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Kanpur: लोहा कारोबारियों का फैक्टरियों के बाहर कैमरे लगाने से इन्कार, कहा- 24 घंटे की निगरानी व्यापार में बाधा

Thu, 12 Dec 2024 09:33 AM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Thu, 12 Dec 2024 09:33 AM IST
सार

Kanpur News: एसजीएसटी अफसरों के साथ हुई बैठक में  कारोबारियों ने कहा कि  लिखित आदेश मिलने पर अनुपालन करेंगे। साथ ही, 24 घंटे की निगरानी को व्यापार में बाधा और संविधान के अनुच्छेद 301 से 307 का उल्लंघन भी बताया।

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Iron traders refuse to install cameras outside factories say 24 hour surveillance hinders business
लोहा कारोबारियों के साथ बैठक करते एसजीएसटी के अधिकारी - फोटो : amar ujala

विस्तार

कानपुर में पान मसाला कारोबारियों के बाद लोहा कारोबारियों ने भी अपनी फैक्टरियों के बाहर सीसीटीवी कैमरे लगवाने से इन्कार कर दिया। एसजीएसटी के अपर आयुक्त के साथ बुधवार को हुई बैठक में उन्होंने साफ कहा कि यदि कैमरे लगवाने हैं, तो लिखित आदेश करें। साथ ही निगरानी पर आपत्ति जताते हुए कहा कि पहले ही कारोबार 50 फीसदी रह गया है। ट्रेडर्स ने निगरानी के चलते उनसे माल खरीदना बंद कर दिया है। कानून में भी इस तरह की निगरानी के लिए कोई प्रावधान नहीं है।

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एसजीएसटी के अपर आयुक्त (ग्रेड एक), कानपुर द्वितीय राम सनेही विद्यार्थी ने लखनपुर स्थित कार्यालय में प्रमुख लोहा निर्माता कंपनियों के प्रतिनिधियों और एसोसिएशन के सदस्यों के साथ बैठक में फैक्टरियों के बाहर सीसीटीवी कैमरे लगाने की बात कही थी। उनका कहना था कि ऐसा शासन का निर्देश है। इस पर राधे-राधे इस्पात के प्रतिनिधि संजय त्रिपाठी ने कहा कि कोई लिखित आदेश हो तो उपलब्ध करवा दें, ताकि सभी उद्यमी उसका पालन कर सकें।

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24 घंटे की निगरानी को व्यापार में बाधा
अधिकारियों ने बताया कि मौखिक आदेश ही है। पैनम स्टील के प्रतिनिधि ने सवाल किया कि ऐसी जांच करने के क्या मापदंड हैं? फीटा के महासचिव उमंग अग्रवाल ने 24 घंटे की निगरानी को व्यापार में बाधा बताते हुए इसे संविधान के अनुच्छेद 301 से 307 का उल्लंघन भी बताया। वे बोले, कर चोरी हो रही है तो विभाग धारा 67, 68 और 129 में कार्रवाई कर सकता है। श्री अग्रवाल ने कहा कि कारोबारियों को भयभीत किया जा रहा है। फैक्टरियों के बाहर चेक पोस्ट की तरह वाहनों की बैरिकेडिंग लगा दी गई है।

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अधिकारी के कमरे में कैमरा नहीं लगाया गया
शासन ने चेक पोस्ट की व्यवस्था खत्म की थी। फिर क्यों पुरानी व्यवस्था ट्रेड विशेष पर लादी जा रही है? सूचनाएं मिल रही हैं कि ऐसी निगरानी की वजह से उद्यमी प्रदेश से पलायन करने को मजबूर हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकारी विभागों में भी तो भ्रष्टाचार है। उसकी शिकायतें भी तो प्रशासन व शासन तक पहुंचती हैं, लेकिन आज तक किसी भी अधिकारी के कमरे में कैमरा नहीं लगाया गया। सरकारी विभागों में भी कैमरे लगें और उसकी एक्सेस कारोबारियों की दी जाए।

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उद्योग खुद ही बंद हो जाएंगे
ट्रेडर्स ने खुद को निगरानी से बचाने के लिए प्रदेश के निर्माताओं से कारोबार करना बंद कर दिया है। दूसरे राज्यों से माल खरीदने लगे हैं। ऐसे में यहां के उद्योग खुद ही बंद हो जाएंगे। ऐसे उपाय करने चाहिए, जिससे कर चोरी भी रुके और उद्यमियों का उत्पीड़न भी न हो। बैठक में राधे-राधे इस्पात, पैनम स्टील, रिमझिम इस्पात, आरएचएल के निदेशक शामिल हुए। एसजीएसटी की तरफ से अपर आयुक्त के अलावा संयुक्त आयुक्त मुकेश चंद्र पांडेय, शैलेश कुमार और अमित मोहन मौजूद थे।

नोएडा में जांच नहीं, आगरा और गाजियाबाद की फैक्टरियां बंद
सूत्रों ने बताया कि आगरा और गाजियाबाद में एसजीएसटी की टीमें रोस्टर के अनुसार लोहा फैक्टरियों की निगरानी कर रही हैं। इसका असर ये हुआ कि इन फैक्टरियों ने काम बंद कर दिया और इस संबंध में पत्र भी जारी कर दिया। वहीं नोएडा में जांच नहीं कराई जा रही है।

पान मसाला कारोबारी भी मांग चुके लिखित आदेश
एसजीएसटी अफसरों ने इसके पहले पान मसाला कारोबारियों से फैक्टरियों के बाहर सीसीटीवी कैमरे लगाने की बात कही थी। इस संबंध में चार दिसंबर को कारोबारियों और अफसरों की बैठक हुई थी। इसमें भी कारोबारियों ने लिखित आदेश की मांग उठाई थी, लेकिन अब तक लिखित आदेश नहीं आया है। इसके उलट पान मसाला फैक्टरियों की निगरानी के लिए 19 दिसंबर तक का रोस्टर लागू कर दिया।

पहले से जूझ रहा लोहा कारोबार

  • लोहा निर्यात घटने, सहालग और खेती-किसानी के उत्पादों की मांग न होने से बाजार में उत्पाद डंप हो रहे।
  • 31 मार्च तक सभी एमएसएमई इकाइयों को बकाया भुगतान करने की अनिवार्यता के कारण नकदी संकट।
  • लोहा आयात आसान होने और लोहे के स्थान पर प्लास्टिक उत्पादों की मांग बढ़ने से भी कारोबारी परेशान हैं।

पहले से है निगरानी की ये व्यवस्था

  • लोहा कारोबार में सबसे ज्यादा ई-इनवाइस जीएसटी पोर्टल से जारी होती हैं।
  • ट्रकों पर रेडियो फ्रिक्वेंसी आईडेंटीफिकेशन सिस्टम लगा होता है, जिससे इनकी निगरानी होती है।
  • हर टोल प्लाजा से निकलने वाले ट्रकों का डाटा लिया जाता है। इसके जरिये भी निगरानी होती है।
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