Kanpur: शीतलहर तेज, हार्ट अटैक से 11, लकवा से चार की मौत, ऐसे करें बचाव
ठंड दिल और दिमाग दोनों पर भारी पड़ रही है। गलन की वजह से नसों में सिकुड़न आने से ब्लड प्रेशर उछाल मार रहा है। नसों में खून का थक्का जमने से हार्ट और ब्रेन अटैक पड़ रहा है।
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कानपुर में शीतलहर का हमला तेज होने से हार्ट अटैक और ब्रेन अटैक के रोगी बढ़ गए हैं। बुधवार को हार्ट अटैक से 11 रोगियों की मौत हो गई। इनमें गंभीर हालत में आए आठ रोगियों की इलाज के दौरान मौत हुई और तीन की अस्पताल पहुंचने से पहले ही सांसें थम गईं। इसके साथ ही हैलट के न्यूरो साइंसेज विभाग में मस्तिष्क की नस फटने के रोगी बढ़ गए हैं।
ब्रेन अटैक से चार रोगियों की मौत हुई है। डॉक्टरों का कहना है कि हार्ट अटैक और ब्रेन अटैक के जो रोगी आ रहे हैं, उनका ब्लड प्रेशर अनियंत्रित हो गया था। इसके साथ ही जो डायबिटिक, गुर्दा, लिवर का पुराना रोगी है, उनके लिए खतरा अधिक है। कार्डियोलॉजी इमरजेंसी और ओपीडी में बुधवार को 753 रोगियों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। 49 रोगियों को अस्पताल में भर्ती करके इलाज शुरू कर दिया गया।
इंस्टीट्यूट के निदेशक प्रोफेसर विनय कृष्णा का कहना है कि जाड़े में रोगियों की तबीयत अधिक बिगड़ती है। एहतियात बरतने के साथ रोगी कंट्रोल रूम से संपर्क करके अपनी समस्या बता सकते हैं। रोगी को दिक्कत होने पर परिजन तुरंत अस्पताल लेकर आएं। इधर-उधर भटकने से रोगी की स्थिति और खराब हो सकती है। वहीं, न्यूरो साइंसेज विभाग में बुधवार को मस्तिष्क की नस फटने के 10 रोगियों को भर्ती किया गया। सीनियर न्यूरो सर्जन डॉ. राघवेंद्र गुप्ता ने बताया कि मस्तिष्क की नस फटने के वार्ड में 20 रोगियों का इलाज चल रहा है।
ठंड है बहुत, सावधानी बरतें
- ठंडे पानी से मत नहाएं, गर्म करके नहाएं।
- ब्लड प्रेशर की दवा समय से खा लें, बीच में न छोड़ें।
- चक्कर, आंखों के सामने अंधेरा, पैरों में कंपन जैसे लक्षण हों तुरंत अस्पताल पहुंचें।
- गर्म कमरे से अचानक बाहर ठंड में न निकलें।
- गरिष्ठ भोजन न लें, हल्का सुपाच्य पौष्टिक भोजन ही लें।
- रात को खाना खाकर तुरंत मत सोएं।