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अब ग्राम पंचायत करेगी गो-सेवकों के मेहनताना का भुगतान
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कानपुर देहात। जिले में संचालित गो-आश्रय स्थलों में काम करने वाले गो सेवकों को ग्राम पंचायत राजवित्त या फिर पंद्रहवें वित्त से भुगतान किया जाएगा। इन्हें प्रति माह पांच हजार रुपये दिए जाने का प्रावधान है। 25 गायों की संख्या में एक गो सेवक रखा गया है। अभी तक गोवंश के भरण पोषण के लिए मिलने वाले धन से इनके मेहनताना का भी भुगतान किया जाता था।
जिले में कुल 37 गो-आश्रय स्थल संचालित हैं। इसमें नगरीय क्षेत्र की कान्हा गोशाला भी शामिल हैं। सभी 37 आश्रय स्थलों में मिलाकर 3150 गोवंश हैं। प्रत्येक गोआश्रय स्थल में 25 गोवंश पर एक व्यक्ति देखरेख के लिए रखा गया है। गायों को समय से चारा, पानी देने के साथ साफ-सफाई की जिम्मेदारी रहती है। इनके भुगतान को लेकर शुरू से पेंच फंसता रहा है। अभी तक गो आश्रय स्थल में गायों के भरण पोषण के लिए आने वाली धनराशि से गो सेवकों की मजदूरी का भुगतान कर दिया जाता था।
डीएम डॉ. दिनेश चंद्र ने शासनादेश के मुताबिक, भरण पोषण के धनराशि का इस्तेमाल सिर्फ चारा खरीदने में ही करने के निर्देश दिए हैं। वहां काम करने वाले गो सेवकों को ग्राम पंचायत के राजवित्त व पंद्रहवें वित्त से भुगतान करने के लिए कहा है। उन्होंने सभी एसडीएम को इसका कड़ाई से अनुपालन कराने के निर्देश दिए हैं। हाल ही में गो आश्रय स्थलों के लिए धनराशि जारी की गई है। ग्राम पंचायत स्तर की समितियों को निर्देश दिए गए हैं कि वह धन के उपयोग में नए निर्देशों का अनुपालन करें। यदि कहीं भी अवहेलना की गई तो कार्रवाई तय है।
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गोवंश के भरण पोषण धनराशि में कटौती नहीं
गोआश्रय स्थल में काम करने वाले गो सेवकों को शासनादेश के मुताबिक ग्राम पंचायत भुगतान करेंगी। डीएम की तरफ से यह निर्देश जारी किया जा चुका है। अब गोवंश के भरण पोषण की धनराशि में कटौती नहीं की जाएगी। इसकी निगरानी के लिए प्रत्येक ब्लाक के पशु चिकित्सा अधिकारी को निर्देश दिए गए हैं। डा. डीएन लवानियां, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी
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जिले में कुल 37 गो-आश्रय स्थल संचालित हैं। इसमें नगरीय क्षेत्र की कान्हा गोशाला भी शामिल हैं। सभी 37 आश्रय स्थलों में मिलाकर 3150 गोवंश हैं। प्रत्येक गोआश्रय स्थल में 25 गोवंश पर एक व्यक्ति देखरेख के लिए रखा गया है। गायों को समय से चारा, पानी देने के साथ साफ-सफाई की जिम्मेदारी रहती है। इनके भुगतान को लेकर शुरू से पेंच फंसता रहा है। अभी तक गो आश्रय स्थल में गायों के भरण पोषण के लिए आने वाली धनराशि से गो सेवकों की मजदूरी का भुगतान कर दिया जाता था।
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डीएम डॉ. दिनेश चंद्र ने शासनादेश के मुताबिक, भरण पोषण के धनराशि का इस्तेमाल सिर्फ चारा खरीदने में ही करने के निर्देश दिए हैं। वहां काम करने वाले गो सेवकों को ग्राम पंचायत के राजवित्त व पंद्रहवें वित्त से भुगतान करने के लिए कहा है। उन्होंने सभी एसडीएम को इसका कड़ाई से अनुपालन कराने के निर्देश दिए हैं। हाल ही में गो आश्रय स्थलों के लिए धनराशि जारी की गई है। ग्राम पंचायत स्तर की समितियों को निर्देश दिए गए हैं कि वह धन के उपयोग में नए निर्देशों का अनुपालन करें। यदि कहीं भी अवहेलना की गई तो कार्रवाई तय है।
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गोवंश के भरण पोषण धनराशि में कटौती नहीं
गोआश्रय स्थल में काम करने वाले गो सेवकों को शासनादेश के मुताबिक ग्राम पंचायत भुगतान करेंगी। डीएम की तरफ से यह निर्देश जारी किया जा चुका है। अब गोवंश के भरण पोषण की धनराशि में कटौती नहीं की जाएगी। इसकी निगरानी के लिए प्रत्येक ब्लाक के पशु चिकित्सा अधिकारी को निर्देश दिए गए हैं। डा. डीएन लवानियां, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी