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पांच करोड़ साल से टकरा रहीं इंडियन-यूरेशियन प्लेटें
ब्यूरो, अमर उजाला कानपुर
Updated Mon, 27 Apr 2015 02:06 AM IST
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नेपाल और भारत में तबाही मचाने वाली इंडियन-यूरेशियन प्लेट 5 करोड़ साल पहले से टकरा रही हैं। प्लेट तमाम बार टूटीं और इसकी वजह से भूकंप आए हैं। जमीन के नीचे प्रेशर बनने से एक बड़ा भूकंप 1934 में आया था। अब इसी क्षेत्र में फिर प्रेशर बना और पिछले दो दिनों से भूकंप के तगड़े झटके लग रहे हैं।
इस तथ्य का खुलासा अमेरिकन जूलोजिकल सर्वे और आईआईटी कानपुर के डाटा कंपाइलेशन से हुआ है। इससे पता चला है कि इंडियन और यूरेशियन प्लेट की हलचल काफी समय से चल रही है। अमेरिकन जूलोजिकल सर्वे से आईआईटी को जो डाटा मिले हैं, उसके मुताबिक इंडियन प्लेट का डायरेक्शन नार्थ-ईस्ट है।
ये प्लेट 45-50 मिलीमीटर के हिसाब से बढ़ रही हैं। आईआईटी के भू-विज्ञानी प्रो. जावेद एन मलिक और डॉ. वनिजा ने बताया कि इंडियन प्लेट ओसनिक (समुद्री) है, जो कि कांटीनेंटल प्लेट पर भारी पड़ती है। यही वजह है कि बड़े झटके के बाद भी इंडिया को ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचा है।
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नेपाल कांटीनेंटल प्लेट की श्रेणी में है। जो भूकंप आया है, उसके न आने की भविष्यवाणी पहले की गई थी। यह झूठी साबित हो चुकी है। इस क्षेत्र में लगातार प्रेशर बनते हैं, जिसके रिलीज होने के बाद भूकंप आते हैं। भूकंप का जो केंद्र है, वहां 5 करोड़ साल पहले दरिया था।
बाद में प्लेट विकसित हुई और इनमें टकराव होने लगे। अब प्लेट टूटी, फिर धरती हिलने-डुलने लगी। विज्ञानी ने बताया कि अमेरिकन जूलोजिकल सर्वे ने जो डाटा जारी किए हैं, उसके मुताबिक रविवार को दोपहर 12:43 बजे से अपराह्न चार बजे के बीच भूकंप के पांच झटके लगे हैं।
पहला झटका 6.7 मैग्नीट्यूड का था। इसके बाद 5, 4.7, 4.6 और 4.5 मैग्नीट्यूड के झटके लगे हैं। सभी झटकों ने जमीन के दस किलोमीटर नीचे तक प्रभाव डाला है। शनिवार को ही भूकंप के 41 झटके लगे थे। दरअसल, छह मैग्नीट्यूड के ऊपर जो भी झटके आते हैं, उसे दूर तक महसूस किया जाता है।
अब तक तीन बड़े (7.8, 6.6 और 6.7 मैग्नीट्यूड) झटके लगे हैं। इसका असर कानपुर में भी देखने को मिला है। विज्ञानियों ने कहा कि भारत चारों तरफ से घिरा है। हर ओर से एक्टिव और वीक (कमजोर) फाल्ट काम कर रहे हैं, जिसकी वजह से अक्सर भूकंप आते हैं।
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इस तथ्य का खुलासा अमेरिकन जूलोजिकल सर्वे और आईआईटी कानपुर के डाटा कंपाइलेशन से हुआ है। इससे पता चला है कि इंडियन और यूरेशियन प्लेट की हलचल काफी समय से चल रही है। अमेरिकन जूलोजिकल सर्वे से आईआईटी को जो डाटा मिले हैं, उसके मुताबिक इंडियन प्लेट का डायरेक्शन नार्थ-ईस्ट है।
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ये प्लेट 45-50 मिलीमीटर के हिसाब से बढ़ रही हैं। आईआईटी के भू-विज्ञानी प्रो. जावेद एन मलिक और डॉ. वनिजा ने बताया कि इंडियन प्लेट ओसनिक (समुद्री) है, जो कि कांटीनेंटल प्लेट पर भारी पड़ती है। यही वजह है कि बड़े झटके के बाद भी इंडिया को ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचा है।
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नेपाल कांटीनेंटल प्लेट की श्रेणी में है। जो भूकंप आया है, उसके न आने की भविष्यवाणी पहले की गई थी। यह झूठी साबित हो चुकी है। इस क्षेत्र में लगातार प्रेशर बनते हैं, जिसके रिलीज होने के बाद भूकंप आते हैं। भूकंप का जो केंद्र है, वहां 5 करोड़ साल पहले दरिया था।
बाद में प्लेट विकसित हुई और इनमें टकराव होने लगे। अब प्लेट टूटी, फिर धरती हिलने-डुलने लगी। विज्ञानी ने बताया कि अमेरिकन जूलोजिकल सर्वे ने जो डाटा जारी किए हैं, उसके मुताबिक रविवार को दोपहर 12:43 बजे से अपराह्न चार बजे के बीच भूकंप के पांच झटके लगे हैं।
पहला झटका 6.7 मैग्नीट्यूड का था। इसके बाद 5, 4.7, 4.6 और 4.5 मैग्नीट्यूड के झटके लगे हैं। सभी झटकों ने जमीन के दस किलोमीटर नीचे तक प्रभाव डाला है। शनिवार को ही भूकंप के 41 झटके लगे थे। दरअसल, छह मैग्नीट्यूड के ऊपर जो भी झटके आते हैं, उसे दूर तक महसूस किया जाता है।
अब तक तीन बड़े (7.8, 6.6 और 6.7 मैग्नीट्यूड) झटके लगे हैं। इसका असर कानपुर में भी देखने को मिला है। विज्ञानियों ने कहा कि भारत चारों तरफ से घिरा है। हर ओर से एक्टिव और वीक (कमजोर) फाल्ट काम कर रहे हैं, जिसकी वजह से अक्सर भूकंप आते हैं।