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Kanpur News: नसों की दवा सेरिब्रल पैल्सी के रोगियों की लौटा रही रोशनी
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कानपुर। सेरिब्रल पैल्सी (सीपी) के बालरोगियों की आंखों की निष्क्रिय तंत्रिका नसों की दवा से सक्रिय हो जा रही है। इससे सीपी के बालरोगियों की आंखों में रोशनी आ गई है। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभाग ने सेरिब्रल पैल्सी के ऐसे रोगियों पर यह नुस्खा अपनाया जिनकी आंखों में रोशनी नहीं रही। यह शोध चार सालों से चल रहा है। 15 रोगियों पर यह विधि सफलता के साथ अपनाई गई।
शोध से लाइलाज नेत्र रोगों के क्षेत्र में इलाज का एक और रास्ता खुल गया है। अभी तक सीपी के जिन रोगियों की ऑप्टिक नर्व खराब रहती थी, उन्हें अंधत्व का जीवन गुजारना पड़ता था। जिन बाल रोगियों की आंखों में इस इलाज से रोशनी आई है, उनका आयु वर्ग छह महीने से दो साल का है। शोध के अगुवा वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. परवेज खान ने बताया कि इतना छोटा बच्चा रोग के बारे में खुद तो कुछ बता नहीं सकता। मां-बाप आकर बताते हैं कि आंखों के सामने हाथ हिलाने और कोई खिलौना दिखाने पर बच्चा रिस्पांस नहीं देता। उसके चेहरे पर कोई भाव नहीं आते।
ऐसे बच्चों की विजुअल इवोक्ड पोटेंशियल (वीईजी) जांच की गई। जांच में वीईपी ग्राफ जीरो आया। इनकी ऑप्टिक नर्व एक्टिव नहीं रही।
उन्होंने बताया कि नसों में खून की रफ्तार बढ़ाने और गड़बड़ी सुधारने वाली दवा का इस्तेमाल किया गया। टैबलेट का पाउडर बनाकर शहद के साथ बच्चों को चटाया गया। छह महीने के बाद बच्चे का फिर वीईपी टेस्ट किया गया। जांच में पाया गया कि वीईपी ग्राफ बनने लगा है। रोगी की ऑप्टिक नर्व सक्रिय हो गई। इस विधि से 15 बालरोगियों की आंखों में रोशनी आ गई। डॉ. खान ने बताया कि अभी तक सीपी के रोगियों की निष्क्रिय ऑप्टिक नर्व को सक्रिय करने का इलाज नहीं रहा है। इस विधि में कामयाबी मिली। इससे रोगियों को राहत मिलेगी। इसके साथ रोगियों का डाटा तैयार किया जा रहा है।
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शोध से लाइलाज नेत्र रोगों के क्षेत्र में इलाज का एक और रास्ता खुल गया है। अभी तक सीपी के जिन रोगियों की ऑप्टिक नर्व खराब रहती थी, उन्हें अंधत्व का जीवन गुजारना पड़ता था। जिन बाल रोगियों की आंखों में इस इलाज से रोशनी आई है, उनका आयु वर्ग छह महीने से दो साल का है। शोध के अगुवा वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. परवेज खान ने बताया कि इतना छोटा बच्चा रोग के बारे में खुद तो कुछ बता नहीं सकता। मां-बाप आकर बताते हैं कि आंखों के सामने हाथ हिलाने और कोई खिलौना दिखाने पर बच्चा रिस्पांस नहीं देता। उसके चेहरे पर कोई भाव नहीं आते।
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ऐसे बच्चों की विजुअल इवोक्ड पोटेंशियल (वीईजी) जांच की गई। जांच में वीईपी ग्राफ जीरो आया। इनकी ऑप्टिक नर्व एक्टिव नहीं रही।
उन्होंने बताया कि नसों में खून की रफ्तार बढ़ाने और गड़बड़ी सुधारने वाली दवा का इस्तेमाल किया गया। टैबलेट का पाउडर बनाकर शहद के साथ बच्चों को चटाया गया। छह महीने के बाद बच्चे का फिर वीईपी टेस्ट किया गया। जांच में पाया गया कि वीईपी ग्राफ बनने लगा है। रोगी की ऑप्टिक नर्व सक्रिय हो गई। इस विधि से 15 बालरोगियों की आंखों में रोशनी आ गई। डॉ. खान ने बताया कि अभी तक सीपी के रोगियों की निष्क्रिय ऑप्टिक नर्व को सक्रिय करने का इलाज नहीं रहा है। इस विधि में कामयाबी मिली। इससे रोगियों को राहत मिलेगी। इसके साथ रोगियों का डाटा तैयार किया जा रहा है।
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