Graduate MLC election: भाजपा के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बनी शिक्षक एमएलसी सीट, थम गया चुनाव प्रचार
एमएलसी चुनाव के लिए 30 को होने वाले मतदान को देखते हुए नियमानुसार एक दिन पहले शनिवार को शाम पांच बजे चुनाव प्रचार बंद हो गया। अब पार्टी पदाधिकारी और प्रत्याशी बिना किसी हो हल्ला के घर-घर जाकर संपर्क करेंगे।
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स्नातक एमएलसी चुनाव को लेकर भाजपा जितनी आश्वस्त है, शिक्षक एमएलसी को लेकर उतनी ही सतर्क भी। दरअसल, शिक्षक एमएलसी के चुनाव में भाजपा ने पहली बार अपना प्रत्याशी उतारा है। यही वजह है कि यह सीट भाजपा के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बन गई है। उन्नाव, कानपुर देहात और कानपुर नगर इन तीनों जिलों को मिलाकर स्नातक और शिक्षक एमएलसी के लिए 30 जनवरी को मतदान होना है।
मतदाताओं की संख्या के लिहाज से देखा जाए तो इन दोनों सीटों पर कुल मतदाताओं की संख्या सिर्फ दो लाख 30 हजार के करीब है। उसमें भी शिक्षक सीट के लिए मात्र 19 हजार मतदाता हैं। इसमें सिर्फ शिक्षक ही वोट डालेंगे। इतने कम मतदाताओं तक पकड़ बनाने के लिए भाजपा ने अपने सभी स्टार प्रचारकों को मैदान में उतार रखा है।
मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष के अलावा सभी सांसद, विधायक, दोनों उप मुख्यमंत्री और अन्य मंत्री भी शामिल हैं। इसके अलावा संगठन के पदाधिकारियों ने भी इस चुनाव में जीत के लिए हर संभव प्रयास शुरू कर दिया है। स्नातक चुनाव में भाजपा प्रत्याशी का यह तीसरा चुनाव है जबकि शिक्षक एमएलसी पद के प्रत्याशी का यह पहला चुनाव।
थम गया चुनाव प्रचार
एमएलसी चुनाव के लिए 30 को होने वाले मतदान को देखते हुए नियमानुसार एक दिन पहले शनिवार को शाम पांच बजे चुनाव प्रचार बंद हो गया। अब पार्टी पदाधिकारी और प्रत्याशी बिना किसी हो हल्ला के घर-घर जाकर संपर्क करेंगे। इधरपांडु नगर के आईटीआई में बने स्ट्रांग रूम से मतपेटियां लेकर कर्मचारी रविवार को बूथाें के लिए रवाना होंगे। 29 को पूरी व्यवस्था का निरीक्षण करने के लिए चुनाव आयोग से नियुक्त प्रेक्षकों की टीम यहां पहुंचेगी।