आत्मविश्वास, लगन और जुनून के साथ 25 साल बाद दो दोस्तों ने अपने स्कूल के म्यूजिक मेंटर के साथ अपना रॉक बैंड जोशीले अंदाज में फिर से शुरू कर दिया है। यूपी के कानपुर शहर में शुरु हुआ इल्युमिनाती रॉक बैंड आज चर्चा इसलिए बटोर रहा है क्योंकि इस रॉक बैंड को चलाने वाले वे लोग हैं जो कभी स्कूल टाइम में 'संगीत के समंदर' में 'जोश का गोता' लगाते हुए अपना रॉक बैंड चलाते थे।
करियर की चिंता और घरवालों के दबाव की वजह से दोस्तों का रॉक बैंड टूट गया और स्टेज छूट गया लेकिन संगीत से लगाव कभी न छूटा। आज उसी का नतीजा है कि इतने सालों बाद एक बार फिर दोनों दोस्त और उनके मेंटर एक साथ मंच साझा कर युवाओं को झूमने पर मजबूर कर रहे हैं।
कानपुर के इन तीनों उत्साही लोगों के नाम हैं-राजा चौधरी (निवासी-लाल बंगला), मनोज अग्रवाल (निवासी-चंद्र विहार) और कुमार देवनानी (निवासी-सिविल लाइंस)। राजा चौधरी इंजीनियरिंग और एमबीए की पढ़ाई पूरी करने के बाद सरकारी नौकरी पाई। इस समय राजा ऑर्डनेंस फैक्ट्री, लकनऊ के डिप्टी जनरल मैनेजर हैं। वहीं मनोज अग्रवाल ने एमबीए पूरा करने के बाद बैंकिंग सेक्टर में अपना करियर बना लिया। मौजूदा समय में मनोज आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज लिमिटेड में असिस्टैंट वाइस प्रेसिडेंट हैं। वहीं कुमार देवनानी मेन्स वियर गारमेंट्स के व्यापारी हैं।
ऐसे शुरू हुई रॉक बैंड बनाने की दिलचस्प कहानी
मनोज और कुमार दोनों कैंट स्थित डॉ. वीरेंद्र स्वरूप स्कूल से पढ़े हुए है वहीं राजा चौधरी इसी स्कूल में म्यूजिक मेंटर थे। 25 साल बाद स्कूल टाइम का रॉक बैंड दोबारा शुरू करने की दिलचस्प कहानी सुनाते हुए मनोज बताते हैं कि करियर बैंकिंग सेक्टर में बना लिया, शादी हुई और बच्चे भी बड़े हो गए। लेकिन इन सबके बीच मैं कहीं न कहीं म्यूजिक और अपने रॉक बैंड को लेकर मन में उत्साह रहता था।
कुछ दिनों पहले कानपुर क्लब में एक पार्टी के दौरान मेरी मुलाकात स्कूल टाइम के रॉक बैंड लीडर राजा चौधरी से हुई। हम दोनों के बीच पुराने दिनों की यादों से जुड़ी तमाम बातें हुईं इसी बीच फिर से रॉक बैंड शुरू करने का विचार आया। कुमार देवनानी से इस बारे में मीटिंग की।