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यूपी में गोल्ड लोन के नाम पर 'करोड़ों का फर्जीवाड़ा', मिलीभगत में शामिल बैंक अफसर, ऐसे हो रहा खेल
Fri, 04 Jan 2019 02:46 PM IST
gaurav gaurav
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: gaurav gaurav
Updated Fri, 04 Jan 2019 02:46 PM IST
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कानपुर में एचडीएफसी बैंक की दो शाखाओं में नकली सोना रखकर गोल्ड लोन देने के मामले में बैंक के किसी बड़े अफसर का हाथ होने की बात से पुलिस अफसर इंकार नहीं कर रहे हैं। अफसरों का कहना है कि निचले लेवल के अफसर इस तरह का फर्जीवाड़ा नहीं कर सकते हैं। यह भी देखा जा रहा है कि फर्जीवाड़े के पीछे और कौन-कौन लोग शामिल हैं। मूल्यांकनकर्ताओं को किस का तरह का प्रलोभन देकर फर्जी रिपोर्ट बनाने के लिए राजी किया गया। लोन लेने के लिए फर्जी दस्तावेज तो नहीं लगाए गए। आरोपियों से पूछताछ के बाद ही पता चल सकेगा।
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कानपुर में एचडीएफसी बैंक की सिविल लाइंस और गोविंदनगर शाखा में गोल्ड लोन के नाम पर फर्जीवाड़े की जांच शुरू हो गई है। सीओ कोतवाली अजय कुमार ने गुरुवार को शिकायतकर्ता सिविल लाइंस शाखा के अफसर अतेंद्र सिंह से पूछताछ की। सामने आया कि दर्जनों मामलों में फर्जीवाड़ा कर बैंक को करोड़ों का चूना लगाया गया है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक शहर और प्रदेश की कई अन्य शाखाओं में भी फर्जीवाड़ा की बात सामने आई है। प्रारंभिक जांच में 24 से ज्यादा मामलों में फर्जीवाड़ा कर लोन देने का मामला सामने आया है। पुलिस को पता चला है कि बैंक के ही गोल्ड लोन ऑफिसरों ने कई अन्य शाखाओं में तैनात वैल्युअर के साथ मिलकर फर्जीवाड़ा किया है।
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पिता को दिलाया 10.96 लाख लोन
अतेंद्र सिंह ने सीओ को बताया कि सिविल लाइंस शाखा में बेकनगंज निवासी गुलाम शब्बीर, लुकमान अहमद, हसरत मोहानी कैंपस चमनगंज निवासी मोहम्मद नफीस, कर्नलगंज के मोहम्मद असलम बैंक के अधिकृत वैल्युअर (मूल्यांकनकर्ता) हैं। इसी शाखा में तैनात गोल्ड लोन ऑफीसर रोहिल सक्सेना ने पिता सुरेंद्र कुमार सक्सेना के जरिये गोल्ड लोन के लिए आवेदन कराया। फिर मूल्यांकनकर्ताओं के साथ मिलकर गिरवी रखे गए नकली सोने को असली साबित करा दिया। इस तरह पिछले साल तीन बार में सुरेंद्र को 10.96 लाख का लोन दिलाया। इसी तरह माल रोड निवासी अनुराग सिंह 7.78 लाख और सौरभ तिवारी को 2.64 लाख का लोन पास कराया।
अतेंद्र सिंह ने सीओ को बताया कि सिविल लाइंस शाखा में बेकनगंज निवासी गुलाम शब्बीर, लुकमान अहमद, हसरत मोहानी कैंपस चमनगंज निवासी मोहम्मद नफीस, कर्नलगंज के मोहम्मद असलम बैंक के अधिकृत वैल्युअर (मूल्यांकनकर्ता) हैं। इसी शाखा में तैनात गोल्ड लोन ऑफीसर रोहिल सक्सेना ने पिता सुरेंद्र कुमार सक्सेना के जरिये गोल्ड लोन के लिए आवेदन कराया। फिर मूल्यांकनकर्ताओं के साथ मिलकर गिरवी रखे गए नकली सोने को असली साबित करा दिया। इस तरह पिछले साल तीन बार में सुरेंद्र को 10.96 लाख का लोन दिलाया। इसी तरह माल रोड निवासी अनुराग सिंह 7.78 लाख और सौरभ तिवारी को 2.64 लाख का लोन पास कराया।
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सोना नकली, फिर भी ओके की रिपोर्ट लगाई
अतेंद्र ने बताया कि पूछताछ में वैल्युअर और रोहिल संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। पिता सुरेंद्र कुमार ने बेटे के किए पर माफी मांगी और लोन की रकम का कुछ हिस्सा बैंक में जमा करा दिया। अनुराग सिंह और सुरेंद्र के मामले में भी सोने के आभूषण नकली होने की बात रोहिल को मालूम थी। गोविंद नगर शाखा में तैनात वैल्युअर हाजी गुलाम शकील ने नकली गहनों को असली बता दिया। उसकी रिपोर्ट के आधार पर ब्रह्मनगर, शुक्लागंज उन्नाव के रवींद्र, जूही खुर्द के अमन कुमार, घाटमपुर की ज्योति तिवारी को लोन दे दिया गया।
अतेंद्र ने बताया कि पूछताछ में वैल्युअर और रोहिल संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। पिता सुरेंद्र कुमार ने बेटे के किए पर माफी मांगी और लोन की रकम का कुछ हिस्सा बैंक में जमा करा दिया। अनुराग सिंह और सुरेंद्र के मामले में भी सोने के आभूषण नकली होने की बात रोहिल को मालूम थी। गोविंद नगर शाखा में तैनात वैल्युअर हाजी गुलाम शकील ने नकली गहनों को असली बता दिया। उसकी रिपोर्ट के आधार पर ब्रह्मनगर, शुक्लागंज उन्नाव के रवींद्र, जूही खुर्द के अमन कुमार, घाटमपुर की ज्योति तिवारी को लोन दे दिया गया।
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इस तरह इन लोगों के बीच कुल 23 लाख 75 हजार का लोन बांटा गया। सीओ ने बताया कि मामले की जांच चल रही है। रिजर्व बैंक से भी पता लगाया जा रहा कि एचडीएफसी बैक गोल्ड लोन देने के लिए अधिकृत है या नहीं। फर्जीवाड़े में जिन लोगों के नाम सामने आए हैं, उनके घर पुलिस को भेजा गया था। वे अपने-अपने घरों में नहीं मिले। बकौल सीओ मामले की जांच कर एक-दो दिन में एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।