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Kanpur News: मिड सेमेस्टर परीक्षा देने से रोकने पर एचबीटीयू छात्रों का कुलपति कार्यालय के बाहर हंगामा

Fri, 14 Feb 2025 02:16 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 14 Feb 2025 02:16 AM IST
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HBTU students create ruckus outside VC's office after being stopped from giving mid-semester exam
एचबीटीयू में प्रदर्शन करते छात्र। - फोटो : संवाद
कानपुर। हरकोर्ट बटलर टेक्निकल यूनिवर्सिटी में कम उपस्थिति के कारण छात्रों को मिड सेमेस्टर-एक की परीक्षाओं में शामिल नहीं किया गया। इससे नाराज छात्रों ने गुरुवार को कुलपति कार्यालय के बाहर जमकर हंगामा किया। हालांकि विवि प्रशासन ने छात्रों से कहा कि यह सख्ती उनके अच्छे भविष्य के लिए ही है। छात्रों का कोई नुकसान नहीं होगा, लेकिन इस बार मिड सेम नहीं देने दिया जाएगा।
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शासनादेश के अनुसार एचबीटीयू सहित अन्य संस्थानों में छात्रों की 75 फीसदी उपस्थिति अनिवार्य की गई है। संस्थान के बार-बार कहने के बाद भी सभी बैच के करीब 150 छात्रों ने अपनी उपस्थिति पूरी नहीं की। हालांकि छात्रों ने आरोप लगाया कि शिक्षक मनमाने तरह से छात्रों की उपस्थिति को दिखा रहे हैं।
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कागज पर उपस्थिति ली जाती है, किसी भी छात्र की उपस्थिति ईआरपी पर अपलोड नहीं है, न छात्रों को कम उपस्थिति होने की सूचना दी गई। अचानक से छात्रों के पास मैसेज पहुंचा कि कम उपस्थिति के कारण वह मिड सेमेस्टर की परीक्षा नहीं दे सकते हैं। छात्रों का कहना है कि इससे प्लेसमेंट में भी फर्क पड़ेगा।
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सख्ती छात्रों के हित के लिए, नहीं होगा नुकसान
विवि के प्रति कुलपति प्रो. दीप्तिक परमार, कुलसचिव डॉ. अंजू वर्मा, जीएल देवनानी ने कहा कि यह सख्ती छात्रों के हित के लिए है। संस्थान में दाखिला लेने के दौरान छात्रों को स्पष्ट रूप से 75 फीसदी उपस्थिति के बारे में बताया जाता है। हर साल छात्र लापरवाही करते हैं और उपस्थिति को गंभीरता से नहीं लेते।

कई बार छात्रों को छूट दी गई, जिसका गलत फायदा उठाया गया। प्रो. परमार ने कहा कि दो मिड सेम होते हैं। अभी पहले मिड सेम से ही छात्रों को वंचित किया गया है। डॉ. अंजू वर्मा ने कहा कि छात्रों के पास अपने भविष्य को सुधारने का मौका है। अगर छात्र निरंतर आते हैं और किसी कारणवश के उनके फाइनल में अच्छे अंक नहीं आते हैं तो उनको एक और मौका दिया जा सकता है। अभी निश्चित रूप से पेपर में नहीं बैठने दिया जाएगा।



पिछले साल खाली हाथ लौट गई थीं 16 कंपनियां
रजिस्ट्रार का कहना है कि पिछले साल वैसे तो प्लेसमेंट 80 फीसदी गया था और अधिकतम पैकेज 20 लाख रहा था। फिर भी 16 कंपनियां ऐसी थीं, जो खाली हाथ लौट गईं। जब इन सब पर मंथन किया तो समझ में आया कि छात्र कक्षाओं में नहीं आते। क्लास में कोर्स के अलावा भी कई जानकारियां दी जाती हैं, छात्रों को अपडेट किया जाता है। इस कारण इसे सख्ती से लागू किया गया।
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