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UP: आजादी के 20 साल बाद लोहिया के रूप में मिला था सांसद, 1967 में किया गया कन्नौज संसदीय का गठन
Thu, 14 Mar 2024 09:41 PM IST
शिखा पांडेय
तारिक इकबाल, अमर उजाला, कन्नौज
तारिक इकबाल, अमर उजाला, कन्नौज
Published by: शिखा पांडेय
Updated Thu, 14 Mar 2024 09:41 PM IST
सार
कन्नौज संसदीय सीट पर हुए 16 चुनाव के दौरान सबसे ज्यादा सात बार समाजवादी पार्टी ने जीत हासिल की है। सपा को यहां वर्ष 1998, 1999, 2000 (उपचुनाव), 2004, 2009, 2012 (उपचुनाव) और 2014 के चुनाव में कामयाबी मिली थी।
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डॉ. राम मनोहर लोहिया
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
देश को आजादी तो 1947 में मिली थी, लेकिन कन्नौज के बाशिंदों को अपना सांसद चुनने के लिए 20 साल का इंतजार करना पड़ा। इस बीच लोकसभा के जितने भी चुनाव हुए यहां के लोग फर्रुखाबाद संसदीय सीट के लिए वोट डाला करते थे। 1967 में कन्नौज संसदीय सीट का गठन हुआ तो यहां के बाशिंदों को अपना पहला सांसद चुनने का मौका मिला।
वर्ष 1967 के लोकसभा चुनाव में कन्नौज संसदीय का गठन हुआ तो इसमें तत्कालीन फर्रुखाबाद जिले के कन्नौज विधानसभा, छिबरामऊ और उमर्दा के अलावा इटावा की भरथना और बिधूना (अब औरेया जिले का हिस्सा) विधानसभा क्षेत्र को शामिल किया गया था। पहले चुनाव को लेकर यहां के बाशिंदों में काफी जोश था। नवगठित कन्नौज संसदीय सीट से कुल पांच उम्मीदवारों ने किस्मत आजमायी थी। 15 फरवरी को वोट पड़े थे। कुल 54.8 फीसदी मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था। इसके तहत दो लाख 94 हजार 581 मतदाताओं ने चुनाव में हिस्सा लिया था। पहली ही बार के चुनाव में यहां से डॉ. राम मनोहर लोहिया के सिर सांसद का ताज सजा था। कांग्रेस के एसएन मिश्र को नजदीकी मुकाबले में शिकस्त मिली थी।
पहले चुनाव के पांच उम्मीदवारों को इस तरह मिले थे वोट
- सोशलिस्ट समाज पार्टी से डॉ. राम मनोहर लोहिया को 93578 वोट
- कांग्रेस से एसएन मिश्र को 93106 वोट
- भारतीय जनसंघ के एन सिंह को 78296 वोट
- प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के एस कृष्णा को 11080 वोट
- निर्दलीय आरबीए कटियार को को 7363 वोट मिले थे।
अब तक 16 चुनाव, दो बार हुआ उपचुनाव
वर्ष 1967 में हुए पहले चुनाव के बाद से कन्नौज संसदीय सीट के लिए अब तक 16 बार चुनाव हो चुका है। इसमें दो बार उपचुनाव भी शामिल है। पहला उपचुनाव वर्ष 2000 में और दूसरा वर्ष 2012 में हुआ था।
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सपा सात, कांग्रेस-भाजपा दो बार जीती
कन्नौज संसदीय सीट पर हुए 16 चुनाव के दौरान सबसे ज्यादा सात बार समाजवादी पार्टी ने जीत हासिल की है। सपा को यहां वर्ष 1998, 1999, 2000 (उपचुनाव), 2004, 2009, 2012 (उपचुनाव) और 2014 के चुनाव में कामयाबी मिली थी। भाजपा को 1996 और 2019 के चुनाव में कामयाबी मिली। कांग्रेस को वर्ष 1971 और 1984 के चुनाव में जीत मिली। 1967 में सोशलिस्ट समाज पाटी, 1977 में भारतीय लोकदल, 1980 में जनता पार्टी सेक्यूलर, 1989 में जनता दल, 1991 में जनता पार्टी को एक-एक बार जीत मिली है।
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वर्ष 1967 के लोकसभा चुनाव में कन्नौज संसदीय का गठन हुआ तो इसमें तत्कालीन फर्रुखाबाद जिले के कन्नौज विधानसभा, छिबरामऊ और उमर्दा के अलावा इटावा की भरथना और बिधूना (अब औरेया जिले का हिस्सा) विधानसभा क्षेत्र को शामिल किया गया था। पहले चुनाव को लेकर यहां के बाशिंदों में काफी जोश था। नवगठित कन्नौज संसदीय सीट से कुल पांच उम्मीदवारों ने किस्मत आजमायी थी। 15 फरवरी को वोट पड़े थे। कुल 54.8 फीसदी मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था। इसके तहत दो लाख 94 हजार 581 मतदाताओं ने चुनाव में हिस्सा लिया था। पहली ही बार के चुनाव में यहां से डॉ. राम मनोहर लोहिया के सिर सांसद का ताज सजा था। कांग्रेस के एसएन मिश्र को नजदीकी मुकाबले में शिकस्त मिली थी।
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पहले चुनाव के पांच उम्मीदवारों को इस तरह मिले थे वोट
- सोशलिस्ट समाज पार्टी से डॉ. राम मनोहर लोहिया को 93578 वोट
- कांग्रेस से एसएन मिश्र को 93106 वोट
- भारतीय जनसंघ के एन सिंह को 78296 वोट
- प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के एस कृष्णा को 11080 वोट
- निर्दलीय आरबीए कटियार को को 7363 वोट मिले थे।
अब तक 16 चुनाव, दो बार हुआ उपचुनाव
वर्ष 1967 में हुए पहले चुनाव के बाद से कन्नौज संसदीय सीट के लिए अब तक 16 बार चुनाव हो चुका है। इसमें दो बार उपचुनाव भी शामिल है। पहला उपचुनाव वर्ष 2000 में और दूसरा वर्ष 2012 में हुआ था।
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सपा सात, कांग्रेस-भाजपा दो बार जीती
कन्नौज संसदीय सीट पर हुए 16 चुनाव के दौरान सबसे ज्यादा सात बार समाजवादी पार्टी ने जीत हासिल की है। सपा को यहां वर्ष 1998, 1999, 2000 (उपचुनाव), 2004, 2009, 2012 (उपचुनाव) और 2014 के चुनाव में कामयाबी मिली थी। भाजपा को 1996 और 2019 के चुनाव में कामयाबी मिली। कांग्रेस को वर्ष 1971 और 1984 के चुनाव में जीत मिली। 1967 में सोशलिस्ट समाज पाटी, 1977 में भारतीय लोकदल, 1980 में जनता पार्टी सेक्यूलर, 1989 में जनता दल, 1991 में जनता पार्टी को एक-एक बार जीत मिली है।