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हाय महंगाई: पेट्रोल और डीजल की कीमत में अब तक की सर्वाधिक तेजी, जानिए एक वर्ष में कितना महंगा हुआ
Sat, 09 Oct 2021 09:27 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Sat, 09 Oct 2021 09:27 AM IST
सार
इस महंगाई से आम आदमी पर आफत सी आ गई है। कोरोना काल में घटती आय के बीच वह घर का बजट नियंत्रित नहीं कर पा रहा है। आय के साधन बढ़े नहीं, जबकि जरूरतें जस की तस हैं।
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पेट्रोल पंप पर पेट्रोल लेते लोग।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमत ने नया कीर्तिमान छू लिया है। पेट्रोल पंप संचालक बताते हैं कि आजादी के बाद किसी एक वर्ष में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में यह सर्वाधिक वृद्धि है। एक अक्तूबर 2020 से आठ अक्तूबर 2021 के बीच पेट्रोल 29.50 रुपये और डीजल 21.38 रुपये प्रति लीटर महंगा हुआ है।
इस महंगाई से आम आदमी पर आफत सी आ गई है। कोरोना काल में घटती आय के बीच वह घर का बजट नियंत्रित नहीं कर पा रहा है। आय के साधन बढ़े नहीं, जबकि जरूरतें जस की तस हैं। इस महंगाई से सिर्फ आम आदमी ही परेशान नहीं है, बल्कि कारोबारियों पर भी बुरा असर पड़ा है। सीमित कमाई वाले लोगों ने कार और बाइक की सवारी कम कर दी है। आनेजाने के लिए जुगाड़ अपनाने लगे हैं।
सुबह-शाम का काम साइकिल से या पैदल
पशुपति नगर के रहने वाले प्रशांत पांडेय ने बताया कि हमीरपुर रोड पर उनकी मार्बल की दुकान है। पेट्रोल का दाम बढ़ने के बाद वह सुबह दूध और शाम को सब्जी वगैरह लेने पैदल या साइकिल से जाने लगे हैं। इस काम में रोजाना 10 किमी तक गाड़ी चल जाती थी। अब उसकी बचत हो जाती है। साथ ही बच्चों को गाड़ी में घुमाना भी कम कर दिया है। कमाई उतनी ही है, इसलिए जरूरतों में कटौती ही विकल्प है।
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इस महंगाई से आम आदमी पर आफत सी आ गई है। कोरोना काल में घटती आय के बीच वह घर का बजट नियंत्रित नहीं कर पा रहा है। आय के साधन बढ़े नहीं, जबकि जरूरतें जस की तस हैं। इस महंगाई से सिर्फ आम आदमी ही परेशान नहीं है, बल्कि कारोबारियों पर भी बुरा असर पड़ा है। सीमित कमाई वाले लोगों ने कार और बाइक की सवारी कम कर दी है। आनेजाने के लिए जुगाड़ अपनाने लगे हैं।
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सुबह-शाम का काम साइकिल से या पैदल
पशुपति नगर के रहने वाले प्रशांत पांडेय ने बताया कि हमीरपुर रोड पर उनकी मार्बल की दुकान है। पेट्रोल का दाम बढ़ने के बाद वह सुबह दूध और शाम को सब्जी वगैरह लेने पैदल या साइकिल से जाने लगे हैं। इस काम में रोजाना 10 किमी तक गाड़ी चल जाती थी। अब उसकी बचत हो जाती है। साथ ही बच्चों को गाड़ी में घुमाना भी कम कर दिया है। कमाई उतनी ही है, इसलिए जरूरतों में कटौती ही विकल्प है।
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लंबे रूट पर बाइक टैक्सी बन जाता हूं
बेगमपुरवा निवासी मोहम्मद अकील शानू ने पेट्रोल खर्च नियंत्रित करने के लिए खुद को बाइक टैक्सी में तब्दील कर लिया। बताते हैं कि पेट्रोल महंगा होने के बाद बाइक टैक्सी का एप डाउनलोड किया है। जब भी बाबूपुरवा से नौबस्ता, रामादेवी, जाजमऊ, कल्याणपुर या दूरदराज के इलाके जाता हूं, तो उस एप को ऑन कर देता हूं। जीपीएस से मेरी लोकेशन कंपनी के पास पहुंचती है। कोई नोटिफिकेशन मिलने पर रूट पर जहां भी कोई यात्री मिलता है, उसे बैठा लेता हूं। इससे मेरा लंबी दूरी तय करने भर का पेट्रोल का खर्च निकल आता है।
कार छोड़कर बाइक पर आया
बर्रा निवासी अमर त्रिपाठी का ऑफिस दादानगर में है। अभी तक वे कार से जाते थे। बीते दो महीने से बाइक से जाने लगे हैं। वे बताते हैं कि यदि आसपास सब्जी या दूध लेने भी जाना पड़ता है तो पैदल जाना उचित समझते हैं। ऐसे ही कीमत बढ़ती रही तो बाइक को भी किनारे रखना पड़ेगा और साइकिल की सवारी करेंगे।
पति कार छोड़कर स्कूटी, पत्नी पैदल चलने लगीं
पेट्रोल की महंगाई पर शिवाजी नगर में रहने वाले बैंक अधिकारी अनिल मिश्र ने कार की सवारी का शौक छोड़ दिया है। उन्होंने स्कूटी से आनाजाना शुरू कर दिया है। बताया कि पत्नी आभा मिश्रा गुरुनानक कॉलेज में शिक्षिका हैं। वे अब घर से अक्सर पैदल ही स्कूल के लिए निकल जाती हैं। उनका कहना है कि इतनी महंगाई में संतुलन बनाकर तो चलना ही पड़ेगा।
बेगमपुरवा निवासी मोहम्मद अकील शानू ने पेट्रोल खर्च नियंत्रित करने के लिए खुद को बाइक टैक्सी में तब्दील कर लिया। बताते हैं कि पेट्रोल महंगा होने के बाद बाइक टैक्सी का एप डाउनलोड किया है। जब भी बाबूपुरवा से नौबस्ता, रामादेवी, जाजमऊ, कल्याणपुर या दूरदराज के इलाके जाता हूं, तो उस एप को ऑन कर देता हूं। जीपीएस से मेरी लोकेशन कंपनी के पास पहुंचती है। कोई नोटिफिकेशन मिलने पर रूट पर जहां भी कोई यात्री मिलता है, उसे बैठा लेता हूं। इससे मेरा लंबी दूरी तय करने भर का पेट्रोल का खर्च निकल आता है।
कार छोड़कर बाइक पर आया
बर्रा निवासी अमर त्रिपाठी का ऑफिस दादानगर में है। अभी तक वे कार से जाते थे। बीते दो महीने से बाइक से जाने लगे हैं। वे बताते हैं कि यदि आसपास सब्जी या दूध लेने भी जाना पड़ता है तो पैदल जाना उचित समझते हैं। ऐसे ही कीमत बढ़ती रही तो बाइक को भी किनारे रखना पड़ेगा और साइकिल की सवारी करेंगे।
पति कार छोड़कर स्कूटी, पत्नी पैदल चलने लगीं
पेट्रोल की महंगाई पर शिवाजी नगर में रहने वाले बैंक अधिकारी अनिल मिश्र ने कार की सवारी का शौक छोड़ दिया है। उन्होंने स्कूटी से आनाजाना शुरू कर दिया है। बताया कि पत्नी आभा मिश्रा गुरुनानक कॉलेज में शिक्षिका हैं। वे अब घर से अक्सर पैदल ही स्कूल के लिए निकल जाती हैं। उनका कहना है कि इतनी महंगाई में संतुलन बनाकर तो चलना ही पड़ेगा।
लागत बढ़ी पर वसूली हो रही कम
पेट्रोल एंड एचएसडी डीलर एसोसिएशन के अध्यक्ष ओमशंकर मिश्रा बताते हैं कि पेट्रोल पंप संचालकों के सामने पूंजी का संकट खड़ा हो गया है। उन्हें पेट्रोलियम कंपनियों को नकद पैसा देकर डीजल और पेट्रोल खरीदना पड़ता है। एक वर्ष पहले एक लीटर के लिए 70 रुपये देने पड़ते थे। अब 100 रुपये का जुगाड़ करना पड़ता है। इस बिजनेस में ट्रांसपोर्टरों, कारोबारियों, कंपनियों को महीने भर तक उधार माल देना पड़ता है वे एकमुश्त भुगतान करते हैं। बीते एक वर्ष से माल तो जा रहा है, लेकिन उधारी समय पर नहीं मिल रही।
उत्पाद नहीं बन पाएंगे प्रतिस्पर्धी
आईआईए के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनील वैश्य का कहना है कि डीजल के दाम बढ़ने से कच्चे माल की कीमत पांच से 10 गुना तक बढ़ गई हैं। इससे लागत बढ़ी है। उत्पादों के दाम बढ़ाने पड़े हैं। कीमत बढ़ने से प्रतिस्पर्धी उत्पाद बनाना मुश्किल हो रहा है। उत्पादन के साथ निर्यात पर भी असर पड़ रहा है। कोरोना काल के चलते पिछले 18 महीनों से फैक्ट्रियों में उत्पादन 50 फीसदी ही रहा। अब इसमें सुधार आना शुरू हुआ है तो महंगाई की मार पड़ रही है। शहर में प्रतिदिन 10 हजार से ज्यादा ट्रकों का देशभर में आवागमन है। ट्रांसपोर्टरों ने 10 फीसदी माल भाड़ा बढ़ा दिया है।
