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वृद्धावस्था में रहना हो स्वस्थ तो आग पर पके भोजन से रहें दूर, आपके काम की खबर
Mon, 30 Dec 2019 05:09 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Mon, 30 Dec 2019 05:09 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
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योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. ओमप्रकाश आनंद ने कानपुर में रविवार को बताया कि वृद्धावस्था में आग में पका भोजन जितना कम खाएंगे, उतने स्वस्थ रहेंगे। भोजन पचाने के लिए रोज 4-5 किलोमीटर पैदल चलें या आधा घंटा योगासन, प्राणायाम करें।
यदि कभी बीमार पड़ जाएं तो नेती, भ्रस्ती व कुंजर क्रिया से बात, कफ, पित्त को शांत कर लें। इस उम्र में अपनी आयु का कुछ हिस्सा कम से कम दशांश परमार्थ में अवश्य लगाना चाहिए।
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यदि कभी बीमार पड़ जाएं तो नेती, भ्रस्ती व कुंजर क्रिया से बात, कफ, पित्त को शांत कर लें। इस उम्र में अपनी आयु का कुछ हिस्सा कम से कम दशांश परमार्थ में अवश्य लगाना चाहिए।
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गीता नगर स्थित देव अंतरराष्ट्रीय योग केंद्र के प्राकृतिक योग चिकित्सक डॉ. आनंद ने अपने 67वें जन्मदिन पर मां विद्यावती प्राकृतिक आयुर्विज्ञान पुस्तकालय का उद्घाटन किया। इस मौके पर उन्होंने बताया कि भोजन में केमिकल बहुत बढ़ गए हैं।
इससे बचने के लिए अंकुरित मूंग, चना, मूंगफली आदि का सेवन करें। सप्ताह में एक दिन उपवास जरूरी है। रेकी आचार्य पूनम ने स्वास्थ्य के लिए उपयोगी टिप्स दिए। कहा कि बिना भूख व कम भूख में खाना न खाएं। भूख में भी कम खाएं। मल, मूत्र को रोके नहीं।
इससे बचने के लिए अंकुरित मूंग, चना, मूंगफली आदि का सेवन करें। सप्ताह में एक दिन उपवास जरूरी है। रेकी आचार्य पूनम ने स्वास्थ्य के लिए उपयोगी टिप्स दिए। कहा कि बिना भूख व कम भूख में खाना न खाएं। भूख में भी कम खाएं। मल, मूत्र को रोके नहीं।