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जज्बात कॉन्सर्ट: सुरों और अल्फाजों ने छुई दिल की गहराइयां, प्रतिभा सिंह बघेल, स्वयं और मनिका ने बांधा समां
Sun, 30 Aug 2026 12:02 AM IST
Shikha Pandey
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: Shikha Pandey
Updated Sun, 30 Aug 2026 12:02 AM IST
सार
Kanpur News: सीएसजेएमयू में जज्बात कॉन्सर्ट का आयोजन हुआ। प्रतिभा सिंह बघेल, स्वयं और मनिका ने समां बांधा।
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प्रतिभा सिंह बघेल, स्वयं और मनिका
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) के सभागार में गजल, कविता और शास्त्रीय संगीत की यादगार शाम शनिवार को सजी। वर्ल्ड ऑफ म्यूजिशियंस की ओर से आयोजित जज्बात कॉन्सर्ट में सुरों और अल्फाजों के अद्भुत संगम ने न सिर्फ संगीत और साहित्यिक प्रेमियों को झुमाया, बल्कि उनके दिल की गहराइयों को छुआ। कार्यक्रम में अमर उजाला मीडिया पार्टनर और डीकेजी एंटरटेनमेंट मार्केटिंग पार्टनर रहे।
प्रतिभा सिंह बघेल की लाइव प्रस्तुति ने मोहा मन
गायिका प्रतिभा सिंह बघेल की लाइव प्रस्तुति कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रही। उन्होंने मखमली आवाज में गजल और गीतों की लड़ी पिरोकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। शुरुआत दिल चीज क्या है आप मेरी जान लीजिए..., चुपके चुपके रात दिन आंसू बहाना याद है... और ये न थी हमारी क़िस्मत... गाकर श्रोताओं को देर शाम तक बांधे रखा। हसरत मोहानी की मशहूर गजल ''''अंदाज अपने देखते हैं आईने में वो'''' और फरीदा खानम को याद करते हुए ''''न रवा कहिए'''', जमीन पर गिरा दिया मुझको धुआं बनाके फिजा में उड़ा दिया मुझको की प्रस्तुति पर पूरा हॉल तालियों से गूंज उठा।
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प्रतिभा सिंह बघेल की लाइव प्रस्तुति ने मोहा मन
गायिका प्रतिभा सिंह बघेल की लाइव प्रस्तुति कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रही। उन्होंने मखमली आवाज में गजल और गीतों की लड़ी पिरोकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। शुरुआत दिल चीज क्या है आप मेरी जान लीजिए..., चुपके चुपके रात दिन आंसू बहाना याद है... और ये न थी हमारी क़िस्मत... गाकर श्रोताओं को देर शाम तक बांधे रखा। हसरत मोहानी की मशहूर गजल ''''अंदाज अपने देखते हैं आईने में वो'''' और फरीदा खानम को याद करते हुए ''''न रवा कहिए'''', जमीन पर गिरा दिया मुझको धुआं बनाके फिजा में उड़ा दिया मुझको की प्रस्तुति पर पूरा हॉल तालियों से गूंज उठा।
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शायर स्वयं श्रीवास्तव के तेवर और व्यंग्य
