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Kanpur: आईआईटी के शोध से वैक्सीन होगी सुरक्षित और प्रभावी, विशेषज्ञों ने चूहों पर किया सफल प्रयोग
Tue, 21 Jul 2026 10:56 PM IST
Shikha Pandey
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: Shikha Pandey
Updated Tue, 21 Jul 2026 10:56 PM IST
सार
बीएसबीई के विशेषज्ञों ने ईपी67 मॉलिक्यूल की कार्य प्रणाली जान चूहों पर सफल प्रयोग किया। रिसर्च अंतरराष्ट्रीय जनरल में प्रकाशित हुई।
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जानकारी देते प्रो. अरुण कुमार शुक्ला
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
आईआईटी कानपुर के विशेषज्ञों के शोध से अब वैक्सीन और अधिक सुरक्षित व प्रभावी बनाई जा सकेगी। उन्होंने ईपी67 नाम के एक खास मॉलिक्यूल के काम करने के तरीके और व्यवहार को अच्छी तरह से समझ लिया है। यह सी5ए नामक प्रोटीन की तरह इम्यून कोशिकाओं को सक्रिय कर सूजन को कम कर देता है। सी5ए प्रोटीन संक्रमण होने पर अपने आप बनकर प्रतिरक्षा प्रणाली को सक्रिय करता है। वैज्ञानिकों ने मॉलिक्यूल को वैक्सीन में मिलाकर चूहों पर सफल प्रयोग किया। प्रयोगशाला में मानव कोशिकाओं पर काम चल रहा है।
संस्थान के बायोटेक एंड बायोइंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर अरुण कुमार शुक्ला टीम के साथ रिसर्च किया। इसे अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पत्रिका प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज में प्रकाशित किया गया है। कार्य में
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यूनिवर्सिटी ऑफ सदर्न कैलिफोर्निया के प्रोफेसर कॉर्नेलियस गाटी और यूनिवर्सिटी ऑफ क्वींसलैंड के प्रोफेसर ट्रेंट वुडरफ की प्रयोगशालाओं की मदद ली गई है। टीम में अनु दलाल, मनीष यादव, सुधा मिश्रा, मणिशंकर गांगुली, शाची सिन्हा, नबरुण रॉय, दिव्यांशी तिवारी, देबदत्ता मुखर्जी, नीलांजना बनर्जी और रामानुज बनर्जी शामिल रहे।
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संस्थान के बायोटेक एंड बायोइंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर अरुण कुमार शुक्ला टीम के साथ रिसर्च किया। इसे अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पत्रिका प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज में प्रकाशित किया गया है। कार्य में
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यूनिवर्सिटी ऑफ सदर्न कैलिफोर्निया के प्रोफेसर कॉर्नेलियस गाटी और यूनिवर्सिटी ऑफ क्वींसलैंड के प्रोफेसर ट्रेंट वुडरफ की प्रयोगशालाओं की मदद ली गई है। टीम में अनु दलाल, मनीष यादव, सुधा मिश्रा, मणिशंकर गांगुली, शाची सिन्हा, नबरुण रॉय, दिव्यांशी तिवारी, देबदत्ता मुखर्जी, नीलांजना बनर्जी और रामानुज बनर्जी शामिल रहे।
इम्यून कोशिकाओं को करता सक्रिय
प्रो. अरुण कुमार शुक्ला ने बताया कि ईपी67 एक “एडजुवेंट” के रूप में काम करता है। यह वह तत्व होता है, जिसे वैक्सीन में मिलाकर शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को और मजबूत बनाया जाता है। खोज से यह साफ हुआ है कि ईपी67 शरीर की इम्यून कोशिकाओं को सक्रिय करता है, लेकिन अनावश्यक सूजन पैदा नहीं होने देता। उन्होंने बताया कि संक्रमण के दौरान शरीर में सी5ए नामक प्रोटीन बनता है। यह प्रतिरक्षा प्रणाली को सक्रिय करता है, लेकिन अधिक सक्रिय होने पर नुकसान पहुंचा सकता है।इसी प्रक्रिया को ध्यान में रखते हुए ईपर67 विकसित किया। यह केवल लाभकारी प्रभाव देता और नुकसान को कम करता है।
