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आईआईटी वैज्ञानिक का दावा: जमाखोरी, कालाबाजारी और ट्रांसपोर्टेशन की समस्या से अक्सीजन किल्लत
Fri, 30 Apr 2021 03:40 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Fri, 30 Apr 2021 03:40 PM IST
सार
ऑक्सीजन की किल्लत से ज्यादा जमाखोरी, कालाबाजारी और ट्रांसपोर्टेशन की समस्या है। आईआईटी कानपुर द्वारा तैयार किया गया ऑक्सीजन ऑडिट एप इन कमियों को दूर करने में सहायक साबित होगा।
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ऑक्सीजन गैस सिलेंडर लेने के लिए लगी लाइन
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
कोरोना काल में उत्तर प्रदेश में ऑक्सीजन की किल्लत से ज्यादा जमाखोरी, कालाबाजारी और ट्रांसपोर्टेशन की समस्या है। आईआईटी कानपुर द्वारा तैयार किया गया ऑक्सीजन ऑडिट एप इन कमियों को दूर करने में सहायक साबित होगा। यह दावा किया है आईआईटी के वरिष्ठ वैज्ञानिक पद्मश्री प्रो. मणींद्र अग्रवाल ने। इनकी ही देखरेख में यह एप तैयार किया गया है।
एप तैयार करने वाले विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना काल में ऑक्सीजन संकट उत्पन्न करने में निजी अस्पताल भी जाने-अनजाने भागीदार बन रहे हैं। वे अपने मरीजों के लिए ऑक्सीजन की जमाखोरी कर रहे हैँ, लेकिन इससे हजारों दूसरे जरूरतमंद वंचित रह जा रहे हैं। इसके प्रतिकूल परिणाम भी सबके सामने हैं।
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एप तैयार करने वाले विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना काल में ऑक्सीजन संकट उत्पन्न करने में निजी अस्पताल भी जाने-अनजाने भागीदार बन रहे हैं। वे अपने मरीजों के लिए ऑक्सीजन की जमाखोरी कर रहे हैँ, लेकिन इससे हजारों दूसरे जरूरतमंद वंचित रह जा रहे हैं। इसके प्रतिकूल परिणाम भी सबके सामने हैं।
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इसे देखते हुए ही राज्य सरकार ने आईआईटी कानपुर को 24 घंटे के अंदर ऑक्सीजन ऑडिट एप तैयार करने का निर्देश दिया था। इसकी जिम्मेदारी प्रो. मणींद्र अग्रवाल को मिली। प्रो. अग्रवाल ने संस्थान के प्रो. दीपू फिलिप्स के साथ मिलकर तय समय में एप तैयार कर सरकार को सौंप दिया है। अब अलग-अलग विश्वविद्यालयों की टीमें 60 अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों का डाटा जुटाकर एप में अपलोड कर रही हैं।
इसके आधार पर एनालिसिस रिपोर्ट तैयार होगी। प्रो. अग्रवाल का कहना है कि यह एप ऑक्सीजन की किल्लत दूर करने में काफी मददगार साबित होगा। उन्होंने बताया कि एप में होने वाली डाटा फीडिंग के आधार पर यह भई पता चलेगा कि किस अस्पताल में कितने सिलिंडर हैं। इनमें से कितने खाली और कितने भरे हैं। साथ ही अस्पताल के आसपास कितनी दूरी पर ऑक्सीजन उपलब्ध है, इसकी भी जानकारी मिलेगी।
एप से आसान होगी आपूर्ति
प्रो. अग्रवाल ने कहा कि प्रदेश या देश में ऑक्सीजन को लेकर जमाखोरी, कालाबाजारी को रोकने और ट्रांसपोर्टेशन व्यवस्था में सुधार की जरूरत है। एप के माध्यम से अस्पताल को समय पर ऑक्सीजन की आपूर्ति हो सकेगी। किसी भी अस्पताल के लिए ऑक्सीजन सिलिंडर की जमाखोरी करना मुश्किल होगा।
इसके आधार पर एनालिसिस रिपोर्ट तैयार होगी। प्रो. अग्रवाल का कहना है कि यह एप ऑक्सीजन की किल्लत दूर करने में काफी मददगार साबित होगा। उन्होंने बताया कि एप में होने वाली डाटा फीडिंग के आधार पर यह भई पता चलेगा कि किस अस्पताल में कितने सिलिंडर हैं। इनमें से कितने खाली और कितने भरे हैं। साथ ही अस्पताल के आसपास कितनी दूरी पर ऑक्सीजन उपलब्ध है, इसकी भी जानकारी मिलेगी।
एप से आसान होगी आपूर्ति
प्रो. अग्रवाल ने कहा कि प्रदेश या देश में ऑक्सीजन को लेकर जमाखोरी, कालाबाजारी को रोकने और ट्रांसपोर्टेशन व्यवस्था में सुधार की जरूरत है। एप के माध्यम से अस्पताल को समय पर ऑक्सीजन की आपूर्ति हो सकेगी। किसी भी अस्पताल के लिए ऑक्सीजन सिलिंडर की जमाखोरी करना मुश्किल होगा।