भाड़ा नियंत्रित करना मुश्किल
यूपी मोटर ट्रांसपोर्टर्स एसोसिएशन के महामंत्री मनीष कटारिया का कहना है कि ट्रांसपोर्टरों ने माल भाड़ा 10 फीसदी बढ़ा दिया है। डीजल के बढ़ते रेट के कारण इसमें और इजाफा हो सकता है। लगातार रेट बढ़ते रहने से भाड़ा नियंत्रित कर पाना मुश्किल हो रहा है। चूंकि भाड़े के रेट पहले तय हो जाते हैं और डीजल के दाम बाद में बढ़ने से लगातार नुकसान हो रहा है।
पेट्रोल के दाम
70.83 रुपये- एक अक्तूबर 2020
83.53 रुपये- एक जनवरी 2021
91.61 रुपये- एक जून 2021
100.33 रुपये- आठ अक्तूबर 2021
-------------------------------
29.50 रुपये कुल वृद्धि एक वर्ष में
डीजल के दाम
70.92 रुपये- एक अक्तूबर 2020
80.95 रुपये- एक अप्रैल 2021
86.30 रुपये- एक जून 2021
92.30 रुपये- आठ अक्तूबर 2021
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21.38 रुपये कुल वृद्धि एक वर्ष में
पेट्रोल एंड एचएसडी डीलर एसोसिएशन के अध्यक्ष ओमशंकर मिश्रा बताते हैं कि पेट्रोल पंप संचालकों के सामने पूंजी का संकट खड़ा हो गया है। उन्हें पेट्रोलियम कंपनियों को नकद पैसा देकर डीजल और पेट्रोल खरीदना पड़ता है। एक वर्ष पहले एक लीटर के लिए 70 रुपये देने पड़ते थे। अब 100 रुपये का जुगाड़ करना पड़ता है। इस बिजनेस में ट्रांसपोर्टरों, कारोबारियों, कंपनियों को महीने भर तक उधार माल देना पड़ता है वे एकमुश्त भुगतान करते हैं। बीते एक वर्ष से माल तो जा रहा है, लेकिन उधारी समय पर नहीं मिल रही।
उत्पाद नहीं बन पाएंगे प्रतिस्पर्धी
आईआईए के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनील वैश्य का कहना है कि डीजल के दाम बढ़ने से कच्चे माल की कीमत पांच से 10 गुना तक बढ़ गई हैं। इससे लागत बढ़ी है। उत्पादों के दाम बढ़ाने पड़े हैं। कीमत बढ़ने से प्रतिस्पर्धी उत्पाद बनाना मुश्किल हो रहा है। उत्पादन के साथ निर्यात पर भी असर पड़ रहा है। कोरोना काल के चलते पिछले 18 महीनों से फैक्ट्रियों में उत्पादन 50 फीसदी ही रहा। अब इसमें सुधार आना शुरू हुआ है तो महंगाई की मार पड़ रही है। शहर में प्रतिदिन 10 हजार से ज्यादा ट्रकों का देशभर में आवागमन है। ट्रांसपोर्टरों ने 10 फीसदी माल भाड़ा बढ़ा दिया है।
भाड़ा नियंत्रित करना मुश्किल
यूपी मोटर ट्रांसपोर्टर्स एसोसिएशन के महामंत्री मनीष कटारिया का कहना है कि ट्रांसपोर्टरों ने माल भाड़ा 10 फीसदी बढ़ा दिया है। डीजल के बढ़ते रेट के कारण इसमें और इजाफा हो सकता है। लगातार रेट बढ़ते रहने से भाड़ा नियंत्रित कर पाना मुश्किल हो रहा है। चूंकि भाड़े के रेट पहले तय हो जाते हैं और डीजल के दाम बाद में बढ़ने से लगातार नुकसान हो रहा है।
पेट्रोल के दाम
70.83 रुपये- एक अक्तूबर 2020
83.53 रुपये- एक जनवरी 2021
91.61 रुपये- एक जून 2021
100.33 रुपये- आठ अक्तूबर 2021
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29.50 रुपये कुल वृद्धि एक वर्ष में
डीजल के दाम
70.92 रुपये- एक अक्तूबर 2020
80.95 रुपये- एक अप्रैल 2021
86.30 रुपये- एक जून 2021
92.30 रुपये- आठ अक्तूबर 2021
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21.38 रुपये कुल वृद्धि एक वर्ष में