फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Hardoi News ›   Hardoi: Controversy again in Sant Kripal Nagar regarding property and domination

Hardoi: संपत्ति एवं वर्चस्व को लेकर संत कृपाल नगर में फिर मचा घमासान, प्रशासन ने सभी कार्यक्रमों पर लगाई रोक

Sat, 03 Sep 2022 03:17 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरदोई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरदोई Published by: शिखा पांडेय Updated Sat, 03 Sep 2022 03:17 PM IST
विज्ञापन
Hardoi: Controversy again in Sant Kripal Nagar regarding property and domination
प्रेस क्लब में जानकारी देते स्वर्णलता व उनके पति मनोज - फोटो : अमर उजाला

हरदोई जिले के संडीला में संत कृपाल नगर की संपत्ति को लेकर स्वामी दिव्यानंद के घोषित उत्तराधिकारी देवेंद्र मोहन व उनकी नातिन स्वर्णलता गुप्ता के बीच एक बार फिर घमासान शुरू हो गया है। संत कृपाल नगर में संडीला में 17 व 18 सितंबर को आध्यत्मिक कार्यक्रम में भंडारे का कार्यक्रम तय है। जिला प्रशासन को खुफिया एजेंसियों से पता चला कि कार्यक्रम के दौरान स्वामी दिव्यानंद के अनुयायियों के बीच कोई न कोई विवाद हो सकता है।

विज्ञापन


इसलिए जिला प्रशासन ने सभी कार्यक्रर्मों पर रोक लगा दी। रोकी की सूचना का एक बोर्ड भी संत कृपाल नगर के मुख्य गेट पर लगवा दिया। इसके बाद शुक्रवार शाम को स्वर्णलता ने अपने पति डॉ. मनोज के साथ प्रेस क्लब आकर अपना पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि जब संत कृपाल नगर में दिव्यानंद स्प्रिचुअल फाउंडेशन ट्रस्ट संचालित है। ऐसे में देवेंद्र मोहन का अपनी माता के नाम रजनी केयर फाउंडेशन बनाने का क्या उद्देश्य था। जबकि उनका यानी स्वर्णलता व देवेन्द्र मोहन मन आध्यात्मिक गतिविधियों का संचालन करना है। उधर देवेन्द्र मोहन इन दिनों विदेश में है। इस कारण उनसे बात नहीं हो सकी। बहरहाल यह घमासान अब बढ़ता दिखाई दे रहा है।

विज्ञापन

40 वर्ष पहले हुई थी संत कृपाल नगर की स्थापना
करीब 40 वर्ष पूर्व 1980 में स्वामी दिव्यानंद ने शामली मुजफ्फरनगर से यहां आकर ग्रामसभा की एक बीघा जमीन खरीद कर सन्तकृपाल नगरआश्रम की स्थापना की थी। दिव्यानंद स्प्रिचुअल फाउंडेशन के नाम से ट्रस्ट बना कर यहां का कार्य संचालन शुरू किया था। वर्ष 2000 तत्कालीन मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह की उपस्थिति में स्वामी जी ने देवेंद्र मोहन को अपना उत्तराधिकारी घोषित कर समाधि लेने की घोषणा की थी। फिर राजनाथ सिंह के समझाने पर उन्होंने अपना निर्णय बदल दिया था। देवेन्द्र मोहन ने यह पद कतिपय कारणों वश नहीं संभाला। वह विदेश चले गए थे। उसके बाद 3 जनवरी 2014 को स्वामी दिव्यानंद का स्वर्गवास हो गया। तीन दिन तक अंतिम संस्कार के लिए उनका पार्थिव शरीर रखा रहा। उनके अनुयायी देवेंद्र मोहन को बुला रहे थे लेकिन जब वह नहीं आए तो 6 जनवरी को प्रशासन व पुलिस की देखरेख में उनकी नातिन स्वर्णलता व दिव्यानंद के भाई वीपी गुप्ता ने संत कृपाल नगर में उनका अंतिम संस्कार किया था।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed