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कानपुर: गेहूं निर्यात पर रोक का बड़ा असर, सौ रुपये टूटा गेहूं, व्यापारियों को पांच करोड़ का नुकसान

Sun, 15 May 2022 11:26 AM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Sun, 15 May 2022 11:26 AM IST
सार

कानपुर में पहले दिन ही गेहूं निर्यात पर रोक का असर देखने को मिला। खाड़ी देशों में भेजी जाने वाली गेहूं की 40 रैक रोकी गईं। वहीं, व्यापारियों का कहना है कि सरकार के इस अचानक फैसले से करोड़ों का नुकसान हुआ है। कंपनियों ने आर्डर रोक दिए हैं।

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India bans export of wheat,  Big effect on businessmen in Kanpur, loss of five crores to traders
गेहूं निर्यात पर रोक का बड़ा असर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

गेहूं के निर्यात पर रोक लगने से शहर के कारोबारियों को करीब पांच करोड़ का झटका लगा है। अगले कुछ दिनों में बाहर जाने वाली गेहूं की 40 रैक रोक दी गई हैं। हालांकि सरकार के इस फैसले से आम जनता को राहत मिलने के आसार हैं। क्योंकि अब यही गेहूं निर्यात न होकर बाजार में बिकेगा। जाहिर है, उपलब्धता बढ़ेगी और भाव टूटेंगे। असर तो पहले ही दिन से दिखने लगा। शनिवार को ही गेहूं का भाव 100 रुपये क्विंटल घट गया। 2175 से 2075 पर आ गया।

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व्यापारियों ने बताया कि विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने शनिवार सुबह अधिसूचना जारी कर गेहूं के निर्यात पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। गेहूं को प्रतिबंधित श्रेणी में रखा गया है। ऐसे कारोबारी जिन्हें लेटर ऑफ क्रेडिट (एलओसी) जारी हो चुके हैं, केवल वही निर्यात कर सकेंगे। दरअसल रूस-यूक्रेन युद्ध की वजह से गेहूं की कीमतों में लगातार तेजी आई है। किसानों को एमएसपी से ज्यादा कीमत बाजार में मिलने लगी। बड़ी-बड़ी कंपनियां बिचौलियों की मदद से गेहूं खरीदकर निर्यात करने लगी थीं।

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हो चुका एक लाख क्विंटल से ज्यादा निर्यात
सीपीसी गोदाम से दो रैक निर्यात के लिए भेजी गई हैं। एक रैक में 27 हजार क्विंटल गेहूं आता है। इस प्रकार 54 हजार क्विंटल गेहूं जा चुका है। इसके अलावा इनलैंड डिपो के जरिेए तीन कंटेनर भेजे जा चुके हैं। एक कंटेनर में करीब 22 हजार क्विंटल गेहूं होता है। कानपुर से खाड़ी देशों के अलावा बांग्लादेश भी गेहूं भेजा जाता है।

India bans export of wheat,  Big effect on businessmen in Kanpur, loss of five crores to traders
ज्ञानेश मिश्रा और विष्णु अग्रवाल - फोटो : अमर उजाला

गेहूं के निर्यात पर रोक लगने से भाव में 100 रुपये प्रति क्विंटल की कमी आई है। अब बाजार में गेहूं ज्यादा आएगा तो भाव कम होगा। इससे आम आदमी को सस्ता गेहूं और आटा मिल सकेगा, लेकिन व्यापारियों को नुकसान हुआ है।  -ज्ञानेश मिश्रा, प्रदेश अध्यक्ष, उप्र खाद्य पदार्थ उद्योग व्यापार मंडल

 

सरकार के इस अचानक फैसले से कानपुर के गेहूं व्यापारियों को पांच करोड़ का नुकसान हुआ है। कंपनियों ने आर्डर रोक दिए हैं। पोर्ट पर पहुंचा गेहूं भी होल्ड कर दिया गया है। जिन कारोबारियों ने खरीद की थी। उनके सामने बड़ी समस्या आ गई है। 40 रैक और जानी थी।  -विष्णु अग्रवाल, गेहूं व्यापारी और निर्यातक

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