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कबरई बना कब्रगाह: खनन के लिए महोबा में अवैध खतरनाक बारूद का इस्तेमाल, मकानों में भी पड़ीं दरारें

Fri, 25 Sep 2020 02:57 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा सूरज शुक्ला, अमर उजाला, महोबा
सूरज शुक्ला, अमर उजाला, महोबा Published by: प्रभापुंज मिश्रा Updated Fri, 25 Sep 2020 02:57 PM IST
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Kabrai became graveyard: illegal gunpowder used in Mahoba for mining, cracks also found in houses
कबरई में होता अवैध खनन - फोटो : amar ujala
स्टोन सिटी यानी कबरई इलाके में अवैध विस्फोटक कारोबार का भी गढ़ बन गया है। मध्य प्रदेश बार्डर से बड़ी मात्रा में विस्फोटक कबरई आता है, जिसे खदान मालिक खरीदते हैं। तय मानकों को दरकिनार कर विस्फोटक का इस्तेमाल कर खदानों में धमाके कराते हैं। इससे आसपास के गांव वाले सहमे रहते हैं।
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उनकी घरों की दीवारें तक दरक गई हैं। कभी भी बड़े हादसे हो सकते हैं। विस्फोटक का ये कारोबार और खदानों में हो रहे धमाकों ने इन गांवों की दुर्दशा कर रखी है। कभी-कभी यही विस्फोटक लोगों व मजदूरों की जान ले लेता है। वहीं, अवैध तरीके कराए जा रहे धमाकों से आसपास की जमीन बर्बाद हो रही है। पत्थर सड़कों तक सट गए हैं। सड़कें बर्बाद हो चुकी है। 
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कभी भी करते हैं धमाके 
खदानों में ब्लास्ट कराने के लिए समय तय है। हर दिन दोपहर 12 से दो बजे के बीच खदानों में ब्लास्ट कराया जा सकता है। इस दौरान खदानों के आसपास के गांवों के ग्रामीण हर दिन दहशत में रहते हैं। वो धमाके का इंतजार करते रहते हैं। जिससे वो धमाके के बाद सुकून की सांस ले सकें।
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कबरई निवासी किसान दीनानाथ बताते हैं कि धमाकों से घर गिरने का भी डर रहता है। इसलिए उस समय अधिकतर लोग घरों से बाहर आ जाते हैं। उन्होंने बताया कि इलाके में जहां-जहां खदाने चल रही हैं वहां के आसपास के गांवों के घरों में दरारें पड़ी मिल जाएंगी। उन्होंने बताया कि कई बार तय समय के अलावा भी खदानों में धमाके होते रहते हैं। जिससे काफी दहशत का माहौल बन जाता है। 

 

Kabrai became graveyard: illegal gunpowder used in Mahoba for mining, cracks also found in houses
कबरई बनी कब्रगाह - फोटो : amar ujala
नियमों की ऐसे उड़ती धज्ज्यिां 
तय समय में दोपहर बारह से दो के बीच ब्लास्ट करना चाहिए लेकिन ब्लास्ट कभी भी कराए जाते हैं। ब्लास्टिंग में प्रतिबंधित ओनियम नाइट्रेट का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए मगर खनन माफिया मुख्य रूप से इसी का इस्तेमाल करते हैं। तभी उसकी क्षमता अधिक होती है।

ब्लास्टिंग के लिए पहाड़ में दो इंच का होल कर उसमें ईडी लगानी चाहिए मगर यहां छह इंच के होल में ईडी लगाते हैं। इससे अधिक पहाड़ टूटता है। ब्लास्टिंग से पहले पूरे इलाके में एनाउंसमेंट करना अनिवार्य है पर ये नहीं होता है। सुरक्षा उपकरण भी मजदूरों को मुहैया नहीं कराया जाता है। ऐसे तमाम नियमों को ताक पर रखकर ब्लास्टिंग कराई जाती है। 

अवैध विस्फोटक से जमींदोज हो रहे पहाड़
गुगौरा गांव के विवेक सिंह का कहना है कि अगर तय मानक से खदानों में ब्लास्ट कराया जाए तो उसका प्रभाव गांवों पर नहीं पड़ेगा। वहीं खदाने भी इतनी गहराई तक नहीं टूटेंगी। इसलिए खनन माफिया खदानों में अधिक क्षमता वाले विस्फोटक का इस्तेमाल करते हैं। विस्फोट कराने के लिए ईडी, जिलेटिन की छड़ें और डेटोनेटर का इस्तेमाल किया जाता है।

पहाड़ों को अधिक तोड़ने के लिए ईडी के सेल को अधिक गराई में ड्रिल करके डालते हैं। कई बार एक से अधिक सेल का भी इस्तेमाल करते हैं। यही वजह है कि पूरे पहाड़ के पहाड़ जमींदोज हो रहे हैं और जमीन से पानी निकल आ रहा है। 

 

Kabrai became graveyard: illegal gunpowder used in Mahoba for mining, cracks also found in houses
कबरई बनी कब्रगाह - फोटो : amar ujala
साहब! अवैध तरीके से विस्फोट से ही जा रही जानें, मैं भी हुआ शिकार 
डहर्रा गांव निवासी भोला खदानों में काम करते थे। वर्ष 2005 में खदान में हुए ब्लास्ट से उनका बायां हाथ उड़ गया था। वहीं उनकी दाहिनी आंख भी खराब हो गई थी। भोला बताते हैं कि खदानों में काम करने वाले मजदूरों की जान की कोई कीमत नहीं है।

हादसा होने के बाद खनन माफिया मामूली रकम देकर सब रफा-दफा कर देते हैं। पुलिस प्रशासन भी उनकी ही जुबान बोलता है। भोला के मुताबिक अवैध तरीके से जो खदानों में ब्लास्ट कराया जाता है, सबसे अधिक हादसे उसी वजह से होते हैं। गांव भी उसी वजह से तबाह हो रहे हैं। 

ग्रामीणों से बातचीत 
धमाकों से घर की दीवारें दरक चुकी हैं। कोई सुधि लेने वाला नहीं है। आवाज उठाने पर जानमाल का भी खतरा है। 
भरत सिंह, डहर्रा गांव 

खदानों की तरफ जाने में हर वक्त खतरा रहता है। कभी भी धमाके होते रहते हैं। गांवों की सड़कें जर्जर हैं। जीना दूभर हो गया है।
कंधीलाल, गुगौरा गांव

खनन माफिया के आगे कुछ नहीं हो सकता। विस्फोट होने पर जमीन हिल जाती है। बच्चे-बुजुर्ग दहशत में रहते हैं। 
सुघर सिंह डहर्रा गांव
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