसके हाथ पीले कर देंगे।

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जमीन धंसने से गड्ढे में समाई युवती, एनडीआरएफ-एसडीआरएफ का रेस्क्यू ऑपरेशन जारी - फोटो : amar ujala

आंगन में बेटी की शादी का मंडप सजना था
लेकिन उन्हें क्या पता था कि सपने अधूरे ही रह जाएंगे।  जिस आंगन में बेटी की शादी का मंडप सजना था वहां मातम पसर जाएगा। इतना कहते हुए विनोद फिर फफक पड़े, तो ग्रामीणों ने उनको चबूतरे पर बैठाया। वह घंटों अपने मकान को एकटक निहारते रहे। यशी से बड़ी तीन बहनों रुचि, रुपा और अनूपा की शादी हो चुकी है।

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अम्मा, रस्सी पकड़ लेती तो मैं उसे मौत के मुंह से खींच लाती
मायके आई अनूपा को यकीन नहीं हो रहा था कि उसकी आंखों के सामने ही यशी गड्ढे में मिट्टी के नीचे दब गई। मां से लिपटकर वह बार-बार कह रही थी, अम्मा हमने बहुत कोशिश की लेकिन छुटकी रस्सी नहीं पकड़ पाई। पकड़ लेती, तो मैं उसे मौत के मुंह से खींच लाती। क्या यही देखने के लिए मुझे भगवान ने यहां बुलाया था।

Kanpur A young woman died after buried in 22 foot deep pit mother screamed courtyard swallowed my daughter
जमीन धंसने से गड्ढे में समाई युवती की मौत - फोटो : amar ujala

राखी बंधवाने की थी तैयारी, अब बहन की अर्थी को कंधा देगा इकलौता भाई
चार बहनों में इकलौते भाई भास्कर ने बताया कि दो दिन पहले ही अनूपा और यशी ने रक्षाबंधन की तैयारियां शुरू कर दी थीं। दोनों फोन कर पूछ रही थीं कि कौन सी मिठाई खाओगे और कैसी राखी बंधवाओगे। बहनों की खुशी देखकर उसने भी बड़ी मुश्किल से छुट्टी ली थी।

डोली उठाने का सपना देख रहा था
उसे क्या पता था कि इस बार का रक्षाबंधन जिंदगी भर का गम दे जाएगा। यशी ही अब घर में शादी के लिए बची थी। उसकी डोली उठाने का सपना देख रहा था, लेकिन अब उसकी अर्थी को कंधा देना पड़ेगा। आंगन की मिट्टी दोनों हाथों में भरकर मां चीखती रही।

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जमीन धंसने से गड्ढे में समाई युवती की मौत - फोटो : amar ujala

ऐसे चला रेस्क्यू अभियान

  • 6:40 बजे: आंगन की जमीन धंसी, यशी गड्ढे में गिरी।
  • 6:55 बजे: पीआरबी-112 मौके पर पहुंची।
  • 7:15 बजे: स्थानीय थाने की पुलिस पहुंची।
  • 8:20 बजे: दमकल की टीम पहुंची और रेस्क्यू शुरू हुआ।
  • 8:40 बजे: एनडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंची।
  • 9:25 बजे: गड्ढे से करीब 10 मीटर दूर जेसीबी से खुदाई शुरू की गई।
  • 11:00 बजे: पीएसी की टीम मौके पर पहुंची।
  • 2:50 बजे: यशी को गड्ढे से बाहर निकाला गया।
  • 3:20 बजे: सीएचसी सरसौल में डॉक्टरों ने यशी को मृत घोषित किया।

देर से शुरू हुआ रेस्क्यू, कई अड़चनों से अटका काम
ग्रामीणों की मानें, तो यशी को बाहर निकालने के लिए रेस्क्यू करीब पौने दो घंटे देर से शुरू हुआ। दमकल टीम की ओर से शुरूआती पहल की गई। इसके बाद जब जेसीबी आई तो घर का गैस कनेक्शन ने समस्या खड़ी की। यदि जेसीबी चलती तो पाइपलाइन फट सकती थी। इस पर आईजीएल कंपनी को फोन किया गया। इसके एक घंटे बाद भी जब कोई कर्मचारी मौके पर नहीं पहुंचा तब सीएफओ दीपक शर्मा ने खुद कंपनी के अधिकारियों को फोन लगाया। तब जाकर कहीं गैस की सप्लाई बंद हो सकी।

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आंगन में बना गड्ढा - फोटो : amar ujala

गड्ढे से करीब 10 मीटर दूरी पर रैंप बनाया गया
इसके बाद जैसे-तैसे रेस्क्यू आगे बढ़ा, तो आंगन के आसपास की जगह संकरी होने की समस्या खड़ी हो गई। इस पर गड्ढे से करीब 10 मीटर दूरी पर रैंप बनाया गया। करीब तीन घंटे तक जेसीबी मिट्टी खोदकर बाहर फेंकती रही। जेसीबी गहराई तक नहीं जा सकती थी। इस कारण एनएचएआई से पोकलैंड की मांग की गई। सूचना के करीब एक घंटे बाद वह आ सकी। इसके बाद लगभग 25 फीट का गड्ढा खोदकर यशी को बाहर निकाला जा सका।

रेस्क्यू में काटी बिजली, शाम तक बहाल न होने पर भड़के ग्रामीण
रेस्क्यू के चलते आसपास के मकान खाली कराने के साथ ही क्षेत्र की बिजली भी कटवा दी गई थी। रेस्क्यू समाप्त होने के बाद भी जब देर शाम तक बिजली आपूर्ति बहाल नहीं हुई तो ग्रामीणों का गुस्सा भड़क गया। ग्रामीणों की भीड़ बस में सवार होकर चौकी पहुंची और बिजली आपूर्ति शुरू कराने की बात कही। इस पर पुलिस ने तत्काल ही एसडीओ और लाइनमैन को फोन कर आपूर्ति चालू करने को कहा।

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