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दिल्ली: जंतर-मंतर डीनोटिफाई था तो वहां गए क्यों? सौरव-रांका से हाईकोर्ट के तीखे सवाल, कहा- आप जेनजी तो नहीं

Wed, 21 Oct 2026 01:44 PM IST
Vijay Singh Pundir न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Vijay Singh Pundir Updated Wed, 21 Oct 2026 01:44 PM IST
सार

सीजेपी नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की ओर से पेश कानूनी टीम ने दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया और अपनी याचिका पर तत्काल सुनवाई की मांग की। हाई कोर्ट इस मामले की सुनवाई आज (बुधवार) करने के लिए सहमत हो गया। वहीं, हाईकोर्ट ने ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) अध्यक्ष नेहा बोरा की याचिका पर भी सुनवाई की मांग पर सहमति जताई है।

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CJP leaders Ashutosh Ranka and Sourav Das have approached the High Court against their judicial custody
अशुतोष रांका और सौरव दास - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दिल्ली हाईकोर्ट ने सीजेपी नेता सौरव दास, आशुतोष रांका और आइसा अध्यक्ष नेहा बोरा की याचिकाओं पर सुनवाई की मांग पर सहमति जताई। सीजेपी के कार्यकर्ता सौरव दास और आशुतोष रांका ने विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (एसईएम) अदालत के उस आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी है, जिसमें उन्हें 21 अक्तूबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। आज उनकी न्यायिक हिरासत की अवधि समाप्त हो रही है।

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सीजेपी नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की ओर से पेश कानूनी टीम ने दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया और अपनी याचिका पर तत्काल सुनवाई की मांग की। हाई कोर्ट इस मामले की सुनवाई आज (बुधवार) करने के लिए सहमत हो गया। दिल्ली हाईकोर्ट के जज सुब्रमण्यम प्रसाद की पीठ मामले की सुनवाई की। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता अभिक चिम्नी और दिल्ली पुलिस की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा पेश हुए।
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अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ताओं ने 11 अक्तूबर को शांति बनाए रखने का बॉन्ड दिया था। जंतर मंतर को प्रदर्शन स्थल के रूप में डिनोटिफाई किए जाने के बाद वे वहां गए और कथित तौर पर बैरिकेड तोड़ा। अदालत ने पूछा कि बॉन्ड तोड़ने के बाद एसईएम अदालत में नियत प्रक्रिया का पालन करने के बजाय सीधे अनुच्छेद 226 के तहत हाईकोर्ट आने की जरूरत क्या है। अदालत ने सुझाव दिया कि दोपहर दो बजे एसईएम अदालत की कार्यवाही का इंतजार किया जा सकता है और जरूरत पड़ने पर बाद में रिवीजन याचिका दायर की जा सकती है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने टिप्पणी की कि अगर मकसद सत्ता परिवर्तन है, तो इसे चुनावों के जरिए ही हासिल किया जाना चाहिए।
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सीजेपी ने हाईकोर्ट से अर्जी वापस ली
अदालत ने कहा आप शाम चार बजे तक का इंतजार करें, अगर स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट की अदालत से आपको राहत मिलती है तो इस मैटर को क्लोज कर दिया जाएगा, अगर फैसला आपके फेवर में नहीं आता है तो आप अगले दिन रिवीजन याचिका या आर्टिकल 226 के साथ हाई कोर्ट आ सकते हैं। हाईकोर्ट की टिप्पणी के बाद सीजेपी ने अपनी अर्जी वापस ली।

तो फिर आप 'जेन-जी'  नहीं हैं: अदालत
अदालत ने पूछा आपकी उम्र क्या है? सीजेपी नेताओं के वकील चिमिनी ने बताया कि सौरव 27 साल का है और आशुतोष 32 साल का है। जिसपर कोर्ट ने कहा कि तो फिर आप 'जेन-जी'  नहीं हैं। 'जेन-जी' क्या होता है? कोर्ट को बताया गया कि 1997 के बाद पैदा हुए लोग 'जेन-जी' होते हैं। अदालत ने कहा कि तो फिर आप 'जेन-जी' नहीं हैं।


बता दें कि दास और रांका को 13 अक्तूबर को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया। उन पर बैरिकेड लगे होने के बावजूद जंतर-मंतर स्थल में गेट चढ़कर प्रवेश करने का आरोप है। 14 अक्तूबर को उन्हें पांच दिन की न्यायिक हिरासत मिली। 19 अक्तूबर को एसईएम अदालत ने हिरासत दो और दिनों के लिए बढ़ा दी। एसईएम अदालत ने उनके आचरण को कानून के प्रति अनादरपूर्ण और शांति भंग की गंभीर आशंका वाला बताया। अदालत ने उनके जमानतदारों को भी अयोग्य मानकर खारिज किया। एक जमानतदार के बॉन्ड पर फोटो और आधार कार्ड में अंतर था। दूसरे जमानतदार दास की बुनियादी जानकारी नहीं दे पाए।

नेहा बोरा की याचिका पर भी सुनवाई
दिल्ली हाई कोर्ट बुधवार को पुलिस नोटिस के खिलाफ ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) अध्यक्ष नेहा बोरा की याचिका पर सुनवाई की मांग पर सहमति जताई।

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