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भारतीय शैली को व्यक्त करती है हिंदी
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कानपुर देहात। हिंदी भारतीय लोगों की अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम है। देश के अधिकांश हिस्सों में बोली जाने वाली भाषा हिंदी लगातार समृद्ध होती जा रही है। हिंदी राष्ट्र के माथे की बिंदी है। यह भारतीय जीवन शैली को व्यक्त करने वाली भाषा है।
हिंदी के विद्वानों का तर्क है कि बेहतर साहित्य रचकर हिंदी का प्रचार प्रसार किया जाना चाहिए। युवा पीढ़ी में हिंदी के प्रति रुझान बढ़ाने के लिए सरकारी व कोर्ट के कामकाज की शैली में बदलाव के नियम सख्त बनाने होंगे। इन जगहों पर भी हिंदी का प्रयोग अनिवार्य रूप से किया जाना चाहिए। इससे आमजन को भी काफी सहूलियत होगी। कोर्ट के फैसले व सरकारी दफ्तरों में हिंदी का प्रयोग होने से लोगों का रुझान इसकी ओर बढ़ेगा।
हिंदी अब लोगों के हृदय में जगह बना चुकी है। भारतीय संस्कृति की वाहक हिंदी महाकाव्यों, निबंधों, उपन्यासों आदि में महत्वपूर्ण विधाओं के जरिये लगातार लोक प्रिय हो रही है। नए रचनाकार अनेक विधाओं से हिंदी को मजबूत कर रहे हैं। - डॉ राजेश शर्मा, शिक्षक
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कवियों की विरासत सहेजते हिंदी ने व्यापार और तकनीकी की भाषा के रुप में मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। संपर्क भाषा के रुप में यह देश की सर्वाधिक बोली और समझी जाने वाली भाषा है। ये निरंतर प्रगति कर रही है। - डॉ प्राची शर्मा, हिंदी प्रवक्ता डायट पुखरायां
देश की हर सीमाओं को एक सूत्र में बांधने की क्षमता हिंदी में ही है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने कहा था कि मैं चाहता हूं की सभी भाषाएं अपने-अपने प्रदेश में रानी बन कर रहें लेकिन हिंदी इनकी महारानी बनकर पूरे भारत में राज करे। - संगीता दीक्षित, शिक्षक
हिंदी पूरी तरह से वैज्ञानिक भाषा है। यह जन सामान्य के लिए सहज, सरल है। इसलिए गांधी जी ने 1918 में हिंदी साहित्य सम्मेलन में हिंदी भाषा को राष्ट्रभाषा बनाने की वकालत की थी। हिंदी ही राष्ट्र की पहचान है। - आलोक श्रीवास्तव, शिक्षक
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हिंदी के विद्वानों का तर्क है कि बेहतर साहित्य रचकर हिंदी का प्रचार प्रसार किया जाना चाहिए। युवा पीढ़ी में हिंदी के प्रति रुझान बढ़ाने के लिए सरकारी व कोर्ट के कामकाज की शैली में बदलाव के नियम सख्त बनाने होंगे। इन जगहों पर भी हिंदी का प्रयोग अनिवार्य रूप से किया जाना चाहिए। इससे आमजन को भी काफी सहूलियत होगी। कोर्ट के फैसले व सरकारी दफ्तरों में हिंदी का प्रयोग होने से लोगों का रुझान इसकी ओर बढ़ेगा।
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हिंदी अब लोगों के हृदय में जगह बना चुकी है। भारतीय संस्कृति की वाहक हिंदी महाकाव्यों, निबंधों, उपन्यासों आदि में महत्वपूर्ण विधाओं के जरिये लगातार लोक प्रिय हो रही है। नए रचनाकार अनेक विधाओं से हिंदी को मजबूत कर रहे हैं। - डॉ राजेश शर्मा, शिक्षक
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कवियों की विरासत सहेजते हिंदी ने व्यापार और तकनीकी की भाषा के रुप में मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। संपर्क भाषा के रुप में यह देश की सर्वाधिक बोली और समझी जाने वाली भाषा है। ये निरंतर प्रगति कर रही है। - डॉ प्राची शर्मा, हिंदी प्रवक्ता डायट पुखरायां
देश की हर सीमाओं को एक सूत्र में बांधने की क्षमता हिंदी में ही है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने कहा था कि मैं चाहता हूं की सभी भाषाएं अपने-अपने प्रदेश में रानी बन कर रहें लेकिन हिंदी इनकी महारानी बनकर पूरे भारत में राज करे। - संगीता दीक्षित, शिक्षक
हिंदी पूरी तरह से वैज्ञानिक भाषा है। यह जन सामान्य के लिए सहज, सरल है। इसलिए गांधी जी ने 1918 में हिंदी साहित्य सम्मेलन में हिंदी भाषा को राष्ट्रभाषा बनाने की वकालत की थी। हिंदी ही राष्ट्र की पहचान है। - आलोक श्रीवास्तव, शिक्षक