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कानपुर में कमिश्नरेट लागू करने की तैयारी में शासन, नोएडा-लखनऊ कमिश्नर ने बताया कैसे कसी अपराध पर लगाम
Thu, 14 Jan 2021 11:01 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Thu, 14 Jan 2021 11:01 AM IST
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लखनऊ पुलिस कमिश्नर आईपीएस डीके ठाकुर, नोएडा पुलिस कमिश्नर आईपीएस आलोक सिंह
- फोटो : amar ujala
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नोएडा और लखनऊ में पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली लागू हुए एक साल पूरे हो गए हैं। कमिश्नरेट के परिणाम सकारात्मक रहे हैं। पुलिस को अधिकार मिले तो कानून-व्यवस्था बेहतर हुई। अपराधियों पर नकेल कसने में आसानी हुई और महिला अपराध में भी कमी आई। दोनों शहरों में बीते कई वर्षों की अपेक्षा 2020 में हर तरह के अपराध में कमी दर्ज की गई। कानपुर और वाराणसी में कमिश्नरेट लागू करने का खाका शासन तैयार कर चुका है।
संगठित अपराध पर लगाम
नोएडा पुलिस कमिश्नर आईपीएस आलोक सिंह ने बताया कि कमिश्नरेट लागू होने से मजिस्ट्रियल पावर पुलिस को मिली। इससे शातिर अपराधियों पर गुंडा एक्ट और गैंगस्टर की ज्यादा कार्रवाई कम समय में की गईं। इससे संगठित अपराध में कमी आई। धारा 144 लागू करने का अधिकार मिलने की वजह से कानून-व्यवस्था बिगड़ने की स्थित नहीं आई। आंदोलन हो या कोई अन्य गतिविधि अधिकार का इस्तेमाल कर धारा 144 लागू की गई। पहले इन सभी कार्रवाई के लिए मजिस्ट्रेट पर निर्भर रहना पड़ता था। इससे वक्त जाया होता था और स्थितियां गंभीर हो जाती थीं।
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संगठित अपराध पर लगाम
नोएडा पुलिस कमिश्नर आईपीएस आलोक सिंह ने बताया कि कमिश्नरेट लागू होने से मजिस्ट्रियल पावर पुलिस को मिली। इससे शातिर अपराधियों पर गुंडा एक्ट और गैंगस्टर की ज्यादा कार्रवाई कम समय में की गईं। इससे संगठित अपराध में कमी आई। धारा 144 लागू करने का अधिकार मिलने की वजह से कानून-व्यवस्था बिगड़ने की स्थित नहीं आई। आंदोलन हो या कोई अन्य गतिविधि अधिकार का इस्तेमाल कर धारा 144 लागू की गई। पहले इन सभी कार्रवाई के लिए मजिस्ट्रेट पर निर्भर रहना पड़ता था। इससे वक्त जाया होता था और स्थितियां गंभीर हो जाती थीं।
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भ्रष्टाचार में कमी, निगरानी बढ़ी
लखनऊ पुलिस कमिश्नर आईपीएस डीके ठाकुर ने बताया कि कमिश्नरेट लागू होने से जिले में पुलिस बल की संख्या बढ़ गई। खासकर आईपीएस और पीपीएस अफसर की तैनाती अधिक की गई है। इससे थाने स्तर की निगरानी करना आसान है। जब भी कोई शिकायत दरोगा, इंस्पेक्टर आदि की मिलती है तो उसमें अधिकतर मामलों की जांच राजपत्रित अधिकारी से कराई जाती है। इससे पुलिसिंग बेहतर हो रही है और भ्रष्टाचार में कमी आई है।
महिला सुरक्षा पर विशेष ध्यान
दोनों शहरों में महिला सुरक्षा इकाई बनाई गई है। इसमें एक महिला डीसीपी की तैनाती की गई है। ये पद आईपीएस अफसर का है। वहीं थानों में महिला अपराध की निगरानी के लिए एक अलग विंग बनाई गई है। इससे महिला अपराध संबंधी मामलों में कार्रवाई तेज हुई। अपराधियों को सजा कम समय में मिली और महिला अपराध में कमी भी आई। इसी तरह अब साइबर क्राइम को लेकर अलग विंग बनाई जा रही है। इसमें भी साइबर एक्सपर्ट आईपीएस की डीसीपी के पद पर तैनाती दी जाएगी। इससे साइबर अपराध पर शिकंजा कसना मकसद होगा।
लखनऊ पुलिस कमिश्नर आईपीएस डीके ठाकुर ने बताया कि कमिश्नरेट लागू होने से जिले में पुलिस बल की संख्या बढ़ गई। खासकर आईपीएस और पीपीएस अफसर की तैनाती अधिक की गई है। इससे थाने स्तर की निगरानी करना आसान है। जब भी कोई शिकायत दरोगा, इंस्पेक्टर आदि की मिलती है तो उसमें अधिकतर मामलों की जांच राजपत्रित अधिकारी से कराई जाती है। इससे पुलिसिंग बेहतर हो रही है और भ्रष्टाचार में कमी आई है।
महिला सुरक्षा पर विशेष ध्यान
दोनों शहरों में महिला सुरक्षा इकाई बनाई गई है। इसमें एक महिला डीसीपी की तैनाती की गई है। ये पद आईपीएस अफसर का है। वहीं थानों में महिला अपराध की निगरानी के लिए एक अलग विंग बनाई गई है। इससे महिला अपराध संबंधी मामलों में कार्रवाई तेज हुई। अपराधियों को सजा कम समय में मिली और महिला अपराध में कमी भी आई। इसी तरह अब साइबर क्राइम को लेकर अलग विंग बनाई जा रही है। इसमें भी साइबर एक्सपर्ट आईपीएस की डीसीपी के पद पर तैनाती दी जाएगी। इससे साइबर अपराध पर शिकंजा कसना मकसद होगा।