युवा कवि स्वयं श्रीवास्तव ने अपनी रचनाओं और कनपुरिया अंदाज से माहौल में ऊर्जा भर दी। उन्होंने सामाजिक सरोकारों से लेकर पौराणिक संदर्भों पर बेबाक प्रस्तुतियां दीं। अनारकली और सलीम पर मर्मस्पर्शी पंक्तियां प्रेम करने चली तो उसे भी वही जो महज थी कहानी सुना दी गई, नर्तकी एक अकबर के दरबार में कैसे दीवार में चुना दी गई एक अपराध में दोनों शामिल रहे, किंतु चांदी की चम्मच रिहा हो गई, आपका इश्क कैसा सलीम, आपके सामने आखिरी ईंट रख दी गई...सुनाकर तालियां बटोरीं। घर छोड़ने के दर्द को महसूस कराया कि मुश्किल थी संभलना ही पड़ा घर के वास्ते फिर घर से निकालना ही पड़ा, मजबूरियों का नाम हमने शौक रख लिया फिर शौक ही बदल लिए घर के वास्ते सुनाया। आगामी जेनजी और जेन अल्फा के विरोध प्रदर्शन को कविता में सुनाया कि ऐसा नहीं की सारा फलक मांग रहे हैं। हम सिर्फ अपने हिस्से का हक मांग रहे हैं, सरकार तुम चलाओ हमको नौकरी तो दो, रोटी के लिए बस थोड़ा नमक मांग रहे हैं।
युवा कवि स्वयं श्रीवास्तव ने अपनी रचनाओं और कनपुरिया अंदाज से माहौल में ऊर्जा भर दी। उन्होंने सामाजिक सरोकारों से लेकर पौराणिक संदर्भों पर बेबाक प्रस्तुतियां दीं। अनारकली और सलीम पर मर्मस्पर्शी पंक्तियां प्रेम करने चली तो उसे भी वही जो महज थी कहानी सुना दी गई, नर्तकी एक अकबर के दरबार में कैसे दीवार में चुना दी गई एक अपराध में दोनों शामिल रहे, किंतु चांदी की चम्मच रिहा हो गई, आपका इश्क कैसा सलीम, आपके सामने आखिरी ईंट रख दी गई...सुनाकर तालियां बटोरीं। घर छोड़ने के दर्द को महसूस कराया कि मुश्किल थी संभलना ही पड़ा घर के वास्ते फिर घर से निकालना ही पड़ा, मजबूरियों का नाम हमने शौक रख लिया फिर शौक ही बदल लिए घर के वास्ते सुनाया। आगामी जेनजी और जेन अल्फा के विरोध प्रदर्शन को कविता में सुनाया कि ऐसा नहीं की सारा फलक मांग रहे हैं। हम सिर्फ अपने हिस्से का हक मांग रहे हैं, सरकार तुम चलाओ हमको नौकरी तो दो, रोटी के लिए बस थोड़ा नमक मांग रहे हैं।
कई संवेदनशील नज्म पेश कीं
इस मौके पर मनिका दुबे ने अपनी सिग्नेचर गजल शहर के शोर में वीरानियां हैं, यहां तुम हो मगर तनहाइयां हैं से श्रोताओं के दिलों को छुआ। उन्होंने मां की कुर्बानियों और जिंदगी के फलसफे पर कई संवेदनशील नज्म पेश कीं। मंच का संचालन एंकर पद्मिनी पद्मा शर्मा ने किया। कुलपति प्रो. विनय पाठक, आयुर्वेदाचार्य वंदना पाठक, हेल्प यू फाउंडेशन के चेयरमैन डॉ. हर्षवर्धन अग्रवाल, आयोजक योगेंद्र जैन, धर्मेंद्र कुमार गुप्ता, उन्नाव के एसडीएम डीपी सिंह आदि मौजूद रहे।
इस मौके पर मनिका दुबे ने अपनी सिग्नेचर गजल शहर के शोर में वीरानियां हैं, यहां तुम हो मगर तनहाइयां हैं से श्रोताओं के दिलों को छुआ। उन्होंने मां की कुर्बानियों और जिंदगी के फलसफे पर कई संवेदनशील नज्म पेश कीं। मंच का संचालन एंकर पद्मिनी पद्मा शर्मा ने किया। कुलपति प्रो. विनय पाठक, आयुर्वेदाचार्य वंदना पाठक, हेल्प यू फाउंडेशन के चेयरमैन डॉ. हर्षवर्धन अग्रवाल, आयोजक योगेंद्र जैन, धर्मेंद्र कुमार गुप्ता, उन्नाव के एसडीएम डीपी सिंह आदि मौजूद रहे।