कैफियात एक्सप्रेस हादसे में यूं बची यात्रियों की जान, इन दो बड़ें फैक्टर ने किया काम
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... तो औरैया रेल हादसे में ऐसे बच गई यात्रियों की जान
- अचानक ब्रेक लगने व दुर्घटना के समय एक दूसरे के ऊपर नहीं चढ़ते ये कोच।
- 107 किलोमीटर प्रति घंटा थी ट्रेन की रफ्तार।
- इस दौरान ट्रेन रेलवे स्टेशन पाता से गुजरी।
- पाता स्टेशन से 8 K.m आगे करीब 2:50 बजे खंभा संख्या 1114/16 पार कर आगे बढ़ी थी कि वीरपुर गांव के पास रेलवे फ्रेट कॉरिडोर योजना की साइट पर एक मिट्टी भरा डंपर रेलवे ट्रैक पर पलटा दिखा।
- यह देख ड्राइवर ने इमरजेंसी ब्रेक लगाया।
- गति अधिक होने के कैफियात एक्सप्रेस का इंजन डंपर से टकरा गया।
- इससे बोगियां बिखर गईं। इंजन के पीछे लगा एक ब्रेक यान, चार जनरल कोच एवं पांच एसी कोच रेलवे ट्रैक से उतर गए। एक जनरल कोच पलट गया, एक और अन्य जनरल कोच ट्रैक के किनारे खड्ड में लटक गया।
- ट्रेन के कोच को नहीं पहुंचा ज्यादा नुकसान।
हादसे के बाद भगवान का नाम जपने लगे थे यात्री
- सवा तीन बजे यूपी 100 को यात्रियों ने सूचना दी।
- सूचना के कुछ देर बाद यूपी 100 के साथ एंबुलेंस पहुंची। धमाके की आवाज सुनकर ग्रामीण भी पहुंचे और बचाव कार्य शुरू हुआ।
- यात्री भी अपनों को बचाने में जुट गए। लगभग चार बजे से प्रशासन की ओर से बचाव कार्य पूरी तरह से शुरू कर दिया गया।
- अस्पताल में भी बदहवास दिखे यात्री भगवान का नाम जपते दिखे।
- दिल्ली-हावड़ा रूट पर हुए रेल हादसे में घायल यात्री अस्पताल में ही भगवान का नाम जप रहे थे। आंखों में हादसे का मंजर तैर रहा था। सोचते ही कंपकंपी छूट जाती थी। यात्री बताते हैं कि उस समय सभी सो रहे थे और जैसे ही तेज झटके की आवाज लगी वैसे ही चीख पुकार मच गई।