प्रो. अरुण कुमार शुक्ला ने बताया कि ईपी67 एक “एडजुवेंट” के रूप में काम करता है। यह वह तत्व होता है, जिसे वैक्सीन में मिलाकर शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को और मजबूत बनाया जाता है। खोज से यह साफ हुआ है कि ईपी67 शरीर की इम्यून कोशिकाओं को सक्रिय करता है, लेकिन अनावश्यक सूजन पैदा नहीं होने देता। उन्होंने बताया कि संक्रमण के दौरान शरीर में सी5ए नामक प्रोटीन बनता है। यह प्रतिरक्षा प्रणाली को सक्रिय करता है, लेकिन अधिक सक्रिय होने पर नुकसान पहुंचा सकता है।इसी प्रक्रिया को ध्यान में रखते हुए ईपर67 विकसित किया। यह केवल लाभकारी प्रभाव देता और नुकसान को कम करता है।
सी5ए का छोटा और सुरक्षित रूप ईपी67
प्रो. शुक्ला ने बताया कि सी5ए का एक छोटा और सुरक्षित रूप तैयार किया, जिसे ईपी67 नाम दिया गया। यह केवल दस अमीनो एसिड से बना है और शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली के लाभकारी हिस्से को सक्रिय करता है, जबकि अनावश्यक सूजन को काफी हद तक रोकता है। यह मुख्य रूप से डेंड्रिटिक कोशिकाओं और मैक्रोफेज नामक प्रतिरक्षा कोशिकाओं को सक्रिय करता है, जिससे शरीर में लंबे समय तक सुरक्षा प्रदान करने में मदद करती हैं। उन कोशिकाओं को बहुत कम प्रभावित करता है, जो अत्यधिक सूजन का कारण बनती हैं।
प्रो. शुक्ला ने बताया कि सी5ए का एक छोटा और सुरक्षित रूप तैयार किया, जिसे ईपी67 नाम दिया गया। यह केवल दस अमीनो एसिड से बना है और शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली के लाभकारी हिस्से को सक्रिय करता है, जबकि अनावश्यक सूजन को काफी हद तक रोकता है। यह मुख्य रूप से डेंड्रिटिक कोशिकाओं और मैक्रोफेज नामक प्रतिरक्षा कोशिकाओं को सक्रिय करता है, जिससे शरीर में लंबे समय तक सुरक्षा प्रदान करने में मदद करती हैं। उन कोशिकाओं को बहुत कम प्रभावित करता है, जो अत्यधिक सूजन का कारण बनती हैं।
प्रयोगशाला में मानव कोशिकाओं पर हुई जांच
मॉलिक्यूल का ट्रायल वैक्सीन के साथ चूहों पर हुआ। उनकी प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया अधिक मजबूत हुई। इनमें कोविड-19 वायरस के खिलाफ विकसित वैक्सीन भी शामिल रही। ईपी67 ने एमआरएसए जैसे एंटीबायोटिक-प्रतिरोधी बैक्टीरिया के संक्रमण से लड़ने की क्षमता दिखाई। शोधकर्ताओं ने प्रयोगशाला में मानव कोशिकाओं पर परीक्षण कर पुष्टि की। ईपी67, सी5एआर1 रिसेप्टर को सक्रिय करता है, लेकिन यह प्रक्रिया सी5ए की तुलना में अधिक नियंत्रित और सुरक्षित होती है।
मॉलिक्यूल का ट्रायल वैक्सीन के साथ चूहों पर हुआ। उनकी प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया अधिक मजबूत हुई। इनमें कोविड-19 वायरस के खिलाफ विकसित वैक्सीन भी शामिल रही। ईपी67 ने एमआरएसए जैसे एंटीबायोटिक-प्रतिरोधी बैक्टीरिया के संक्रमण से लड़ने की क्षमता दिखाई। शोधकर्ताओं ने प्रयोगशाला में मानव कोशिकाओं पर परीक्षण कर पुष्टि की। ईपी67, सी5एआर1 रिसेप्टर को सक्रिय करता है, लेकिन यह प्रक्रिया सी5ए की तुलना में अधिक नियंत्रित और सुरक्षित होती है।