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Hardoi: 20 बरस बाद भाभी के मंच पर साथ नजर आईं अनीता वर्मा
Wed, 24 Apr 2024 11:05 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरदोई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरदोई
Published by: शिखा पांडेय
Updated Wed, 24 Apr 2024 11:05 PM IST
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सपा कार्यालय में पूर्व विधायक राजेश्वरी और पूर्व सांसद ऊषा वर्मा के बीच में जिला पंचायत की पूर्व अध्
- फोटो : अमर उजाला
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राजनीति में पद हासिल करने के लिए रिश्ताें को सहेजना बेहद जरूरी होता है, लेकिन यह भी सच है कि पद के लिए अक्सर करीबी रिश्ते खत्म हो जाते हैं। इसका जिक्र बुधवार को सपा प्रत्याशियों के नामांकन के मौके पर सपा कार्यालय परिसर में हुई सभा में मौजूद एक शख्सियत के चलते हो रहा है। लगभग 20 साल के अंतराल के बाद जिला पंचायत की पूर्व अध्यक्ष और मौजूदा सदस्य अनीता वर्मा अपनी भाभी सपा प्रत्याशी पूर्व सांसद ऊषा वर्मा के मंच पर मौजूद नजर आईं।
जनपद के दिग्गज नेता रहे परमाईलाल की बेटी अनीता वर्मा अपनी सगी भाभी वर्ष 1995 में जिला पंचायत अध्यक्ष चुनी गईं राजेश्वरी देवी के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाकर चर्चा में आई थीं। अविश्वास प्रस्ताव पारित होने के बाद अनीता वर्मा जिला पंचायत अध्यक्ष भी बनीं। साल 2004 के लोकसभा चुनाव में वह अपनी छोटी भाभी ऊषा वर्मा के खिलाफ भाजपा प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतरीं। यह बात और है कि सपा के टिकट पर लड़ीं ऊषा ननद को हराने में कामयाब रहीं।
वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में एक बार फिर अनीता वर्मा तब चर्चा में आईं जब उन्होंने तत्कालीन बावन हरियावां से गोपामऊ में परिवर्तित हुई सीट से बसपा विधायक राजेश्वरी का टिकट कटवाकर खुद बसपा प्रत्याशी बन गईं। इसके बाद राजेश्वरी को न सिर्फ बसपा छोड़नी पड़ी, बल्कि क्षेत्र भी बदलना पड़ गया। इस चुनाव में राजेश्वरी सांडी से विधायक बन गई, लेकिन अनीता वर्मा गोपामऊ से हार गईं। मौजूदा समय में अनीता वर्मा टड़ियावां द्वितीय से जिला पंचायत की सदस्य हैं। उनकी क्षेत्र के साथ ही अपने समाज में पकड़ मानी जाती है। बुधवार को सपा कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में वह अपनी दोनों भाभियों राजेश्वरी और ऊषा वर्मा के बीच जनता का अभिवादन करतीं नजर आईं। उन्होंने कार्यक्रम को संबोधित भी किया।
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जनपद के दिग्गज नेता रहे परमाईलाल की बेटी अनीता वर्मा अपनी सगी भाभी वर्ष 1995 में जिला पंचायत अध्यक्ष चुनी गईं राजेश्वरी देवी के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाकर चर्चा में आई थीं। अविश्वास प्रस्ताव पारित होने के बाद अनीता वर्मा जिला पंचायत अध्यक्ष भी बनीं। साल 2004 के लोकसभा चुनाव में वह अपनी छोटी भाभी ऊषा वर्मा के खिलाफ भाजपा प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतरीं। यह बात और है कि सपा के टिकट पर लड़ीं ऊषा ननद को हराने में कामयाब रहीं।
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वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में एक बार फिर अनीता वर्मा तब चर्चा में आईं जब उन्होंने तत्कालीन बावन हरियावां से गोपामऊ में परिवर्तित हुई सीट से बसपा विधायक राजेश्वरी का टिकट कटवाकर खुद बसपा प्रत्याशी बन गईं। इसके बाद राजेश्वरी को न सिर्फ बसपा छोड़नी पड़ी, बल्कि क्षेत्र भी बदलना पड़ गया। इस चुनाव में राजेश्वरी सांडी से विधायक बन गई, लेकिन अनीता वर्मा गोपामऊ से हार गईं। मौजूदा समय में अनीता वर्मा टड़ियावां द्वितीय से जिला पंचायत की सदस्य हैं। उनकी क्षेत्र के साथ ही अपने समाज में पकड़ मानी जाती है। बुधवार को सपा कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में वह अपनी दोनों भाभियों राजेश्वरी और ऊषा वर्मा के बीच जनता का अभिवादन करतीं नजर आईं। उन्होंने कार्यक्रम को संबोधित भी किया।
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