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प्रसूता की मौत के 9 माह बाद मिला इंसाफ: यहां डॉक्टर, स्टाफ नर्स नहीं बाहरी महिलाएं करातीं प्रसव,13 पर कार्रवाई

Mon, 27 Jul 2026 06:12 PM IST
Shikha Pandey न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कन्नौज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कन्नौज Published by: Shikha Pandey Updated Mon, 27 Jul 2026 06:12 PM IST
सार

11 अक्तूबर 2025 को विनोद दीक्षित अस्पताल में प्रसव के बाद महिला की हालत बिगड़ी थी। मामले में चार डॉक्टरों समेत 13 पर कार्रवाई की गई है।

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Justice served nine months after new mother's death; action taken against 13
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

विनोद दीक्षित अस्पताल की महिला विंग में नौ माह पहले प्रसव के बाद प्रसूता की मौत के मामले में रविवार को चार डॉक्टरों समेत 13 लोगों पर कार्रवाई की गई। सभी का जून माह का वेतन रोकने के निर्देश दिए गए। साथ ही कार्रवाई के लिए शासन को पत्र लिखा गया है। इनके अलावा आशा कार्यकर्ता सुषमा के निलंबन के लिए प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए गए।
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शहर के अलाउद्दीपुर निवासी मोनी पत्नी विक्रम को प्रसव पीड़ा होने पर महिला विंग में 11 अक्तूबर 2025 को भर्ती कराया गया था। यहां पर प्रसव के बाद मोनी की हालत बिगड़ गई। तब प्रसूता को जिला महिला अस्पताल रेफर किया गया। परिजन उसे लेकर महिला अस्पताल पहुंचे। वहां पर भी डॉक्टर न होने के कारण इलाज नहीं हो सका और राजकीय मेडिकल कॉलेज भेजा गया। इसके बाद वहां से भी कानपुर रेफर किया गया, जहां उसकी मौत हो गई थी।
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प्रसूता के ससुर ओमकार ने महिला विंग में पांच हजार रुपये लेने और लापरवाही का आरोप भी लगाया था। पति ने इंसाफ के लिए अफसरों की चौखट पर कई बार दस्तक दी। तत्कालीन सीएमओ जांच के नाम पर टरकाते रहे लेकिन आखिरकार प्रसूता को इंसाफ मिला और सीएचसी प्रभारी डॉ. सुधांशु दुबे, महिला विंग में तैनात डॉ. निक्की आनंद, डॉ. ज्योत्सना शुक्ला, जिला महिला अस्पताल की डॉ. आंचल सिंह, स्वास्थ्य कर्मी मंजू मिश्रा, सरस्वती, सीलू, नीले, आशा रानी शर्मा, संगीता शर्मा का जून माह का वेतन रोकने के निर्देश दिए गए। सीएमओ डॉ. विकास चंद्रा का कहना है कि प्रसूता की मौत के मामले में एसडीएम सदर ने जांच की थी। जांच आख्या के आधार पर कार्रवाई की गई है।
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डॉक्टर, स्टाफ नर्स नहीं बाहरी महिलाएं करातीं प्रसव
जांच में पता चला कि महिला विंग में बिना नियुक्ति के वार्ड आया राजकुमारी और सफाई कर्मी मीना कार्य कर रही हैं। जांच में दोनों के नाम शामिल किए गए हैं, जिससे साफ जाहिर हो रहा है कि प्रसव के दौरान दोनों कर्मी महिला विंग में मौजूद थे। सीएचसी प्रभारी को दोनों कर्मियों को महिला विंग में कार्य न कराने के लिए निर्देशित किया गया है।
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