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Kanpur News: देश में विकसित सेमीकंडक्टर तकनीक साबित होगी गेम चेंजर

Sat, 29 Nov 2025 02:49 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 29 Nov 2025 02:49 AM IST
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Indigenously developed semiconductor technology will prove to be a game changer
पीएसआईटी में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में शामिल सदस्य। - फोटो : संस्थान
कानपुर। आज के युग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और सेमीकंडक्टर जैसी तकनीक भविष्य की दिशा तय कर रही हैं। देश में विकसित हो रही सेमीकंडक्टर तकनीक भविष्य में चिप निर्माण के क्षेत्र में गेम चेंजर साबित होंगी।
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युवा सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में शोध और नवाचार करें। यह आने वाले समय में उद्योग, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय क्षमता को नए आयाम देगा। यह बातें शुक्रवार को पीएसआईटी के दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में मुख्य अतिथि और मध्य प्रदेश पावर मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड के निदेशक अनिल श्रीवास्तव ने कहीं।
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सम्मेलन का उद्घाटन समूह निदेशक प्रो. मनमोहन शुक्ला, मुख्य अतिथि अनिल श्रीवास्तव, विशिष्ट अतिथि डीआरडीओ मुख्यालय नई दिल्ली के डायरेक्टरेट ऑफ एक्स्ट्रा म्यूरल रिसर्च एंड आईपीआर के निदेशक डाॅ. केपी सिंह तथा एआरएमआरईबी डीआरडीओ के उपनिदेशक आदित्य पटेल ने किया।
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पहले दिन तकनीकी सत्रों में एआई, मशीन लर्निंग, एजेंटिक एआई, साइबर सुरक्षा, स्पेस टेक्नोलाॅजी, डेटा साइंस, स्मार्ट ग्रिड मैनेजमेंट, आईओटी सिस्टम, रोबोटिक्स और नवीकरणीय ऊर्जा विषयों से संबंधित 35 तकनीकी शोध-पत्र प्रस्तुत किए गए।

कार्यक्रम में शामिल आईआईटी कानपुर के प्रो. वाईएन सिंह ने क्वांटम कंप्यूटिंग, प्रो. शुभम सहाय ने ऊर्जा प्रबंधन, स्मार्ट डिवाइसेज, सोनी आरएंडडी बंगलूरू के वरिष्ठ वैज्ञानिक डाॅ. बृजराज सिंह ने औद्योगिक स्वचालन, मशीन इंटेलिजेंस के बारे में विचार रखे।

संस्थान के चेयरमैन प्रणवीर सिंह ने कहा कि शोध, नवाचार और वैज्ञानिक सोच से ही भारत को विश्व की महाशक्ति बनाया जा सकता है। समूह निदेशक प्रो. मनमोहन शुक्ला ने बताया कि 140 से अधिक वैज्ञानिकों ने इस सम्मेलन में अपनी रुचि दिखाई है। 10 देशों से शोधकर्ता शामिल हो रहे हैं। इस दौरान डाॅ. राघवेंद्र सिंह, निदेशक अकादमिक्स डाॅ. विशाल नागर, डाॅ. रघुराज सिंह सूर्यवंशी और डीन डाॅ. आरती सक्सेना मौजूद रहीं।


डीआरडीओ के साथ काम कर रहे हैं शहर के कई शिक्षण संस्थान
शोधकर्ताओं के लिए सरकार बड़े दरवाजे खोल रही है। सरकारी परियोजनाओं और रक्षा अनुसंधान कार्यक्रम में काम कर रहे युवाओं के लिए सुनहरा अवसर है। यही नहीं डीआरडीओ सभी विश्वविद्यालयों और तकनीकी शिक्षण संस्थानों के साथ मिलकर काम कर रहा है। इंडस्ट्री-एकेडमिया सहयोग के तहत शहर के कई शिक्षण संस्थानों को इस योजना में शामिल किया जा चुका है। यह बातें एआरएमआरईबी डीआरडीओ रक्षा मंत्रालय के उप निदेशक आदित्य पटेल ने कहीं।


उन्होंने कहा कि देश को तकनीक रूप से सुरक्षित करने की जिम्मेदारी अब युवाओं पर है। कार्यक्रम में डायरेक्टरेट ऑफ एक्स्ट्रा म्यूरल रिसर्च एंड आईपीआर के निदेशक डाॅ. केपी सिंह ने छात्रों को पेटेंट की महत्ता के बारे में जानकारी दी। कहा कि किसी भी तकनीक का पेटेंट जरूरी है। पेटेंट आइडिया को खरीदने के लिए अनुसंधानकर्ता कंपनियां तैयार हैं। उन्होंने कहा कि संस्थानों को आईपीआर के प्रति जागरूकता सम्मेलन कराना जरूरी है।
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