Kanpur: लॉन्ग कोविड की चपेट में हैं शहर के 10 हजार लोग, सामान्य से कम रहता ऑक्सीजन लेवल
हैलट ओपीडी स्तर पर लॉन्ग कोविड रोगियों का इलाज चल रहा है। इनमें ज्यादातर वे रोगी हैं जो कोविड से तो जीत गए लेकिन उनके गुर्दों में खराबी आ गई। लिवर और न्यूरो की बीमारियों ने घेर लिया। उनके हाथ-पैरों में झनझनाहट रहती है और थोड़ा सा तेज चलने पर सांस फूल जा रही है।
विस्तार
कानपुर के 10 हजार रोगी लॉन्ग कोविड की चपेट में हैं। मौसमी बीमारियां बढ़ने के साथ ही इनकी हालत बिगड़ जा रही है। इनका स्टेमिना भी घट गया है और कमजोरी रहती है। कुछ को सांस की तकलीफ है और ऑक्सीजन लेवल कम रहता है। अस्पतालों में आ रहे रोगियों की डायग्नोसिस के ब्योरे से पता चला है कि इनमें बहुतों की कोविड रिपोर्ट एक साल पहले कोरोना निगेटिव आई थी लेकिन कोविड के लक्षण खत्म नहीं हुए हैं।
15 फीसदी लॉन्ग कोविड रोगियों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ा है। ये अनिद्रा के साथ एंजाइटी और डिप्रेशन का शिकार हो गए हैं। हैलट ओपीडी स्तर पर लॉन्ग कोविड रोगियों का इलाज चल रहा है। इनमें ज्यादातर वे रोगी हैं जो कोविड से तो जीत गए लेकिन उनके गुर्दों में खराबी आ गई। लिवर और न्यूरो की बीमारियों ने घेर लिया। उनके हाथ-पैरों में झनझनाहट रहती है और थोड़ा सा तेज चलने पर सांस फूल जा रही है।
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डॉ. जेएस कुशवाहा ने बताया कि ओपीडी में लगातार लॉंग कोविड के रोगी आ रहे हैं। बहुत से रोगियों को ऑक्सीजन की जरूरत पड़ती है। वहीं सीनियर चेस्ट फिजीशियन डॉ. राजीव कक्कड़ ने बताया कि कोरोना से जितने लोग संक्रमित हुए हैं, उनमें 10 से 15 फीसदी रोगी लॉन्ग कोविड की चपेट में हैं। उनकी ओपीडी में प्रतिदिन दो-तीन रोगी आते हैं। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. गणेश शंकर ने बताया कि लॉन्ग कोविड रोगियों में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें बढ़ी हैं। रोगियों का इलाज चल रहा है।
वे रोगी जो जिनकी कोरोना की निगेटिव रिपोर्ट आ गई। लेकिन उन्हें कोरोना के लक्षण बने हुए हैं। विश्व स्तर पर हुए शोधों में चिकित्सा विज्ञानियों ने इस स्थिति को लॉन्ग कोविड नाम दिया है।
नम्बर गेम
कुल कोरोना संक्रमित - 94574
लॉन्ग कोविड रोगी - 10 हजार
कोरोना के बाद डायबिटिक हुए - 20 हजार
लिवर, गुर्दा रोग की चपेट में - 1500
असामान्य नींद के शिकार - 15000
- अत्याधिक कमजोरी महसूस होना
- नींद न आना, कम भूख लगना
- सांस फूलना, अस्थमा जैसे लक्षण
- ऑक्सीजन लेवल कम रहना
- गुर्दे और लिवर की दिक्कत
- पैरों में झनझनाहट, पिंडली में ऐंठन
क्या करें
- नींद व दर्द की दवा का कम इस्तेमाल करें।
- टीवी और मोबाइल फोन ज्यादा न देखें।
- योगाभ्यास करें, यह बहुत लाभ दायक है।
- हल्का खाना खाएं, दिनचर्या को सुधारें।